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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल का कारावास
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सत्र न्यायाधीश भुवनेश की अदालत ने लोअर कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार, 4.10 लाख जुर्माना भी देना होगा
दोषी ने फाइनेंस कंपनी से लिया 2.60 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस के मामले में सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने दोषी की निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक साल की साधारण कैद और 4.10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने पाया कि ऋण की आखिरी किस्त नवंबर 2018 में देय थी जबकि चेक जुलाई 2019 में करीब आठ महीने बाद जारी किया था।
यह तीन साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर था। इसलिए कर्ज की वसूली की समय सीमा बाधित होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार कोटखाई के बांदली निवासी राजेंद्र सिंह ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से महिंद्रा बोलेरो मैक्स ट्रक खरीदने के लिए 2.60 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की देनदारी ब्याज सहित 3,98,632 रुपये तय हुई थी जिसे 47 किस्तों में चुकाया जाना था। दोषी ने कंपनी को देनदारी चुकाने के लिए 12 जुलाई 2019 को 2.60 लाख रुपये का एक चेक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कोटखाई) जारी किया था। कंपनी ने चेक बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण 18 जुलाई 2019 को वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने अदालत का रुख किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला ने 7 अक्तूबर 2025 को आरोपी राजेंद्र सिंह को दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और 4.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी। सत्र अदालत के समक्ष आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि चेक वर्ष 2014 में ऋण लेते समय एक खाली सुरक्षा चेक के रूप में लिया था जिसे वर्ष 2019 में गलत तरीके से भरा गया। इसके अलावा आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि फाइनेंस कंपनी ने गाड़ी को जबरन कब्जे में लेकर 2.85 लाख रुपये में बेच दिया था। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसे अपराधों से गंभीरता से निपटना आवश्यक है। शिकायतकर्ता कंपनी को कानूनी लड़ाई का खर्च और ब्याज मिलना न्यायसंगत है। अदालत ने 4,10,000 रुपये के मुआवजे को उचित माना। अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को यथावत रखने का आदेश दिया है।
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दोषी ने फाइनेंस कंपनी से लिया 2.60 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस के मामले में सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने दोषी की निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक साल की साधारण कैद और 4.10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने पाया कि ऋण की आखिरी किस्त नवंबर 2018 में देय थी जबकि चेक जुलाई 2019 में करीब आठ महीने बाद जारी किया था।
यह तीन साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर था। इसलिए कर्ज की वसूली की समय सीमा बाधित होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार कोटखाई के बांदली निवासी राजेंद्र सिंह ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से महिंद्रा बोलेरो मैक्स ट्रक खरीदने के लिए 2.60 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की देनदारी ब्याज सहित 3,98,632 रुपये तय हुई थी जिसे 47 किस्तों में चुकाया जाना था। दोषी ने कंपनी को देनदारी चुकाने के लिए 12 जुलाई 2019 को 2.60 लाख रुपये का एक चेक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कोटखाई) जारी किया था। कंपनी ने चेक बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण 18 जुलाई 2019 को वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने अदालत का रुख किया।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला ने 7 अक्तूबर 2025 को आरोपी राजेंद्र सिंह को दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और 4.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी। सत्र अदालत के समक्ष आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि चेक वर्ष 2014 में ऋण लेते समय एक खाली सुरक्षा चेक के रूप में लिया था जिसे वर्ष 2019 में गलत तरीके से भरा गया। इसके अलावा आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि फाइनेंस कंपनी ने गाड़ी को जबरन कब्जे में लेकर 2.85 लाख रुपये में बेच दिया था। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसे अपराधों से गंभीरता से निपटना आवश्यक है। शिकायतकर्ता कंपनी को कानूनी लड़ाई का खर्च और ब्याज मिलना न्यायसंगत है। अदालत ने 4,10,000 रुपये के मुआवजे को उचित माना। अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को यथावत रखने का आदेश दिया है।
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