Himachal: शिमला शहर की गंदगी से गांव बेहाल; जलस्रोत सूखे और खेती चौपट, लोग पलायन को मजबूर
छह-सात पंचायतों को शहर से हर दिन निकलने वाले टनों के हिसाब से जिस कूड़े-कचरे से कोई वास्ता नहीं, वही कूड़ा इन पंचायतों के 20 से ज्यादा गांवों के लिए मुसीबत बन गया है।
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नगर निगम शिमला से दूर स्वच्छ और पर्यावरण के लिहाज से समृद्ध पंचायतों को शिमला शहर की ही नजर लग गई। छह-सात पंचायतों को शहर से हर दिन निकलने वाले टनों के हिसाब से जिस कूड़े-कचरे से कोई वास्ता नहीं, वही कूड़ा इन पंचायतों के 20 से ज्यादा गांवों के लिए मुसीबत बन गया है। शहर से निकलने वाली यह गंदगी इन गांवों में बीमारियां परोस रही है। अभी इस समस्या से निजात मिली नहीं थी कि अब भरयाल, टुटू मजठाई, रामपुरी और बागी पंचायतों के इन्हीं गांवों के आसपास बन रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मुसीबत बनने वाला है। ब्यूंस नाले के बीचोबीच स्थापित कूड़ा संयंत्र के साथ एसटीपी का निर्माण कार्य चल रहा है। टुटू मजठाई पंचायत के भरयाल में करीब 18 करोड़ से 0.25 हेक्टेयर में 6.50 मीटर गहरा बन रहा यह प्लांट लोगों के विरोध के बावजूद एक साल में तैयार हो जाएगा। अमर उजाला ने माैके का जायजा लिया तो आसपास की पंचायतों के लोग भी वहां पहुंच गए। स्थानीय गांवों की महिलाओं सीमा कुमारी, मीना देवी, सविता देवी, डिंपल, अहिल्या, शीला, निधि, नारायणी ने एसटीपी निर्माण का विरोध किया।
संयंत्र के कारण पहले से कई गांवों के जलस्रोत बंद हो गए
महिलाओं का कहना था कि जब इसका प्रस्ताव आया था, तबसे इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन न तो सरकार और न प्रशासन ने उनकी कोई बात सुनी। कूड़ा संयंत्र के कारण पहले से कई गांवों के जलस्रोत बंद हो गए हैं। आसपास के गांवों में कूड़ा संयंत्र की बदबू 24 घंटे रहती है। मक्खी-मच्छरों से परेशान हो चुके हैं। लोग यहां से पलायन करने को मजबूर हैं। बच्चों को पीलिया और अन्य बीमारियां घेर रही हैं। बुजुर्गों को सांस की बीमारियां हो रही हैं। पशु बीमारियों से मर गए। कूड़ा संयंत्र और एसटीपी निर्माण के कारण गांव वालों के पेयजल स्रोत तो सूख ही गए, खेतों की सिंचाई व्यवस्था भी ठप हो गई। घासनियों को जाने वाले रास्ते बंद कर दिए गए हैं। खेतों में जो सब्जियां उगाई जा रही हैं, वे प्रदूषित पानी की वजह से खाने लायक नहीं होती हैं। इसलिए लोगों को मजबूरन खेतीबाड़ी छोड़नी पड़ रही है।
एसटीपी के लिए जंगल के कई पेड़ काट दिए: लोग
स्थानीय निवासी शिक्षा बोर्ड से बताैर सेक्शन अफसर सेवानिवृत्त किशन चंद, एजी कार्यालय शिमला से बताैर सीनियर अकाउंट अफसर सेवानिवृत्त चेत राम शांडिल, ईश्वर चंद, अनिल, हिमांशु, ओम प्रकाश ने कहा कि 22-23 साल पहले जब कूड़ा संयंत्र स्थापित हो रहा था तब भी विरोध किया था। उस समय लोगों को आश्वासन दिया गया था कि संयंत्र से जो खाद और बिजली तैयार होगी, वह इन पंचायतों को मुफ्त मिलेगी। आज तक यहां न खाद बनी और ही बिजली तैयार हुई। महिलाओं का कहना था कि एसटीपी निर्माण कार्य के लिए जंगल के कई पेड़ काट दिए गए हैं। गांव वालों ने जिस सड़क को खुद तैयार किया था, उसे भी कई बार निर्माण कार्य में लगे लोग बंद कर देते हैं, जबकि यह सड़क गांव वालों की है।
ये गांव हो रहे प्रभावित
कूड़ा संयंत्र और एसटीपी से टुटू मजठाई, भरयाल, गुरशाली, मंगलूज, टिक्कर, दवाठ, जमलोग, रामपुरी पंचायत के क्योंथल, शिलीबागी, जाठिया, क्यारगी, पंटी, आंजी, धूमन, सायरी, काला पंचायत, ममलीग समेत कई गांव प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम करेगी जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ज्वाइंट मेंबर सेक्रेट्री गोपाल गौतम से जब संबंधित पंचायतों में फैल रही बीमारियों और प्रदूषण को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि विभाग की टीम को भेज कर जांच की जाएगी। लोगों की दिक्कतों को जानेंगे और उनका हल किया जाएगा।
पौधरोपण करेंगे, मुफ्त बिजली देंगे
नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि लोगों की समस्याओं की जानकारी है। इन पंचायतों में इसी मानसून में पौधरोपण अभियान शुरू कर देंगे। इसके अलावा दो मेगावाट का सोलर प्लांट लगा रहे हैं, जिससे इन पंचायतों को मुफ्त बिजली देंगे।