{"_id":"6a7f00a0982e100b540c74ff","slug":"contract-workers-protest-at-igmc-gate-raise-slogans-against-the-management-shimla-news-c-19-sml1002-769989-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: आईजीएमसी गेट पर कांट्रैक्ट वर्करों \nप्रदर्शन, प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: आईजीएमसी गेट पर कांट्रैक्ट वर्करों प्रदर्शन, प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लंबित मांगें न मानने पर 24 तक हड़ताल पर जाने का किया एलान, ईपीएप जमा न करने का लगाया आरोप
बोले, ईएसआई, बोनस और ओवरटाइम नहीं मिल रहा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने शुक्रवार को आईजीएमसी अस्पताल के गेट पर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्त मांगें पूरी नहीं की गईं तो 24 अगस्त को आईजीएमसी के मजदूर एक दिन की हड़ताल पर चले जाएंगे।
सीटू के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला महासचिव अमित कुमार, कोषाध्यक्ष बालक राम, आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के महासचिव दलीप सिंह, आईजीएमसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र लाल पामटा, उपाध्यक्ष नोख राम, निशा देवी, उमा देवी, विद्या देवी, वंदना, प्रवीण शर्मा, सचिन खिंटा, सरीना और रंजीव कुठियाला सहित सैकड़ों आउटसोर्स और कांट्रैक्ट वर्करों ने भाग लिया। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आईजीएमसी जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान को चलाने में ठेका और आउटसोर्स मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं, वैधानिक अधिकारों और काम करने के लिए उपयुक्त माहौल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन दिया जा रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा मिल रही है। ठेकेदार और प्रशासन की मिलीभगत से उन्हें ईपीएफ, ईएसआई, बोनस और ओवरटाइम तक नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वर्दी भी समय पर नहीं मिलती और कर्मचारियों को पहचान पत्र तक नहीं दिए हैं। वेतन दिया जाता है, लेकिन उसकी रसीद नहीं दी जाती। वार्ड या अस्पताल के अलग-अलग ब्लॉकों में सेवाएं देने वाले पुरुष और महिला कर्मियों के लिए न तो बैठने की जगह है और न ही कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम की व्यवस्था है। कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मचारियों का ईपीएफ जनवरी 2026 के बाद जमा नहीं हुआ है। वेतन से काटी गई ईपीएफ की राशि सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है और इसे जमा न करना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तीन साल से वर्दी नहीं दी गई है।
वर्करों ने कहा कि काम का बोझ बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों और वर्करों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है, जिससे मजदूरों पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ रहा है। सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पूरे प्रदेश में स्थायी काम को अस्थायी रोजगार में बदल रही है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी के डेंटल अस्पताल में कांट्रैक्ट वर्करों से कई तरह के काम लिए जा रहे हैं। उनसे रोगी मित्र यानी मल्टी टास्क वर्कर के रूप में भी काम लिया जा रहा है। कांट्रैक्ट वर्करों और आउटसोर्स कर्मियों ने सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सभी वैधानिक अधिकार, श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करने और उनके लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की।
विज्ञापन
बोले, ईएसआई, बोनस और ओवरटाइम नहीं मिल रहा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने शुक्रवार को आईजीएमसी अस्पताल के गेट पर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्त मांगें पूरी नहीं की गईं तो 24 अगस्त को आईजीएमसी के मजदूर एक दिन की हड़ताल पर चले जाएंगे।
सीटू के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला महासचिव अमित कुमार, कोषाध्यक्ष बालक राम, आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के महासचिव दलीप सिंह, आईजीएमसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र लाल पामटा, उपाध्यक्ष नोख राम, निशा देवी, उमा देवी, विद्या देवी, वंदना, प्रवीण शर्मा, सचिन खिंटा, सरीना और रंजीव कुठियाला सहित सैकड़ों आउटसोर्स और कांट्रैक्ट वर्करों ने भाग लिया। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
विज्ञापन
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आईजीएमसी जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान को चलाने में ठेका और आउटसोर्स मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं, वैधानिक अधिकारों और काम करने के लिए उपयुक्त माहौल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन दिया जा रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा मिल रही है। ठेकेदार और प्रशासन की मिलीभगत से उन्हें ईपीएफ, ईएसआई, बोनस और ओवरटाइम तक नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वर्दी भी समय पर नहीं मिलती और कर्मचारियों को पहचान पत्र तक नहीं दिए हैं। वेतन दिया जाता है, लेकिन उसकी रसीद नहीं दी जाती। वार्ड या अस्पताल के अलग-अलग ब्लॉकों में सेवाएं देने वाले पुरुष और महिला कर्मियों के लिए न तो बैठने की जगह है और न ही कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम की व्यवस्था है। कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मचारियों का ईपीएफ जनवरी 2026 के बाद जमा नहीं हुआ है। वेतन से काटी गई ईपीएफ की राशि सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है और इसे जमा न करना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तीन साल से वर्दी नहीं दी गई है।
वर्करों ने कहा कि काम का बोझ बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों और वर्करों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है, जिससे मजदूरों पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ रहा है। सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पूरे प्रदेश में स्थायी काम को अस्थायी रोजगार में बदल रही है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी के डेंटल अस्पताल में कांट्रैक्ट वर्करों से कई तरह के काम लिए जा रहे हैं। उनसे रोगी मित्र यानी मल्टी टास्क वर्कर के रूप में भी काम लिया जा रहा है। कांट्रैक्ट वर्करों और आउटसोर्स कर्मियों ने सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सभी वैधानिक अधिकार, श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करने और उनके लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की।