दिखावे का विकास: टोंक के इस गांव में श्मशान तक रास्ता नहीं, ग्रामीण बोले- अब रास्ता बनेगा या वोट नहीं पड़ेगा
Tonk News: नाराज ग्रामीणों ने कहा कि जब एक इंसान मरने के बाद भी सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं पा सकता, तो विकास के दावे व्यर्थ हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही श्मशान तक पक्का रास्ता और रपटा नहीं बनाया गया, तो आगामी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
विस्तार
टोंक जिले के पीपलू क्षेत्र के जयकिशनपुरा गांव में हालात ऐसे हो चले हैं कि जीवन की अंतिम यात्रा भी सम्मान के साथ पूरी नहीं हो पा रही। गांव के श्मशान घाट तक पहुंचने के रास्ते की दशा इतनी खराब है कि हर साल बारिश में वह पूरी तरह पानी और कीचड़ से भरकर बंद हो जाता है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि ग्रामीण अब निजी खातेदारी जमीनों में अपनों का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। शुक्रवार को ग्रामीण भोलूराम गुर्जर का अंतिम संस्कार भी खेत में ही किया गया, क्योंकि श्मशान तक पहुंचना असंभव था।
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'या तो रास्ता बनेगा, या हम वोट नहीं डालेंगे'
गांववालों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। उनका कहना है कि जब एक इंसान मरने के बाद भी सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं पा सकता, तो विकास के दावे व्यर्थ हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही श्मशान तक पक्का रास्ता और रपटा नहीं बनाया गया, तो आगामी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि यह अब केवल एक सड़क या रपटे की मांग नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदना की लड़ाई है।
बच्चों और किसानों के लिए भी रोज की परेशानी
श्मशान जाने वाले रास्ते में एक ढाणी भी पड़ती है, जहां बच्चों को स्कूल जाने में हर दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश के मौसम में बना नाला जानलेवा बन जाता है। उस रास्ते से न तो शव यात्रा निकल सकती है, न किसान अपने खेत तक पहुंच सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मजबूत रपटा बना दिया जाए, तो गांव की आधी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
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‘वर्षों से मांग जारी, लेकिन समाधान शून्य’
जयकिशनपुरा गांव के सीताराम शर्मा, गिर्राज गुर्जर, मोहनलाल गुर्जर, अर्जुन गुर्जर, राजेन्द्र शर्मा (वार्ड पंच), शंकर शर्मा, हनुमान गुर्जर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन, स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से कई बार मिलकर ज्ञापन सौंपे। लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिले, काम कभी नहीं हुआ।
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