सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal High Court Directs Verify Pending Bills of Private Hospitals Under Himcare Scheme Within Two Weeks

अदालत: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- हिमकेयर योजना में निजी अस्पतालों के लंबित बिलों का दो हफ्ते में करो सत्यापन

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 29 Apr 2026 11:24 AM IST
विज्ञापन
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा सरकार को निर्देश दिया है कि अगले दो सप्ताह के भीतर अस्पतालों के बिलों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि सही पाए गए बिलों का भुगतान किया जा सके। इसके साथ ही राज्य सरकार को आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से संबंधित समझौता ज्ञापन भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal High Court Directs Verify Pending Bills of Private Hospitals Under Himcare Scheme Within Two Weeks
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार

हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना में निजी अस्पतालों के लंबित बिलों के भुगतान को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि अगले दो सप्ताह के भीतर अस्पतालों के बिलों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि सही पाए गए बिलों का भुगतान किया जा सके।

Trending Videos

अदालत ने साफ किया कि बिलों के सत्यापन और भुगतान की यह प्रक्रिया राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से गठित एसआईटी की जांच से स्वतंत्र रहेगी।अदालत के पिछले आदेशों की अनुपालन करते हुए सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक जितेंद्र सांजटा और विशेष सचिव (स्वास्थ्य) एवं सीईओ अश्विनी कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। अदालत ने इन अधिकारियों के साथ सकारात्मक चर्चा की, इसके बाद लंबित भुगतानों को लेकर एक सर्वसम्मति बनी। अदालत को सूचित किया कि लंबित बिलों के वितरण के लिए वर्तमान में लगभग 17 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है।

विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने प्रतिवादी केंद्र सरकार को पिछले आदेशों की पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार को आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से संबंधित समझौता ज्ञापन भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को होगी, इसमें  कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही सितंबर 2024 से निजी अस्पतालों में हिमकेयर योजना का संचालन बंद कर दिया गया हो, लेकिन डायलिसिस की सुविधा अभी भी जारी है। डायलिसिस से संबंधित सभी लंबित बिलों की तुरंत जांच कर भुगतान जारी किया जाए। 

दूसरे राज्य में हुए अपराध की सुनवाई हिमाचल में संभव
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपराध की कड़ियां अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हों और अपराध का एक हिस्सा हिमाचल में घटित हुआ हो, तो यहां की अदालतों को मामले की सुनवाई करने का पूरा अधिकार है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कुरुक्षेत्र की निवासी कुलजीत कौर की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया।

अदालत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 ऊना के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपियों के खिलाफ धारा 120-बी, 384 और 506 के तहत आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि भले ही दुष्कर्म की पहली घटना हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुई हो, लेकिन यदि उसके बाद पीड़िता को ब्लैकमेल करके पैसे की वसूली हिमाचल प्रदेश (जिला ऊना) के बैंक खातों के माध्यम से की गई है, तो यह एक निरंतर चलने वाला अपराध है। याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी को अपने घर पर दुष्कर्म करने में सहायता प्रदान की और बाद में पीड़िता को डरा-धमकाकर 10 लाख रुपये नकद वसूले। कोर्ट ने माना कि चूंकि जबरन वसूली का प्रभाव और लेनदेन हिमाचल में हुआ, इसलिए ऊना की अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार है।

गलत दिशा में वाहन को चलाना लापरवाही, चालक दोषी करार
हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी चालक को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सड़क पर गलत दिशा में वाहन चलाना स्पष्ट रूप से लापरवाही है। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने आदेश दिया है कि दोषी को सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए 12 मई को निचली अदालत में पेश किया जाए।

न्यायाधीश राकेश कैंथला ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर दिया है। अदालत ने रिकाॅर्ड में पेश की गई तस्वीरों का अवलोकन करते हुए पाया कि बोलेरो सड़क की गलत दिशा पर चल रही थी। कोर्ट ने कहा, यदि बोलेरो अपनी बाईं ओर होती, तो दुर्घटना नहीं होती, भले ही मोटरसाइकिल चालक कहीं भी देख रहा हो। अदालत ने रोड रेगुलेशन रूल्स 1989 का हवाला देते हुए कहा कि वाहन को हमेशा बाईं ओर रखना चालक का कर्तव्य है। 

पॉक्सो मामले में बरी होने के बाद कर्मी की सेवा बहाली का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में बरी होने के बाद कर्मचारी की सेवा बहाली का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति का आधार केवल एक एफआईआर है और बाद में वह अदालत से ससम्मान बरी हो जाता है, तो उसकी बर्खास्तगी को कानूनन बरकरार नहीं रखा जा सकता।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए बोर्ड की ओर से जारी 20 दिसंबर 2022 के सेवा समाप्ति आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है और याचिकाकर्ता को उसकी पिछली सेवा तिथि से बहाल करने का आदेश दिया गया। वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के लिए सांकेतिक रूप से गिना जाएगा।इस अवधि के लिए कोई पिछला वेतन नहीं देय होगा। हालांकि, ट्रायल कोर्ट से बरी होने की तिथि 30 दिसंबर 2023 के बाद से वह सभी वास्तविक लाभों के हकदार होंगे। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सेवा समाप्ति का एकमात्र आधार एफआईआर थी और अब वह आधार ही समाप्त हो चुका है।

कृषि विवि की जमीन के हस्तांतरण मामले में याचिका खारिज
सरकार की ओर से कृषि विवि पालमपुर में पर्यटन गांव के नाम जमीन के किए गए हस्तांतरण मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज हो गई है। यह याचिका हाईकोर्ट की ओर से इस जमीन पर लगाए गए स्टे के विरोध में प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टे को हटाने के लिए दाखिल की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। 

कृषि विवि पालमपुर की करीब 112 हेक्टेयर जमीन को प्रदेश सरकार ने पर्यटन गांव (टूरिज्म विलेज) के नाम पर हस्तांतरित किया था। इसका पता चलते ही विवि के शिक्षकों, छात्रों, अन्य संगठनों और भाजपा ने जम कर विरोध किया था, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई कार्रवाई न होता देख विवि के शिक्षक संघ (हपोटा) ने जमीन के हस्तांतरण के विरोध में हाईकोर्ट में मामला दर्ज किया था। 

 इस पर हाईकोर्ट ने इस जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी।  यह देख प्रदेश सरकार ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिससे यह स्टे हट सके। अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने इसे पालमपुर की जनता, कृषि विश्वविद्यालय की संयुक्त जीत बताया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed