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Drug Alert: हिमाचल में 43 दवाएं मानकों पर नहीं उतरीं खरी, पांच माह में 264 सैंपल हुए फेल

संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के मई के ड्रग अलर्ट में प्रदेश में बनी 43 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। 

43 medicines in Himachal failed to meet quality standards; 264 samples failed in five months.
दवाएं। - फोटो : Freepik.com
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के मई के ड्रग अलर्ट में प्रदेश में बनी 43 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। देशभर में कुल 157 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश की 264 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हो चुके हैं। जनवरी में 71, फरवरी में 73, मार्च में 76, अप्रैल में 31 और मई में 43 दवाओं के नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यह स्थिति प्रदेश के फार्मा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

मई की रिपोर्ट के अनुसार फेल हुई दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों में ऊना की दो, सोलन जिले की 30 और सिरमौर जिले की 11 हैं। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इन दवाओं का स्टॉक बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार कालाअंब स्थित केसपिन कंपनी की विटामिन-ई दवा के लगातार तीन सैंपल फेल हुए हैं। इसके अलावा बद्दी की मार्क लैब की किडनी रोग की दवा, अल्ट्रा ड्रग की बुखार की दवा, जेएमएम फॉर्म्युलेशन की संक्रमणरोधी दवा, मर्टिन एंड ब्राउन की एसिडिटी की दवा, बद्दी की विंग्स कंपनी की कोलेस्ट्रॉल और स्पेन फॉर्म्युलेशन की मिर्गी की दवा भी मानकों पर खरी नहीं उतरी।

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इसके साथ ही बद्दी की लीफोर्ड हेल्थकेयर की कब्ज, क्रेस्ट लाइफ साइंस की सूखी खांसी, सेपनिक्स लाइफ साइंस की जोड़ों के दर्द, एनडीबी कंपनी की एलर्जी, एस्पो फार्मा की खांसी और मार्ग लैब की आयरन की कमी संबंधी दवा के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। वहीं विंग्स बायोटेक की कैंसर, वोजमेड फार्मा की मधुमेह, एक्सनोन की अस्थमा, मोयोसा फार्मा की मसूड़ों की बीमारी, स्विस गार्नियर की ब्लड शुगर और आईबीएन हर्बल की बुखार की दवा सहित कई अन्य उत्पाद भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतर सके। भटोली की पलेना रेमिडीज कंपनी की एलर्जी, कालाअंब को ओरोपिन कंपनी की बैक्टीरिया, निक्सी लेबोरेटरी कंपनी की विटामिन ई, बद्दी की हिल्लर लैब की बुखार, मार्क लेबोरेटरी की उल्टी की दवा का सैंपल भी फेल हुआ है।

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