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Shimla News: रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से 5.9 फीसदी बच्चे टीबी से ग्रसित
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एक्सक्लूसिव-
आईजीएमसी के अध्ययन में खुलासा, मरीजों के संपर्क में आने से बच्चों में बढ़ रहा टीबी रोग
फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में दिखे लक्षण
आदित्य सोफत
शिमला। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर इनमें क्षय रोग (टीबी) के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खतरा तब और बढ़ जाता है, जब बच्चा क्षय रोगियों के संपर्क में आता है। ऐसे बच्चों में न केवल फेफड़ों की टीबी बल्कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में भी क्षय रोग के लक्षण जांच में सामने आए हैं। समय पर उपचार से क्षय रोग की रोकथाम की जा सकती है।
कोई बच्चा अगर क्षय रोगी के संपर्क में रहता है तो उसे बीमारी से बचाने के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जाता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के पीडियाट्रिक और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने वर्ष 2024 और 2025 में पॉजिटिव मामलों पर अध्ययन किया। अध्ययन में यह पता लगाने का प्रयास किया कि क्षय रोगियों के संपर्क में रहने से बच्चे भी टीबी से संक्रमित हो रहे हैं या नहीं। दोनों विभागों ने फैसिलिटी-बेस्ड क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन के माध्यम से विभिन्न जानकारियां जुटाईं। इसमें पाया गया कि टीबी से पीड़ित वयस्कों के संपर्क में आने वाले 5.9 प्रतिशत बच्चे टीबी से ग्रसित पाए गए। इन बच्चों को तुरंत एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी दी गई।
अध्ययन के दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ-साथ निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत क्षय रोगियों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद 236 रोगियों की पहचान की गई। इनके संपर्क में आने वाले 170 बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जबकि अन्य बच्चों को प्रिवेंटिव थेरेपी शुरू करवाई गई। यह अध्ययन डॉ. मंगला सूद, डॉ. गुलनाज हसन और डॉ. मलय सरकार ने किया है। इसे क्यूरियस में प्रकाशित किया है। अध्ययन में टीबी की रोकथाम के लिए कांटेक्ट स्क्रीनिंग और उपचार के महत्व के बारे में भी बताया गया है।
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बच्चों में यह दिखते हैं लक्षण
बच्चों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार या वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे बच्चों में क्षय रोग संक्रमण का जोखिम तीन गुना अधिक पाया गया। लक्षण आधारित जांच (सिम्पटम-बेस्ड स्क्रीनिंग) बच्चों में टीबी की समय पर पहचान करने का प्रभावी तरीका है। हालांकि, बिना लक्षण वाले बच्चों में टीबी के शुरुआती संक्रमण का पता लगाने के लिए छाती के एक्स-रे और अन्य जांचों का भी उपयोग किया गया।
इनसेट
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत यदि घर में किसी व्यक्ति को टीबी हो जाती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। छोटे बच्चों की भी जांच और कांटेक्ट स्क्रीनिंग (संसर्ग जांच) करवानी चाहिए। लक्षण न होने पर भी बचाव की दवा (टीपीटी) बच्चों को टीबी के खतरे से सुरक्षित रख सकती है।
-डॉ. मंगला सूद, बाल रोग विशेषज्ञ एवं अध्ययनकर्ता
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आईजीएमसी के अध्ययन में खुलासा, मरीजों के संपर्क में आने से बच्चों में बढ़ रहा टीबी रोग
फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में दिखे लक्षण
आदित्य सोफत
शिमला। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर इनमें क्षय रोग (टीबी) के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खतरा तब और बढ़ जाता है, जब बच्चा क्षय रोगियों के संपर्क में आता है। ऐसे बच्चों में न केवल फेफड़ों की टीबी बल्कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में भी क्षय रोग के लक्षण जांच में सामने आए हैं। समय पर उपचार से क्षय रोग की रोकथाम की जा सकती है।
कोई बच्चा अगर क्षय रोगी के संपर्क में रहता है तो उसे बीमारी से बचाने के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जाता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के पीडियाट्रिक और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने वर्ष 2024 और 2025 में पॉजिटिव मामलों पर अध्ययन किया। अध्ययन में यह पता लगाने का प्रयास किया कि क्षय रोगियों के संपर्क में रहने से बच्चे भी टीबी से संक्रमित हो रहे हैं या नहीं। दोनों विभागों ने फैसिलिटी-बेस्ड क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन के माध्यम से विभिन्न जानकारियां जुटाईं। इसमें पाया गया कि टीबी से पीड़ित वयस्कों के संपर्क में आने वाले 5.9 प्रतिशत बच्चे टीबी से ग्रसित पाए गए। इन बच्चों को तुरंत एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी दी गई।
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अध्ययन के दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ-साथ निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत क्षय रोगियों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद 236 रोगियों की पहचान की गई। इनके संपर्क में आने वाले 170 बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जबकि अन्य बच्चों को प्रिवेंटिव थेरेपी शुरू करवाई गई। यह अध्ययन डॉ. मंगला सूद, डॉ. गुलनाज हसन और डॉ. मलय सरकार ने किया है। इसे क्यूरियस में प्रकाशित किया है। अध्ययन में टीबी की रोकथाम के लिए कांटेक्ट स्क्रीनिंग और उपचार के महत्व के बारे में भी बताया गया है।
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बच्चों में यह दिखते हैं लक्षण
बच्चों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार या वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे बच्चों में क्षय रोग संक्रमण का जोखिम तीन गुना अधिक पाया गया। लक्षण आधारित जांच (सिम्पटम-बेस्ड स्क्रीनिंग) बच्चों में टीबी की समय पर पहचान करने का प्रभावी तरीका है। हालांकि, बिना लक्षण वाले बच्चों में टीबी के शुरुआती संक्रमण का पता लगाने के लिए छाती के एक्स-रे और अन्य जांचों का भी उपयोग किया गया।
इनसेट
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत यदि घर में किसी व्यक्ति को टीबी हो जाती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। छोटे बच्चों की भी जांच और कांटेक्ट स्क्रीनिंग (संसर्ग जांच) करवानी चाहिए। लक्षण न होने पर भी बचाव की दवा (टीपीटी) बच्चों को टीबी के खतरे से सुरक्षित रख सकती है।
-डॉ. मंगला सूद, बाल रोग विशेषज्ञ एवं अध्ययनकर्ता