सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   AIIMS Bilaspur: EEG machine will help resolve children's brain disorders; no need to travel to Chandigarh or D

एम्स बिलासपुर: बच्चों के दिमाग की उलझनें सुलझाएगी ईईजी मशीन, चंडीगढ़ या दिल्ली के नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 06 Feb 2026 05:00 AM IST
विज्ञापन
सार

एम्स बिलासपुर के पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) विभाग में जल्द ही 64-चैनल की अत्याधुनिक वीडियो ईईजी और पॉलीसोम्नोग्राफी मशीन स्थापित होने जा रही है। 

AIIMS Bilaspur: EEG machine will help resolve children's brain disorders; no need to travel to Chandigarh or D
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों के लिए राहत की खबर है। एम्स बिलासपुर के पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) विभाग में जल्द ही 64-चैनल की अत्याधुनिक वीडियो ईईजी और पॉलीसोम्नोग्राफी मशीन स्थापित होने जा रही है। इस मशीन के आने के बाद अब बच्चों को दिमागी बीमारियों और नींद से जुड़े विकारों के इलाज के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अभी तक प्रदेश में उपलब्ध साधारण मशीनों से जटिल मामलों की पहचान मुश्किल होती थी, लेकिन यह नई तकनीक दिमाग के हर सूक्ष्म सिग्नल को पकड़ने में सक्षम होगी। इस मशीन के साथ हाई-डेफिनिशन कैमरे जुड़े होंगे। जब किसी बच्चे को दौरा पड़ेगा, तो यह मशीन न केवल उसके दिमाग की तरंगों को रिकॉर्ड करेगी, बल्कि उसी पल शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों का वीडियो भी बनाएगी। इससे डॉक्टरों को यह समझने में आसानी होगी कि मिर्गी का प्रकार क्या है और दवा का डोज कितना रखना है। साधारण ईईजी में कम सेंसर होते हैं, जिससे दिमाग के कुछ हिस्से छूट जाते हैं। 

Trending Videos

एम्स की इस नई मशीन में 64 चैनल होंगे, जो दिमाग के एक-एक हिस्से की मैपिंग करेंगे। मशीन में विशेष तौर पर स्लीप एनालिसिस की सुविधा जोड़ी गई है। अगर कोई बच्चा सोते समय सांस लेने में तकलीफ (एपनिया), खर्राटे लेने या सोते हुए चलने जैसी बीमारी से पीड़ित है, तो यह मशीन रात भर उसकी ऑक्सीजन, हृदय गति और दिमाग की हलचल को मॉनिटर कर सही बीमारी पकड़ेगी। अकसर ईईजी के दौरान मरीज को तारों के जाल में बंधकर एक जगह बैठना पड़ता है। लेकिन एम्स द्वारा मंगाई जा रही इस मशीन का इलेक्ट्रोड बॉक्स पोर्टेबल है। यानी जांच के दौरान बच्चा कमरे में थोड़ा-बहुत हिल-डुल भी सकेगा, जिससे वह डरेगा नहीं और जांच के नतीजे भी बेहतर आएंगे। वर्तमान में इस स्तर की 64-चैनल वीडियो ईईजी जांच निजी अस्पतालों में 10,000 से 25,000 रुपये में होती है। एम्स में यह मशीन लगने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को न के बराबर खर्च पर यह सुविधा मिल सकेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

विशेष ईईजी रूम होगा तैयार, मरीजों को अस्पताल में मिलेगा घर जैसा माहौल
संस्थान ने इसके साथ ही एक विशेष ईईजी रूम भी तैयार करने की योजना बनाई है, जहां मरीजों को घर जैसा माहौल मिले। मशीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर होगा, जो खुद डॉक्टर को सिग्नल देगा कि दिमाग के किस हिस्से में गड़बड़ी है। इससे रिपोर्टिंग में मानवीय गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। साथ ही अगले 10 वर्षों तक इस मशीन के रखरखाव की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। यह 64-चैनल वीडियो ईईजी मशीन गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की पहचान में मील का पत्थर साबित होगी। जल्द ही इसे विभाग में स्थापित कर मरीजों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed