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Shimla News: शहर में दालों का संकट बरकरार सप्लाई पहुंचने में लगेंगे दस दिन
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राशन कार्ड धारकों को करना होगा इंतजार
उड़द, मलका और दाल चना की चल रही है किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के राशन डिपुओं में दालों की किल्लत का संकट अभी बरकरार रहेगा। ऑर्डर जारी होने के बाद भी सप्लाई आने में करीब दस दिन का समय लगेगा। इस वजह से शहर के हजारों राशन कार्डधारक उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर मिलने वाली दालों के लिए अभी इंतजार करना होगा।
राजधानी के राशन डिपुओं में इस महीने लोगों को मलका, दाल चना और उड़द की दाल नहीं मिल पा रही है। इस वजह से शहर के सैकड़ों लोग परेशान हैं। हालांकि, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन की ओर से दालों को लेकर ऑर्डर जारी कर दिया है, लेकिन बताया जा रहा है कि ऑर्डर जारी होने के बाद अब दालों की पैकिंग और अन्य प्रक्रिया में समय लगेगा। ऐसे में इन दालों की खेप को शहर तक पहुंचने में भी काफी समय लगने वाला है। यही वजह है कि आधा महीना बीतने के बाद भी लोगों को बाजार से महंगी दरों पर करीब 100 रुपये प्रति किलो की दर से दाल खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा। शहर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 25 हजार से अधिक है। इन उपभोक्ताओं को शहर के करीब 50 राशन डिपुओं के माध्यम से सरकारी राशन उपलब्ध करवाया जाता है। बड़ी संख्या में परिवार इन डिपुओं पर मिलने वाली दालों पर निर्भर हैं, लेकिन इस महीने उड़द, मलका और दाल चना की उपलब्धता नहीं हो पाई है। ऐसे में डिपुओं में पहुंच रहे सैकड़ों लोगों को अधूरा राशन लेकर लौटना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि घर के मासिक राशन में दालें जरूरी खाद्य सामग्री हैं, लेकिन सरकारी डिपुओं में नियमित आपूर्ति नहीं होने से उन्हें बाजार से महंगे दामों पर दाल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे परिवारों के घरेलू बजट पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ऐसे में अब उपभोक्ता राशन डिपुओं में सरकार और विभाग को खरी-खोटी सुना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग दालों की आपूर्ति प्रक्रिया में तेजी लाए, जिससे लोगों को बार-बार डिपुओं के चक्कर न काटने पड़ें। जिला नियंत्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने बताया कि दालों की सप्लाई का ऑर्डर सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन जारी करता है। ऐसे में जब सप्लाई आएगी उसके बाद ही नियमित वितरण शुरू हो पाएगा। हालांकि, बाकी का राशन पर्याप्त मात्रा में डिपुओं में उपलब्ध है और लोगों को मांग के अनुसार उसे बांटा जा रहा है।
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उड़द, मलका और दाल चना की चल रही है किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के राशन डिपुओं में दालों की किल्लत का संकट अभी बरकरार रहेगा। ऑर्डर जारी होने के बाद भी सप्लाई आने में करीब दस दिन का समय लगेगा। इस वजह से शहर के हजारों राशन कार्डधारक उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर मिलने वाली दालों के लिए अभी इंतजार करना होगा।
राजधानी के राशन डिपुओं में इस महीने लोगों को मलका, दाल चना और उड़द की दाल नहीं मिल पा रही है। इस वजह से शहर के सैकड़ों लोग परेशान हैं। हालांकि, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन की ओर से दालों को लेकर ऑर्डर जारी कर दिया है, लेकिन बताया जा रहा है कि ऑर्डर जारी होने के बाद अब दालों की पैकिंग और अन्य प्रक्रिया में समय लगेगा। ऐसे में इन दालों की खेप को शहर तक पहुंचने में भी काफी समय लगने वाला है। यही वजह है कि आधा महीना बीतने के बाद भी लोगों को बाजार से महंगी दरों पर करीब 100 रुपये प्रति किलो की दर से दाल खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा। शहर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 25 हजार से अधिक है। इन उपभोक्ताओं को शहर के करीब 50 राशन डिपुओं के माध्यम से सरकारी राशन उपलब्ध करवाया जाता है। बड़ी संख्या में परिवार इन डिपुओं पर मिलने वाली दालों पर निर्भर हैं, लेकिन इस महीने उड़द, मलका और दाल चना की उपलब्धता नहीं हो पाई है। ऐसे में डिपुओं में पहुंच रहे सैकड़ों लोगों को अधूरा राशन लेकर लौटना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि घर के मासिक राशन में दालें जरूरी खाद्य सामग्री हैं, लेकिन सरकारी डिपुओं में नियमित आपूर्ति नहीं होने से उन्हें बाजार से महंगे दामों पर दाल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे परिवारों के घरेलू बजट पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ऐसे में अब उपभोक्ता राशन डिपुओं में सरकार और विभाग को खरी-खोटी सुना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग दालों की आपूर्ति प्रक्रिया में तेजी लाए, जिससे लोगों को बार-बार डिपुओं के चक्कर न काटने पड़ें। जिला नियंत्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने बताया कि दालों की सप्लाई का ऑर्डर सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन जारी करता है। ऐसे में जब सप्लाई आएगी उसके बाद ही नियमित वितरण शुरू हो पाएगा। हालांकि, बाकी का राशन पर्याप्त मात्रा में डिपुओं में उपलब्ध है और लोगों को मांग के अनुसार उसे बांटा जा रहा है।
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