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Rajasthan: रणथंभौर में बाघों का साम्राज्य बढ़ा, 50% के करीब टाइगर यहीं बसे; सरिस्का में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी

Tue, 28 Jul 2026 09:05 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Tue, 28 Jul 2026 09:05 PM IST
सार

Rajasthan News: राजस्थान में बाघों की संख्या बढ़कर 149 हो गई है। राज्य के पांच टाइगर रिजर्व में रणथंभौर सबसे आगे है, जहां 72 बाघ मौजूद हैं। वन विभाग के अनुसार इस साल 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया है। विशेषज्ञ इसे राजस्थान के स्वस्थ होते वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं।
 

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Tiger territory expands in Ranthambore, with nearly 50% of the tigers settled there
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस से पहले राजस्थान के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के पांच टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 149 पहुंच गई है। इनमें रणथंभौर टाइगर रिजर्व सबसे आगे है, जहां अकेले 72 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं।
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एक साल में 135 से बढ़कर 149 हुई बाघों की संख्या
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार रणथंभौर, सरिस्का, धौलपुर-करौली, मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या इस साल 149 हो गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 135 था।
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54 बाघिनों ने दिए 53 शावकों को जन्म
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसी अरुण प्रसाद ने बताया कि इस साल राज्य के पांचों टाइगर रिजर्व में 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया है। वर्ष 2025 में 52 बाघिनों ने 43 शावकों को जन्म दिया था। सरिस्का टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 28 शावकों का जन्म दर्ज किया गया।
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रणथंभौर में सबसे ज्यादा 72 टाइगर
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 66 से बढ़कर 72 हो गई है। वहीं सरिस्का में भी संख्या 50 से बढ़कर 56 पहुंच गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती बाघ आबादी इस बात का संकेत है कि राजस्थान के जंगलों की स्थिति बेहतर हो रही है।

20 साल पहले सिर्फ 18-20 बाघ रह गए थे
विशेषज्ञों का कहना है कि करीब दो दशक पहले राजस्थान में बाघों की संख्या घटकर केवल 18 से 20 रह गई थी। उस समय यह प्रजाति गंभीर संकट में पहुंच गई थी। अब राजस्थान देश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप में शामिल हो चुका है।

रणथंभौर में 50 वयस्क बाघ और 22 शावक
राज्य में मौजूद 149 बाघों में करीब 96 वयस्क बाघ और बाघिन हैं, जबकि बाकी शावक हैं। रणथंभौर में लगभग 50 वयस्क बाघ और 22 शावक मौजूद हैं। वन विभाग के अनुसार रणथंभौर देश के सबसे सफल टाइगर रिजर्व में शामिल है, जहां प्रजनन और शावकों के जीवित रहने की दर बेहतर है।

माचली बाघिन की विरासत से बढ़ा संरक्षण अभियान
रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन माचली (T-16) ने संरक्षण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने अपने जीवनकाल में 18 शावकों को जन्म दिया, जिनके वंशजों से सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी जैसे क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली।

बढ़ती संख्या बनी नई चुनौती
हालांकि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रणथंभौर की क्षमता करीब 40 से 50 बाघों की मानी जाती है, जबकि वर्तमान में यहां 72 बाघ मौजूद हैं। ऐसे में बाघों के लिए नए क्षेत्रों का विकास जरूरी है।


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कैलादेवी क्षेत्र को विकसित करने पर जोर
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रणथंभौर से बाहर निकलने वाले बाघ अक्सर मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और मध्य प्रदेश के जंगलों की ओर जाते हैं। ऐसे में कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य को पूरी तरह विकसित टाइगर हैबिटेट बनाने की जरूरत है।
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