Himachal News: गैस सिलिंडर हादसे में बच्चे की मौत, उपभोक्ता आयोग ने 10 लाख रुपये बीमा क्लेम का दिया आदेश
शिमला जिला उपभोक्ता आयोग ने गैस सिलिंडर हादसे में छह वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। आयोग ने इंडियन ऑयल, गैस एजेंसी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से 10 लाख रुपये बीमा राशि और 70 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही गैस उपभोक्ताओं को बीमा कवर की जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी बताया। पढ़ें पूरी खबर...
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने 10 साल पुराने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए गैस सिलिंडर हादसे के पीड़ित परिवार को राहत प्रदान की है। आयोग ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, गैस एजेंसी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से पीड़ित को 10,00,000 रुपये बीमा राशि और 70,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद इंडियन ऑयल कंपनी ने उन्हें गुमराह किया और कई वर्षों तक जांच के नाम पर झूठे आश्वासन दिए जिसके कारण उन्हें अंत में आयोग में शिकायत दर्ज करनी पड़ी। इंडियन ऑयल कंपनी ने कहा कि सिलिंडर में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था, हादसा उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल की गई नॉन-स्टैंडर्ड रबर पाइप और रेगुलेटर के गलत इस्तेमाल के कारण हुआ था। साथ ही उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मामला वितरक और बीमा कंपनी का है। वहीं लोगों ने अदालत के इस फैसले की सराहना की है। लोगों का कहना है कि इससे अधिकारियों की सुरक्षा होगी।
गैस कनेक्शन के साथ फ्री मिलता है 50 लाख तक का बीमा: घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन लेने पर बीमा कवर उपलब्ध होता है, लेकिन यह अलग से खरीदी जाने वाली पॉलिसी नहीं होती। यह आम तौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपने अधिकृत वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए समूह बीमा व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जाता है। यदि दुर्घटना अधिकृत एलपीजी सिलिंडर, रेगुलेटर या संबंधित उपकरणों से जुड़ी हो और बीमा की शर्तें पूरी होती हों, तो इसमें आम तौर पर निम्न प्रकार के दावे शामिल हो सकते हैं:
- दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवजा
- स्थायी या आंशिक विकलांगता पर मुआवजा
- चिकित्सा खर्च
- संपत्ति को हुए नुकसान का मुआवजा (पॉलिसी की शर्तों के अनुसार)
बीमा का लाभ अधिकृत गैस एजेंसी से लिए गए वैध घरेलू कनेक्शन पर ही लागू होता है।
दावा करने के लिए दुर्घटना की सूचना समय पर गैस एजेंसी और संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक हो सकता है।
मुआवजे की राशि और शर्तें समय-समय पर बीमा पॉलिसी के अनुसार बदल सकती हैं।
यही कारण है कि शिमला के उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि गैस एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे उपभोक्ताओं को इस बीमा कवर की जानकारी दें।
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग हमीरपुर की ओर से पारित एकतरफा आदेश को रद्द कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और अध्यक्ष योगिता दत्ता की खंड पीठ ने कंपनी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) पर सुनवाई करते हुए कहा कि कंपनी ने जानबूझकर गैर हाजिरी नहीं की थी बल्कि नोटिस में त्रुटि के कारण कंपनी दी तारीख पर पेश नहीं हो सकी थी। मामला नीलम पटयाल द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। हुंडई कंपनी इस मामले में विपक्षी पार्टी के रूप में शामिल थी। कंपनी का तर्क था कि उन्हें जो नोटिस मिला उसमें सुनवाई की अगली तारीख 13 नवंबर 2025 दर्ज थी लेकिन जिला आयोग का नाम कांगड़ा स्थित धर्मशाला लिखा था। इस तकनीकी त्रुटि के कारण कंपनी ने अपने वकील को धर्मशाला में पेश होने के निर्देश दिए जबकि मामला हमीरपुर जिला आयोग में लंबित था। परिणामस्वरूप इस दिन कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हो सका और हमीरपुर आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर दी थी।
विशेष न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त की गई गाड़ी को रिलीज कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कांगड़ा निवासी प्रार्थी राकेश शर्मा जो गाड़ी मालिक हमीरपुर निवासी प्रदीप कुमार शर्मा के एसपीए हैं, उनकी अर्जी को स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने 27 दिसंबर 2025 को नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल करने के आरोप में गाड़ी को कब्जे में लिया था। अदालत ने राकेश शर्मा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन में लंबी अवधि तक खड़ा रखने का कोई औचित्य नहीं है।