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Jhunjhunu: 17 दिन पहले बना था पिता, उसे अनाथ छोड़ गया जवान; पत्नी की चीख सुन रो पड़ा गांव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू Published by: झुंझुनू ब्यूरो Updated Tue, 02 Jun 2026 01:54 PM IST
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सार

Jhunjhunu: झुंझुनूं के इंडाली गांव निवासी भारतीय सेना के ग्रेनेडियर सुनील कुमार का सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद निधन हो गया। महज 17 दिन पहले उनके घर बेटे का जन्म हुआ था। सोमवार को तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। 

soldier who became father 17 days ago returned wrapped in tricolor Jhunjhunu village wept hearing wife scream
जवान के परिवार को तिरंगा सौंपते सेना के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिस आंगन में 17 दिन पहले नवजात बेटे की किलकारियां गूंजी थीं, सोमवार को उसी घर से एक वीर बेटे की तिरंगे में लिपटी अंतिम विदाई हुई। गांव इंडाली का माहौल उस समय गम में डूब गया, जब भारतीय सेना के ग्रेनेडियर सुनील कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। हर आंख नम थी, हर चेहरा मायूस और हर दिल अपने वीर सपूत को खोने के दर्द से भरा हुआ था।



बेटे के जन्म की खुशियां मातम में बदलीं
30 वर्षीय ग्रेनेडियर सुनील कुमार कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार में बेटे के जन्म की खुशियां थीं। घर में बधाइयों का दौर चल रहा था और दशोठण की तैयारियां हो रही थीं। सुनील अपने 17 दिन के मासूम बेटे को गोद में लेकर उसके भविष्य के सपने देख रहे थे। पत्नी रिंकू देवी की आंखों में भी खुशियों की चमक थी। लेकिन किसे पता था कि नियति इतनी बड़ी बेरहमी दिखाएगी।
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सड़क हादसे ने छीन लिया परिवार का सहारा
29 मई को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सुनील को पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जयपुर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गए। जैसे ही उनके निधन की खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
सोमवार को जब तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो हजारों लोग अपने वीर बेटे को अंतिम सलाम देने उमड़ पड़े। झुंझुनूं से इंडाली तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “सुनील कुमार अमर रहे” के नारों से आसमान गूंज उठा। रास्ते भर लोगों ने पुष्पवर्षा कर अपने सैनिक को श्रद्धांजलि दी।

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17 दिन के बेटे को गोद में लेकर पहुंची पत्नी
सबसे भावुक पल तब आया, जब पत्नी रिंकू देवी अपने 17 दिन के मासूम बेटे को गोद में लेकर पति के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं। पति का पार्थिव शरीर देखकर वह बिलख पड़ीं। उनकी चीख सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक उठीं। जिस बच्चे ने अभी दुनिया को ठीक से देखना भी शुरू नहीं किया, उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका था।

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