HPRERA: खरीदार से धोखाधड़ी पर बिल्डर को 78.10 लाख ब्याज सहित लौटाने का आदेश
प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (एचपी रेरा) ने एक महिला खरीदार से धोखाधड़ी के मामले में सख्त रुख अपनाया है।
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हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (एचपी रेरा) ने एक महिला खरीदार से धोखाधड़ी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। रेरा ने मैसर्स राजदीप एंड कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 78.10 लाख रुपये की निवेश राशि 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि यह राशि 60 दिनों के भीतर खरीदार को वापस की जाए। मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर ने दावा किया कि 23 दिसंबर 2024 को एक नया बिक्री समझौता किया गया था, जिसके तहत फ्लैट का कब्जा 31 दिसंबर 2027 तक देने की शर्त तय की गई है।
बिल्डर ने इसी आधार पर शिकायत को समयपूर्व बताते हुए खारिज करने की मांग की। हालांकि, रेरा ने दस्तावेजों की जांच में कई गंभीर विसंगतियां पाईं। एक प्रति पर प्रमोटर के हस्ताक्षर नहीं थे, जबकि दूसरी प्रति में शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर मूल दस्तावेजों से अलग पाए गए। खरीदार ने इन्हें फर्जी और डिजिटल रूप से तैयार किए गए हस्ताक्षर बताया। प्राधिकरण ने इस समझौते को संदिग्ध मानते हुए कहा कि इसे वैधानिक जिम्मेदारियों से बचने के उद्देश्य से तैयार किया गया प्रतीत होता है।
पंजीकरण समाप्ति के बाद कब्जा देने की शर्त वैध कैसे
रेरा ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि परियोजना का रेरा पंजीकरण केवल 4 मार्च 2027 तक वैध है, जबकि कथित नए समझौते में कब्जा देने की तिथि 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई थी। प्राधिकरण ने सवाल उठाया कि जब परियोजना का पंजीकरण मार्च 2027 में समाप्त हो रहा है, तो नौ महीने बाद कब्जा देने की शर्त कैसे वैध मानी जा सकती है।
स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए ऐसा किया
बिल्डर ने यह दलील भी दी कि खरीदार की ओर से दी गई 33.40 लाख रुपये की राशि अलग-अलग संस्थाओं यानी ब्रावो फर्नीचर्स एंड इंटीरियर्स और राजदीप एंड कंपनी हॉस्पिटैलिटी एलएलपी को दी गई थी। इसलिए मूल प्रमोटर कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। जांच में सामने आया कि इन सभी संस्थाओं का संचालन प्रमोटर कंपनी के प्रबंध निदेशक राजदीप शर्मा से जुड़ा हुआ है। रेरा ने माना कि स्टांप ड्यूटी बचाने और वित्तीय जवाबदेही से बचने के लिए सहयोगी कंपनियों के माध्यम से धनराशि घुमाने का प्रयास किया गया, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।