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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Even two years after the disaster, elderly couple are forced to live along the banks of the Samej Khad

ग्राउंड रिपोर्ट: आपदा के दो साल बाद भी समेज खड्ड किनारे रहने को मजबूर बुजुर्ग राम लाल और बिमला

Tue, 30 Jun 2026 05:50 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, रामपुर बुशहर/समेज (शिमला-कुल्लू सीमा)।
विश्वास भारद्वाज, रामपुर बुशहर/समेज (शिमला-कुल्लू सीमा)। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Jun 2026 05:50 AM IST
सार

अमर उजाला ने ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर समेज गांव का जायजा लिया। यहां ऐसे ही एक बुजुर्ग दंपत्ति राम लाल और उनकी पत्नी बिमला देवी की कहानी सामने आई। 

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Even two years after the disaster, elderly couple are forced to live along the banks of the Samej Khad
2024 की आपदा के बाद समेज की वर्तमान तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

1 अगस्त 2024 की वह भयावह रात समेज के लोगों की स्मृतियों में आज भी जिंदा है। समेज खड्ड में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने कई परिवारों की दुनिया बदल दी। दो साल बीत जाने के बाद भी कुछ परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए आपदा केवल बीता हुआ हादसा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी हुई है। अमर उजाला ने ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर समेज गांव का जायजा लिया। यहां ऐसे ही एक बुजुर्ग दंपत्ति राम लाल और उनकी पत्नी बिमला देवी की कहानी सामने आई। उनकी आंखों में आज भी उस रात का डर साफ दिखाई देता है और उनकी सबसे बड़ी चिंता है कि सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास का इंतजार आखिर कब खत्म होगा।

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स्थायी पुनर्वास को लेकर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं: राम लाल

राम लाल बताते हैं कि आपदा के बाद उन्हें तत्काल राहत के रूप में 50 हजार की सहायता मिली, लेकिन इसके बाद स्थायी पुनर्वास को लेकर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। आज भी भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस उम्र में सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित ठिकाने की है। राम लाल का कहना है कि आपदा से प्रभावित सभी परिवारों को एक जैसी सहायता नहीं मिल सकी। उनके अनुसार कुछ परिवारों को अधिक राहत और पुनर्वास का लाभ मिला, जबकि कई लोग अब भी इंतजार कर रहे हैं।

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क्यों नहीं मिली राहत, जांच कर सरकार को भेजेंगे प्रस्ताव: उपमंडलाधिकारी

उपमंडलाधिकारी रामपुर हर्ष अमरेंद्र नेगी ने बताया की प्रभावितों को दो साल बाद भी मदद क्यों नहीं मिली यह गंभीर मामला है। पटवारी को मौके पर भेज कर इसकी जांच करवाई जाएगी। समेज में कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके अन्य स्थानों पर भी अपने घर हैं, बावजूद इसके यदि दावा सही पाया गया तो सरकार को प्रस्ताव भेज कर हर संभव मदद उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।

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आज भी बारिश की आवाज सुनकर नींद उड़ जाती है : बिमला

बिमला देवी उस रात को याद करते हुए भावुक हो जाती हैं। उन्होंने बताया रात को अचानक तेज गड़गड़ाहट सुनाई दी। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए जैसे-तैसे बाहर निकलना पड़ा। पूरी रात डर के साये में गुजरी। वह कहती हैं कि दो साल बाद भी मानसून उनके लिए सामान्य मौसम नहीं बन पाया है। आज भी जब तेज बारिश होती है या बादल गरजते हैं तो वही रात आंखों के सामने आ जाती है। मन घबरा जाता है। उनकी यह पीड़ा केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि समेज के अनेक प्रभावित लोगों के मन में आज भी बसे डर को सामने लाती है।

पंचायत ने भी माना, पुनर्वास अभी अधूरा

स्थानीय पंचायत के प्रधान इंद्र खुराना और उपप्रधान अर्जुन केदारटा ने स्वीकार किया कि आपदा के बाद राहत और पुनर्वास के प्रयास हुए हैं, लेकिन सभी प्रभावित परिवारों तक समान रूप से स्थायी समाधान अभी नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि कुछ परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं और इस दिशा में प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। कहा कि वह अपने स्तर पर भी प्रदेश सरकार के समक्ष तय नियमों के तहत तुरंत मदद उपलब्ध करवाने की मांग उठाएंगे।

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