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Shimla News: पंचायतें पहली बार खुद बनाएंगी अपनी विकास योजना
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जिला प्रशासन ने सभी पंचायतों को जारी किए निर्देश, आय के स्रोतों भी तलाशने होंगे, इसी माह भेजनी होगी योजना
दुकानों का निर्माण कर किराये पर दे सकती हैं पंचायतें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले की पंचायतें पहली बार अपने विकास की योजना खुद तैयार करेंगी। पंचायत प्रतिनिधि अपनी-अपनी पंचायतों में विकास कार्यों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार करेंगे।
जिला प्रशासन ने इस संबंध में जिले की सभी पंचायतों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य पंचायतों को यह तय करने का अधिकार देना है कि उनके क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं में किन कार्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पंचायतों को विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने के साथ अपनी आय के स्रोत तलाशने का काम भी करना होगा। प्रशासन की योजना है कि पंचायतें अपने क्षेत्रों में आय के ऐसे साधनों को चिह्नित करें जिससे भविष्य में प्रदेश और केंद्र सरकार के बजट पर उनकी निर्भरता कम हो सके। पंचायतों के पास अपनी आय के साधन होंगे तो वे स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को तेजी से पूरा कर सकेंगी। अभी पंचायतें 15वें और 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली वित्तीय सहायता तथा प्रदेश सरकार की ओर से दिए जाने वाले अन्य अनुदानों पर निर्भर हैं।
पंचायतें दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर देकर आय अर्जित कर सकती हैं। इसके अलावा आय के अन्य साधन भी विकसित किए जा सकते हैं। यह विकास योजना पूरे एक वर्ष के लिए तैयार की जाएगी। प्रशासन पंचायत प्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्यों को शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। वर्तमान में पंचायतों में नए प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभाल लिया है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी पंचायतों में जल्द से जल्द कम से कम एक विकास कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सके।
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मूल्यांकन प्रणाली में भी किया जाएगा सुधार
जिला प्रशासन के अनुसार पंचायत उन्नति सूचकांक (पीआई) की डेटा आधारित मूल्यांकन प्रणाली में भी सुधार किया जाएगा। यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, जल और बुनियादी ढांचे सहित नौ प्रमुख विषयों के आधार पर पंचायतों के कार्यों का मूल्यांकन करता है। एडीसी शिमला सचिन शर्मा ने कहा कि पंचायतों को अपना डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे पंचायतें खुद तय कर सकेंगी कि उनके क्षेत्र में किन विकास कार्यों की आवश्यकता है। इस आधार पर जिला स्तर पर भी डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। पंचायतों को अपनी आय के स्रोत विकसित करने पर भी ध्यान देने के लिए कहा है।
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दुकानों का निर्माण कर किराये पर दे सकती हैं पंचायतें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले की पंचायतें पहली बार अपने विकास की योजना खुद तैयार करेंगी। पंचायत प्रतिनिधि अपनी-अपनी पंचायतों में विकास कार्यों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार करेंगे।
जिला प्रशासन ने इस संबंध में जिले की सभी पंचायतों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य पंचायतों को यह तय करने का अधिकार देना है कि उनके क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं में किन कार्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पंचायतों को विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने के साथ अपनी आय के स्रोत तलाशने का काम भी करना होगा। प्रशासन की योजना है कि पंचायतें अपने क्षेत्रों में आय के ऐसे साधनों को चिह्नित करें जिससे भविष्य में प्रदेश और केंद्र सरकार के बजट पर उनकी निर्भरता कम हो सके। पंचायतों के पास अपनी आय के साधन होंगे तो वे स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को तेजी से पूरा कर सकेंगी। अभी पंचायतें 15वें और 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली वित्तीय सहायता तथा प्रदेश सरकार की ओर से दिए जाने वाले अन्य अनुदानों पर निर्भर हैं।
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पंचायतें दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर देकर आय अर्जित कर सकती हैं। इसके अलावा आय के अन्य साधन भी विकसित किए जा सकते हैं। यह विकास योजना पूरे एक वर्ष के लिए तैयार की जाएगी। प्रशासन पंचायत प्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्यों को शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। वर्तमान में पंचायतों में नए प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभाल लिया है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी पंचायतों में जल्द से जल्द कम से कम एक विकास कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सके।
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मूल्यांकन प्रणाली में भी किया जाएगा सुधार
जिला प्रशासन के अनुसार पंचायत उन्नति सूचकांक (पीआई) की डेटा आधारित मूल्यांकन प्रणाली में भी सुधार किया जाएगा। यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, जल और बुनियादी ढांचे सहित नौ प्रमुख विषयों के आधार पर पंचायतों के कार्यों का मूल्यांकन करता है। एडीसी शिमला सचिन शर्मा ने कहा कि पंचायतों को अपना डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे पंचायतें खुद तय कर सकेंगी कि उनके क्षेत्र में किन विकास कार्यों की आवश्यकता है। इस आधार पर जिला स्तर पर भी डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। पंचायतों को अपनी आय के स्रोत विकसित करने पर भी ध्यान देने के लिए कहा है।