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Shimla News: शहर में बढ़ने लगा ऑनलाइन एप से सामान मंगवाने का ट्रेंड
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घर तक किराना और दूध-ब्रेड पहुंचा रही हैं कंपनियां
लोगों को थैला लेकर बाजार जाने की नहीं जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के युवाओं सहित हर आयु वर्ग के लोगों में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। दूध, ब्रेड, सब्जी, दालें, मसाले, किराना और अन्य जरूरत का सामान लोग ऑनलाइन एप के माध्यम से मंगवा रहे हैं।
क्विक-कॉमर्स डिलीवरी सेवा कंपनियों ने भी शिमला में एंट्री कर ली है। महानगरों की तर्ज पर शहर के कुछ हिस्सों में ऐसी सेवाएं देने वाली कंपनियों ने ट्रायल के तौर पर अपना कारोबार शुरू भी कर दिया है। एक निजी कंपनी ने छोटा शिमला, बीसीएस, न्यू शिमला सहित भराड़ी क्षेत्र और संजौली के कुछ क्षेत्रों में सेवाएं देना शुरू कर दी हैं। नौकरीपेशा और कारोबार में व्यस्त शहर के लोग अब दुकानों में थैला लेकर जाने के बजाय ऑनलाइन एप्लीकेशन के माध्यम से जरूरत का सामान मंगवाने लगे हैं। हालांकि यह कंपनी क्षेत्र के दुकानदारों से सामान खरीदकर ही फिलहाल सप्लाई कर रही है। यह भले ही शहर के पारंपरिक कारोबारियों के लिए एक नई चुनौती है, लेकिन आम शहरी के लिए यह एक नया अनुभव है, जिसे हर कोई आजमाना चाहता है।
ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स डिलीवरी कंपनियों को राजधानी होने के कारण शिमला में अच्छा भविष्य नजर आ रहा है। इसलिए कंपनियां आने वाले समय में अपने कारोबार का विस्तार भी कर सकती हैं। शिमला के 200 लोगों पर किए सर्वे में करीब 136 (68 फीसदी) लोग ऑनलाइन शॉपर पाए गए हैं। 97 फीसदी युवा ऑनलाइन शॉपिंग से परिचित हैं, जिनमें से 39 फीसदी ऐसे हैं, जो हर माह ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। प्रदेश स्तर पर किए अध्ययन के अनुसार 78 फीसदी शहरी इंटरनेट यूजर हैं। राजधानी शिमला की करीब दो लाख की आबादी वाले इस शहर में डेढ़ लाख लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इनमें से 50 से 60 हजार लोग ऑनलाइन शॉपिंग भी कर रहे हैं।
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कारोबार की शिमला में कम हैं संभावनाएं
राजधानी शिमला की आबादी ही दो लाख के आसपास है। इस छोटे शहर में यदि इस तरह की घर-द्वार घरेलू सामान उपलब्ध करवाने वाली ऑनलाइन कंपनियां काम करेंगी तो इससे पहले से कारोबार कर रहे स्थानीय दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होने की संभावना जरूर है। शहर की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए महानगरों का ट्रेंड शायद ही यहां पूरी तरह चल पाए। प्रदेश सरकार को भी क्विक-कॉमर्स डिलीवरी सेवा कंपनियों के कारोबार पर नजर रखनी चाहिए कि वह क्या बेच रही हैं और लोगों को उपलब्ध करवाए जा रहे सामान की गुणवत्ता कैसी है।
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लोगों को थैला लेकर बाजार जाने की नहीं जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के युवाओं सहित हर आयु वर्ग के लोगों में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। दूध, ब्रेड, सब्जी, दालें, मसाले, किराना और अन्य जरूरत का सामान लोग ऑनलाइन एप के माध्यम से मंगवा रहे हैं।
क्विक-कॉमर्स डिलीवरी सेवा कंपनियों ने भी शिमला में एंट्री कर ली है। महानगरों की तर्ज पर शहर के कुछ हिस्सों में ऐसी सेवाएं देने वाली कंपनियों ने ट्रायल के तौर पर अपना कारोबार शुरू भी कर दिया है। एक निजी कंपनी ने छोटा शिमला, बीसीएस, न्यू शिमला सहित भराड़ी क्षेत्र और संजौली के कुछ क्षेत्रों में सेवाएं देना शुरू कर दी हैं। नौकरीपेशा और कारोबार में व्यस्त शहर के लोग अब दुकानों में थैला लेकर जाने के बजाय ऑनलाइन एप्लीकेशन के माध्यम से जरूरत का सामान मंगवाने लगे हैं। हालांकि यह कंपनी क्षेत्र के दुकानदारों से सामान खरीदकर ही फिलहाल सप्लाई कर रही है। यह भले ही शहर के पारंपरिक कारोबारियों के लिए एक नई चुनौती है, लेकिन आम शहरी के लिए यह एक नया अनुभव है, जिसे हर कोई आजमाना चाहता है।
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ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स डिलीवरी कंपनियों को राजधानी होने के कारण शिमला में अच्छा भविष्य नजर आ रहा है। इसलिए कंपनियां आने वाले समय में अपने कारोबार का विस्तार भी कर सकती हैं। शिमला के 200 लोगों पर किए सर्वे में करीब 136 (68 फीसदी) लोग ऑनलाइन शॉपर पाए गए हैं। 97 फीसदी युवा ऑनलाइन शॉपिंग से परिचित हैं, जिनमें से 39 फीसदी ऐसे हैं, जो हर माह ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। प्रदेश स्तर पर किए अध्ययन के अनुसार 78 फीसदी शहरी इंटरनेट यूजर हैं। राजधानी शिमला की करीब दो लाख की आबादी वाले इस शहर में डेढ़ लाख लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इनमें से 50 से 60 हजार लोग ऑनलाइन शॉपिंग भी कर रहे हैं।
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कारोबार की शिमला में कम हैं संभावनाएं
राजधानी शिमला की आबादी ही दो लाख के आसपास है। इस छोटे शहर में यदि इस तरह की घर-द्वार घरेलू सामान उपलब्ध करवाने वाली ऑनलाइन कंपनियां काम करेंगी तो इससे पहले से कारोबार कर रहे स्थानीय दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होने की संभावना जरूर है। शहर की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए महानगरों का ट्रेंड शायद ही यहां पूरी तरह चल पाए। प्रदेश सरकार को भी क्विक-कॉमर्स डिलीवरी सेवा कंपनियों के कारोबार पर नजर रखनी चाहिए कि वह क्या बेच रही हैं और लोगों को उपलब्ध करवाए जा रहे सामान की गुणवत्ता कैसी है।