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Shimla News: मिड डे मील कर्मियों को तीन महीने से नहीं मिला मानदेय
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कर्मचारियों को घर चलाना हुआ मुश्किल
संघ ने जल्द बकाया राशि जारी करने की रखी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला (जुन्गा)। जिला शिमला के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत करीब 3,200 मिड डे मील कर्मचारी तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। मानदेय के भुगतान में हो रही देरी से कर्मचारियों में रोष है। ऐसे में अब मिड डे मील कर्मचारी संघ ने सरकार से जल्द बकाया राशि जारी करने की मांग की है।
मिड डे मील कर्मचारी संघ की अध्यक्ष प्रीति ठाकुर, राजलीला, अनिल वर्मा, जानकी देवी, सुलक्ष्णा और योजना ने बताया कि जिले के कर्मचारियों के परिवारों का भरण-पोषण इसी मानदेय पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने परिवार चलाने, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। प्रीति ठाकुर ने बताया कि मिड डे मील कर्मचारियों को मात्र 5500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो पहले से ही बेहद कम है। इसके बावजूद समय पर भुगतान न होना कर्मचारियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस माह भी मानदेय जारी नहीं किया गया तो कर्मचारियों को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। संघ की अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने हाल ही में स्कूलों की पानी की टंकियों की सफाई और किचन गार्डनिंग जैसे कार्य भी मिड डे मील कर्मचारियों को सौंप दिए हैं, जबकि इसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त मानदेय या सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस मामले में खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मशोबरा नीलम ने बताया कि मुख्यालय से बजट मांगा गया है। जैसे ही बजट आएगा, मानदेय जारी कर दिया जाएगा।
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संघ ने जल्द बकाया राशि जारी करने की रखी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला (जुन्गा)। जिला शिमला के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत करीब 3,200 मिड डे मील कर्मचारी तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। मानदेय के भुगतान में हो रही देरी से कर्मचारियों में रोष है। ऐसे में अब मिड डे मील कर्मचारी संघ ने सरकार से जल्द बकाया राशि जारी करने की मांग की है।
मिड डे मील कर्मचारी संघ की अध्यक्ष प्रीति ठाकुर, राजलीला, अनिल वर्मा, जानकी देवी, सुलक्ष्णा और योजना ने बताया कि जिले के कर्मचारियों के परिवारों का भरण-पोषण इसी मानदेय पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने परिवार चलाने, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। प्रीति ठाकुर ने बताया कि मिड डे मील कर्मचारियों को मात्र 5500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो पहले से ही बेहद कम है। इसके बावजूद समय पर भुगतान न होना कर्मचारियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस माह भी मानदेय जारी नहीं किया गया तो कर्मचारियों को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। संघ की अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने हाल ही में स्कूलों की पानी की टंकियों की सफाई और किचन गार्डनिंग जैसे कार्य भी मिड डे मील कर्मचारियों को सौंप दिए हैं, जबकि इसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त मानदेय या सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस मामले में खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मशोबरा नीलम ने बताया कि मुख्यालय से बजट मांगा गया है। जैसे ही बजट आएगा, मानदेय जारी कर दिया जाएगा।
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