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Himachal Budget 2026: बजट आकार ही नहीं, विकास का हिस्सा भी घटा, पंचायत चुनाव से पहले गांव की ओर रुख

बविंद्र वशिष्ठ/शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 22 Mar 2026 10:18 AM IST
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सार

Himachal Budget 2026: शनिवार को पेश किया गया साल 2026-27 का बजट चालू वित्त वर्ष की तुलना में 3586 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। पिछले तीन वर्षों से यह लगातार घट रहा है।

Analysis of the Himachal Government Budget 2026 CM Sukhvinder Singh Sukhu
बजट पेश करने पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू व अन्य। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में इस बार बजट का आकार बढ़ने के बजाय घट गया है। केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने का असर प्रदेश के बजट में स्पष्ट दिख रहा है। शनिवार को पेश किया गया साल 2026-27 का बजट चालू वित्त वर्ष की तुलना में 3586 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। 

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विकट परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार ने यह कटौती की है, लेकिन प्रदेश के बजट में विकास का हिस्सा साल दर साल कम हो रहा है। इस बार भी विकासात्मक कार्यों के लिए चार फीसदी बजट कम हो गया है। सौ में महज 20 रुपये ही पूंजीगत कार्यों यानी विकास के लिए रखे गए हैं।

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पिछले तीन वर्षों से यह लगातार घट रहा है। चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत कार्यों के लिए 24, वर्ष 2024-25 में 28 और 2023-24 में 29 फीसदी बजट रखा गया था। चालू वित्त वर्ष में विकासात्मक कार्यों के लिए 7634.88 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए महज 4446 करोड़ रुपये ही मिलेंगे। हालांकि, आर्थिक तंगहाली के बावजूद सरकार ने गांवों का खास ख्याल रखा है। बजट में घोषित ग्यारह नई योजनाओं में से छह सीधे गांव से जुड़ी हैं। प्राकृतिक खेती से उगी गेहूं, मक्की, अदरक, हल्दी और दूध के खरीद व समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के साथ किसान आयोग के गठन का एलान किया गया है। 

किसानों-बागवानों, पशुपालकों और मछ़ुआरों का भी ध्यान रखा है। देहात पर सरकार के इस फोकस को पंचायत चुनाव से भी जोड़कर देखा जा सकता है। गांव से जुड़े अस्थायी कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है।
 

उधर, मुख्यमंत्री ने खुद के साथ मंत्रियों-विधायकों, सियासी ओहदेदारों और अधिकारियों के वेतन में छह माह के लिए अस्थायी कटौती कर वित्तीय सुधार के लिए साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया है। हालांकि, यह बजट भाषण में भी स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति ठीक होते ही वेतन का स्थगित हिस्सा मिल जाएगा। बेशक, इसे वित्तीय अनुशासन की राह पर कदम बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन वास्तविक वित्तीय सुधारों के लिए इससे कहीं अधिक ठोस फैसले लेने की जरूरत होगी।

प्रदेश की आर्थिक सेहत की स्थिति यह है कि इस बार के बजट में भारी कटौती के बाद भी 6577 करोड़ का राजस्व घाटा अनुमानित है। हिमाचल पर लगभग एक लाख करोड़ के कर्ज के बोझ बीच आगामी वित्त वर्ष के बजट में राजकोषीय घाटा 9698 करोड़ रुपये हो जाएगा। खैर, हर साल प्राकृतिक आपदाओं से जूझते प्रदेश में पर्यावरण और जलवायु संरक्षण के साथ आपदा प्रबंधन की चिंता के साथ शुद्ध पानी के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।

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