Eco Tourism Himachal: 50 ईको टूरिज्म साइटों का आवंटन, शाली टिब्बा समेत इन जगहों पर बढ़ेंगी पर्यटन गतिविधियां
हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने राज्य की 50 ईको टूरिज्म साइटों का आवंटन कर दिया है। इन स्थलों पर अगले 20 वर्षों तक चयनित संचालक कैंपिंग, ट्रैकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, फूड वैन और नेचर हाट जैसी गतिविधियां संचालित करेंगे। शाली टिब्बा, कमियाना, महासू और जलोड़ी पास समेत कई प्रमुख पर्यटन स्थल इस योजना में शामिल हैं। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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हिमाचल प्रदेश में प्रकृति आधारित पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वन विभाग ने प्रदेश की 50 ईको टूरिज्म साइटों का आवंटन कर दिया है। इन साइटों में शिमला के शाली टिब्बा, कमियाना और महासू समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। चयनित संचालक इन साइटों का 20 वर्षों तक निर्धारित नियमों के तहत विकास और संचालन करेंगे। वन विभाग का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में ईको टूरिज्म को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कैंपिंग, ट्रैकिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स की मिलेगी सुविधा
वन विभाग के अनुसार चयनित संचालकों को फिलहाल रॉ लैंड (अविकसित भूमि) सौंपी गई है। वे विभाग द्वारा स्वीकृत मानकों के अनुसार इन स्थलों का डिजाइन, विकास और संचालन करेंगे। प्रत्येक परियोजना में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय कानूनों और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। विभाग समय-समय पर इन परियोजनाओं की निगरानी भी करेगा।
मुख्य वन संरक्षक (आईएफएस) के. थिरुमल ने बताया कि प्रत्येक ईको टूरिज्म साइट पर 30 से 40 टेंट लगाए जा सकेंगे। यहां कैंपिंग, ट्रैकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, मोटर बाइकिंग, फूड स्टॉल और फूड वैन जैसी गतिविधियां संचालित होंगी। इसके अलावा स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए 'नेचर हाट' विकसित किए जाएंगे।
ई-टेंडर के जरिए हुआ आवंटन
वन विभाग ने सभी साइटों का आवंटन ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया है। विभाग का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
आवंटित प्रमुख ईको टूरिज्म साइटों में शिमला मंडल के क्वालिया टॉप कोटी, शाली टिब्बा और कमियाना, ठियोग के महासू और डलोग घाटी, आनी के जलोड़ी पास-रघूपुर फोर्ट, रोहड़ू के खरशाली और लड़ोट, पालमपुर के सौरव वन विहार, ततवानी, गुंचर और अंदरेटा, धर्मशाला का धौलाधार बायोडायवर्सिटी पार्क, बिलासपुर के बंदला धार और बहादुरपुर, कुनिहार के बाड़ी धार, लुटरु महादेव और निक्कु बाबा वाटरफॉल, राजगढ़ का चूड़धार, डलहौजी का नेचर पार्क, पांवटा साहिब का इको पार्क रामपुर वैली, मंडी के धूमा देवी, जैनीतरी, बागी और पधर, खिरड़ीधार कैंपिंग साइट, चब्बल की धार तथा नेचर पार्क सराहन सहित अन्य स्थल शामिल हैं।