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Himachal: गलत दिशा में वाहन को चलाना लापरवाही, चालक दोषी, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 29 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

 हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी चालक को दोषी करार दिया है।

Driving a vehicle in the wrong direction constitutes negligence; High Court overturns lower court's verdict
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी चालक को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सड़क पर गलत दिशा में वाहन चलाना स्पष्ट रूप से लापरवाही है। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने आदेश दिया है कि दोषी को सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए 12 मई को निचली अदालत में पेश किया जाए। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर दिया है। अदालत ने रिकाॅर्ड में पेश की गई तस्वीरों का अवलोकन करते हुए पाया कि बोलेरो सड़क की गलत दिशा पर चल रही थी।

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कोर्ट ने कहा, यदि बोलेरो अपनी बाईं ओर होती, तो दुर्घटना नहीं होती, भले ही मोटरसाइकिल चालक कहीं भी देख रहा हो। अदालत ने रोड रेगुलेशन रूल्स 1989 का हवाला देते हुए कहा कि वाहन को हमेशा बाईं ओर रखना चालक का कर्तव्य है। इसका उल्लंघन करना कानूनी तौर पर लापरवाही है। यह मामला 9 दिसंबर 2008 का है, जब शिकायतकर्ता अपने मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। शाम करीब 5:45 बजे सनी स्लीपर फैक्ट्री के पास सामने से आ रही एक महिंद्रा बोलेरो ने उन्हें टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में शिकायतकर्ता को गंभीर चोटें आईं। मार्च 2014 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी इंदोरा ने आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चालक (शिकायतकर्ता) फैक्ट्री की ओर देख रहा था, जिससे उसकी अपनी लापरवाही भी प्रतीत होती है।

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पॉक्सो मामले में बरी होने के बाद कर्मी की सेवा बहाली का आदेश
 प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में बरी होने के बाद कर्मचारी की सेवा बहाली का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति का आधार केवल एक एफआईआर है और बाद में वह अदालत से ससम्मान बरी हो जाता है, तो उसकी बर्खास्तगी को कानूनन बरकरार नहीं रखा जा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए बोर्ड की ओर से जारी 20 दिसंबर 2022 के सेवा समाप्ति आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है और याचिकाकर्ता को उसकी पिछली सेवा तिथि से बहाल करने का आदेश दिया गया। वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के लिए सांकेतिक रूप से गिना जाएगा।इस अवधि के लिए कोई पिछला वेतन नहीं देय होगा। हालांकि, ट्रायल कोर्ट से बरी होने की तिथि 30 दिसंबर 2023 के बाद से वह सभी वास्तविक लाभों के हकदार होंगे। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सेवा समाप्ति का एकमात्र आधार एफआईआर थी और अब वह आधार ही समाप्त हो चुका है।

याचिकाकर्ता राज्य विद्युत बोर्ड में अनुबंध के आधार पर जूनियर टी-मेट के रूप में कार्यरत थे। दिसंबर 2022 में, उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर के आधार पर और पुलिस हिरासत में 48 घंटे से अधिक समय बिताने के कारण बोर्ड ने 20 दिसंबर 2022 को उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थी। न्यायाधीश पॉक्सो मंडी ने 30 दिसंबर 2023 को अपने फैसले में याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि पीड़ित का बच्चा याचिकाकर्ता का है, लेकिन डीएनए परीक्षण में यह मेल नहीं खाता। इसी के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बरी कर दिया था।

दूसरे राज्य में हुए अपराध की सुनवाई हिमाचल में संभव
 प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपराध की कड़ियां अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हों और अपराध का एक हिस्सा हिमाचल में घटित हुआ हो, तो यहां की अदालतों को मामले की सुनवाई करने का पूरा अधिकार है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कुरुक्षेत्र की निवासी कुलजीत कौर की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 ऊना के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपियों के खिलाफ धारा 120-बी, 384 और 506 के तहत आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि भले ही दुष्कर्म की पहली घटना हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुई हो, लेकिन यदि उसके बाद पीड़िता को ब्लैकमेल करके पैसे की वसूली हिमाचल प्रदेश (जिला ऊना) के बैंक खातों के माध्यम से की गई है, तो यह एक निरंतर चलने वाला अपराध है।

याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी को अपने घर पर दुष्कर्म करने में सहायता प्रदान की और बाद में पीड़िता को डरा-धमकाकर 10 लाख रुपये नकद वसूले। कोर्ट ने माना कि चूंकि जबरन वसूली का प्रभाव और लेनदेन हिमाचल में हुआ, इसलिए ऊना की अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार है।याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उस पर लगे आरोप हरियाणा के क्षेत्राधिकार में आते हैं और हिमाचल में उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि बैंक लेनदेन और पीड़िता के बयानों से स्पष्ट है कि अपराध के कई हिस्से हिमाचल में हुए है। यह मामला वर्ष 2020 का है जब ऊना जिले के चिंतपूर्णी पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी पत्नी (जो मानसिक रूप से अस्वस्थ थी) को आरोपी ने कुरुक्षेत्र के एक जिम में ब्लैकमेल किया और याचिकाकर्ता की मिलीभगत से उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद अश्लील फोटो और वीडियो के दम पर पीड़िता से करीब 22 लाख रुपये बैंक के माध्यम से और 10 लाख रुपये नकद वसूले गए।

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