{"_id":"69761df9f81652fb7c0131b1","slug":"company-to-be-pay-fine-shimla-news-c-19-sml1008-668701-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: सिम्बायोसिस फार्मा को देना होगा 43.68 लाख पर्यावरण जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: सिम्बायोसिस फार्मा को देना होगा 43.68 लाख पर्यावरण जुर्माना
विज्ञापन
विज्ञापन
लगातार प्रदूषण नियमों की उल्लंघन पर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण ने लगाया है जुर्माना
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव और जल अधिनियम के तहत आईएफएस सुशील कुमार सिंगला की अध्यक्षता में गठित अपीलीय प्राधिकरण ने मैसर्स सिम्बायोसिस फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील खारिज कर दी है। कंपनी पर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगाया गया 43 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लागू रहेगा जो उसे देना होगा।
मामला हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से जुड़ा है। बोर्ड ने कंपनी की औद्योगिक इकाई के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की जांच के दौरान आउटलेट से लिए गए छह लगातार नमूनों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से अधिक पाया था। बोर्ड के अनुसार यह जल प्रदूषण नियमों का लगातार और पुष्टि के साथ उल्लंघन था। इस आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 16 जुलाई 2024 को कंपनी पर पर्यावरण जुर्माना लगाया। यह जुर्माना राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत लागू प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के अनुसार तय किया गया। जुर्माने की गणना में उद्योग का प्रदूषण सूचकांक, उल्लंघन की अवधि, संचालन का पैमाना और इकाई का स्थान शामिल किया गया।
कंपनी ने बोर्ड के आदेश को चुनौती देते हुए जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 की धारा 28 के तहत राज्य सरकार के अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की और जुर्माना रद्द करने की मांग की। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि यह जुर्माना धारा 33 ए के तहत जारी निर्देशों के अंतर्गत लगाया गया है। बोर्ड का तर्क था कि ऐसे निर्देशों के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राष्ट्रीय हरित अधिकरण को है न कि राज्य स्तर के अपीलीय प्राधिकरण को।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपीलीय प्राधिकरण ने कहा कि पहले अधिकार क्षेत्र का प्रश्न तय करना जरूरी है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि धारा 28 के तहत केवल सहमति से जुड़े मामलों जैसे सहमति देना, अस्वीकार करना या रद्द करने पर ही अपील सुनी जा सकती है। पर्यावरण से जुड़े मामलों पर इस प्राधिकरण को सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया। आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि सिम्बायोसिस फार्मास्यूटिकल्स को प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर लगाया गया 43.68 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना देना होगा। यदि कंपनी आगे राहत चाहती है तो उसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण में अपील करनी होगी।
Trending Videos
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव और जल अधिनियम के तहत आईएफएस सुशील कुमार सिंगला की अध्यक्षता में गठित अपीलीय प्राधिकरण ने मैसर्स सिम्बायोसिस फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील खारिज कर दी है। कंपनी पर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगाया गया 43 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लागू रहेगा जो उसे देना होगा।
मामला हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से जुड़ा है। बोर्ड ने कंपनी की औद्योगिक इकाई के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की जांच के दौरान आउटलेट से लिए गए छह लगातार नमूनों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से अधिक पाया था। बोर्ड के अनुसार यह जल प्रदूषण नियमों का लगातार और पुष्टि के साथ उल्लंघन था। इस आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 16 जुलाई 2024 को कंपनी पर पर्यावरण जुर्माना लगाया। यह जुर्माना राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत लागू प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के अनुसार तय किया गया। जुर्माने की गणना में उद्योग का प्रदूषण सूचकांक, उल्लंघन की अवधि, संचालन का पैमाना और इकाई का स्थान शामिल किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कंपनी ने बोर्ड के आदेश को चुनौती देते हुए जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 की धारा 28 के तहत राज्य सरकार के अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की और जुर्माना रद्द करने की मांग की। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि यह जुर्माना धारा 33 ए के तहत जारी निर्देशों के अंतर्गत लगाया गया है। बोर्ड का तर्क था कि ऐसे निर्देशों के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राष्ट्रीय हरित अधिकरण को है न कि राज्य स्तर के अपीलीय प्राधिकरण को।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपीलीय प्राधिकरण ने कहा कि पहले अधिकार क्षेत्र का प्रश्न तय करना जरूरी है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि धारा 28 के तहत केवल सहमति से जुड़े मामलों जैसे सहमति देना, अस्वीकार करना या रद्द करने पर ही अपील सुनी जा सकती है। पर्यावरण से जुड़े मामलों पर इस प्राधिकरण को सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया। आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि सिम्बायोसिस फार्मास्यूटिकल्स को प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर लगाया गया 43.68 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना देना होगा। यदि कंपनी आगे राहत चाहती है तो उसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण में अपील करनी होगी।