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हिमाचल: होम्योपैथिक परिषद में बिना मंजूरी के खर्च कर दिए 1.71 करोड़, रिपोर्ट में सामने आईं अनियमितताएं

सुरेश शांडिल्य, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 17 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, परिषद निधि से 1.71 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बिना अनुमोदित बजट के खर्च की गई है। यह हिमाचल प्रदेश होम्योपैथिक व्यवसायी नियम 1983 का उल्लंघन है।

1.71 crore spent by Homeopathic parishad without approval; irregularities revealed in report.
जांच(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश राज्य होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति परिषद में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, परिषद निधि से 1.71 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बिना अनुमोदित बजट के खर्च की गई है। यह हिमाचल प्रदेश होम्योपैथिक व्यवसायी नियम 1983 का उल्लंघन है। हिमाचल प्रदेश राज्य लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट में 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2025 तक के लेखों में गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन का पर्दाफाश हुआ है।



ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1992 से परिषद का विधिवत गठन ही नहीं हुआ है, जिससे अध्यक्ष पद रिक्त रहा। यह ऑडिट रिपोर्ट राज्य लेखा परीक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक रवींद्र कंवर की निगरानी में तैयार की गई। लेखा परीक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया है। परिषद की मंजूरी के बिना स्टाफ की दोबारा नियुक्ति हुई। आउटसोर्सिंग पर 15.42 लाख रुपये का अनियमित भुगतान भी किया गया। डॉक्टरों और व्यवसायियों के पंजीकरण शुल्क से 55 हजार रुपये गायब पाए गए। यह राशि कैश बुक में दर्ज नहीं हुई और न ही बैंक खाते में जमा की गई।

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कर्मचारियों के वेतन और भविष्य निधि में गलत निर्धारण से 2.93 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान

कर्मचारियों के वेतन और भविष्य निधि में गलत निर्धारण से 2.93 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। अध्यक्ष पद रिक्त होने के बावजूद 2.56 लाख रुपये के बिल पंजीयक स्तर पर पास किए गए। इन्हें सक्षम अधिकारी की मंजूरी नहीं मिली थी। परिषद के पास लाखों रुपये बैंक खातों में निष्क्रिय पड़े थे। अतिरिक्त राशि को सावधि जमा में निवेश नहीं किया गया।

परिषद को ब्याज की भारी हानि, लाखों का निवेश पर मूल प्रमाण पत्र सुरक्षित नहीं

परिषद को ब्याज की भारी हानि हुई। लाखों रुपये के निवेश के बावजूद सावधि जमा रजिस्टर और मूल प्रमाण पत्र सुरक्षित नहीं रखे गए। इससे परिपक्वता पर मिले ब्याज की जांच असंभव हो गई। परिषद की चल-अचल संपत्ति और स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी नहीं हुआ। इससे सामग्री के दुरुपयोग और चोरी की आशंका बढ़ी।
 

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क्या बोले आयुष मंत्री और सचिव

अभी मेरे पास यह ऑडिट रिपोर्ट नहीं आई है। इसे देखने के बाद इसका परीक्षण किया जाएगा। -यादविंद्र गोमा, आयुष मंत्री, हिमाचल सरकार।

अभी इसकी जानकारी नहीं है। इसका पता किया जाएगा। -ए शाइनामोल, सचिव, आयुष, हिमाचल सरकार

बिना मंजूरी के किस साल कितना खर्चा किया

वित्तीय वर्ष खर्च (रुपये में)
2010-11 3,89,449
2011-12 4,05,682
2012-13 4,92,984
2013-14 5,43,946
2014-15 6,17,176
2015-16 6,86,955
2016-17 8,02,262
2017-18 8,87,478
2018-19 9,96,373
2019-20 10,75,314
2020-21 10,08,584
2021-22 10,65,966
2022-23 16,18,581
2023-24 33,42,806
2024-25 31,81,984
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