Himachal Tourism: हिमाचल प्रदेश में 24 ईको टूरिज्म चैप्टरों को मंजूरी, पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार मिलेगा
हिमाचल प्रदेश में 24 ईको टूरिज्म चैप्टरों को केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। चयनित साइटों पर विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश में वन विभाग की ओर से ईको टूरिज्म साइटों के आवंटन के लिए तैयार किए गए 24 ईको टूरिज्म चैप्टरों को केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इन चैप्टरों के तहत तैयार योजनाएं अगले 20 वर्षों तक लागू रहेंगी, जिससे पर्यटन को नया आकर्षण मिलेगा। युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
इस बार विभिन्न साइटों के वर्किंग प्लान में ईको टूरिज्म को एक नए चैप्टर के रूप में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत चयनित साइटों पर विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें कैंपिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, फूड स्टॉल, फूड वैन और मोटर बाइकिंग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी, जिससे पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को ऐसे स्थलों की ओर आकर्षित करना है, जहां वे प्रकृति और वन्य जीवन को नुकसान पहुंचाए बिना उसका आनंद ले सकें।
यह पारंपरिक पर्यटन से अलग है। यह ग्रीन ट्रैवल और संसाधनों के संरक्षण पर जोर देता है। इस चैप्टर को मंजूरी मिलने के बाद पर्यटन तो बढ़ेगा ही साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इन ईको टूरिज्म साइटों को एडवर्टाइज करके पर्यटन स्थलों का प्रचार किया जाना है जो न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर हैं बल्कि इनकी यात्रा भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की शर्त पर की जाती है। इस ईको टूरिज्म चैप्टरों के माध्यम से प्रकृतिक संपदा का आनंद लेने के साथ-साथ उसे संरक्षित करने की जिम्मेदारी है।
इन ईको साइटों के टूरिज्म चैप्टरों को मिली मंजूरी
मंजूर किए गए ईको साइटों के टूरिज्म चैप्टरों में प्रदेश के वर्किंग डिवीजन कुल्लू, पार्वती, सराज, पालमपुर, धर्मशाला, ठियोग, शिमला ग्रामीण, रोहड़ू, रामपुर, कोटगढ़, आनी, हमीरपुर, ऊना, कुटलैहड़, बिलासपुर, कुनिहार, मंडी, नाचन, करसोग, डलहौजी, राजगढ़, पवांटा, सोलन और नूरपुर शामिल हैं। इन साइटों को विकसित कर पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।
ईको टूरिज्म चैप्टरों में ब्योरा दिया जाता है क्या गतिविधियां होंगी। यह साइटें पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप मोड पर चलाई जाएंगी। इसके वर्किंग प्लान मंडी में नोडल ऑफिसर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) को भेजा जाता है। इसके बाद यह प्लान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाता है। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद गतिविधियां शुरू की जाती हैं।
हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वन विभाग की ईको टूरिज्म सोसायटी निरंतर कार्य कर रही है। ईको टूरिज्म चैप्टरों को मंजूरी मिलना अच्छा कदम है। इससे ईको साइटों के विकास सहित विभिन्न गतिविधियां होंगी जिससे लोग प्रकृति से जुड़ सकेंगे। -सरोज वर्मा, वन मंडल अधिकारी ईको टूरिज्म