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Himachal: सीएम सुक्खू बोले- किशाऊ बांध से हिमाचल को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली, 600 करोड़ होगी आय

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Jun 2026 06:02 PM IST
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सार

सीएम ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। 

CM sukhvinder Sukhu says Himachal to get 211 MW of free electricity and earn ₹600 crore from the Kishau Dam.
सीएम सुक्खू ने एचपीयू में शैक्षणिक खंड और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। - फोटो : संवाद
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विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को हिमाचल पदेश विश्वविद्यालय में शैक्षणिक खंड और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। इसके साथ ही पांच साल बाद प्रति वर्ष 600 करोड़ रुपये की आय भी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना पर अपनी सहमति देने से इन्कार कर दिया था। यह बांध यमुना और टोंस नदी पर बन रहा है। इससे उत्तरी भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा को पानी मिलेगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि यदि हिमाचल को मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी तो राज्य सहमति नहीं देगा। अब हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यदि यह परियोजना किसी निजी कंपनी को दी जाती तो केवल 12 फीसदी मुफ्त रॉयल्टी और एक फीसदी लाडा मिलता।


बीबीएमबी बकाया और रॉयल्टी की मांग

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के बकाया को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 2011 में हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला दिया था। इसके तहत हरियाणा को 7.19 फीसदी के हिसाब से बकाया देना था। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान इसमें लगातार अड़चन डाल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने देश के नामी वकील कपिल सिब्बल को इस लड़ाई के लिए खड़ा किया है। उन्होंने यह शर्त भी रखी कि हरियाणा उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दे कि वह बीबीएमबी का बकाया हिस्सा देगा। इससे हिमाचल की जनता को लाभ मिलेगा।

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मुख्यमंत्री ने एचपीयू से ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में शोध करने का किया आह्वान

इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए। उन्होंने 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन का उद्घाटन किया। इस भवन में तीन शैक्षणिक मंजिलें, कंप्यूटर कम सीबीटी लैब तथा पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित सीबीटी लैब का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा शिक्षण क्षमता बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास भी किया। यह पांच मंजिला भवन होगा, जिसमें पार्किंग, नई कक्षाएं और बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को सशक्त बनाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है तथा इसके विकास के लिए प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, डिजिटल बदलाव और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूती मिलेगी। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इसी दिशा में सोलन जिले के नालागढ़ में प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय से ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध करने का आग्रह करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में राज्य के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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आरडीजी बंद होने से 10,000 करोड़ का नुकसान: सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश देश को लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से हिमाचल इस चुनौती का दृढ़ता से सामना करेगा और अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यहित में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार, हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब के माध्यम से शिमला जिले के युवाओं को विभिन्न परीक्षाओं के कंप्यूटर आधारित टेस्ट हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ही देने की सुविधा मिलेगी। इससे पहले उन्हें ऐसी परीक्षाओं के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इस सीबीटी लैब में लगभग 250 युवा एक साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। विधायक हरिश जनारथा, सुरेश कुमार, संजय अवस्थी, विवेक शर्मा, महापौर नगर निगम शिमला सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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