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Fecal Sludge Management: सेप्टिक टैंक का कचरा नहीं बनेगा खतरा, 7000 गांवों के लिए योजना को मंजूरी

Tue, 07 Jul 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, डरोह/कांगड़ा।
संवाद न्यूज एजेंसी, डरोह/कांगड़ा। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Jul 2026 06:00 AM IST
सार

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए फीकल स्लज प्रबंधन (एफएसएम) योजना को मंजूरी देते हुए सेप्टिक टैंकों के अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था शुरू कर दी है। इस पहल से पेयजल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के साथ-साथ डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।

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Fecal sludge management scheme approved for 7,000 villages in Himachal
सेप्टिक टैंक(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के करीब 7,000 गांवों में अब सेप्टिक टैंकों से निकलने वाली गंदगी बीमारी और प्रदूषण का कारण नहीं बनेगी। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए फीकल स्लज प्रबंधन (एफएसएम) योजना को मंजूरी देते हुए सेप्टिक टैंकों के अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था शुरू कर दी है। इस पहल से पेयजल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के साथ-साथ डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग मिलकर मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में फीकल स्लज के को-ट्रीटमेंट की व्यवस्था विकसित करेंगे। प्रदेश के पहाड़ी भूगोल और सीमित भूमि को देखते हुए अलग-अलग फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के बजाय मौजूदा एसटीपी का उपयोग किया जाएगा, जिससे कम लागत में अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित हो सके।

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ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरों में सेप्टिक टैंक बने हुए हैं। समय-समय पर इनकी सफाई के दौरान निकलने वाले मलीय कचरे का वैज्ञानिक निपटान नहीं होने से यह कई बार नालों, खड्डों और पेयजल स्रोतों तक पहुंच जाता है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। नई व्यवस्था के तहत अब इस अपशिष्ट को एसटीपी तक पहुंचाकर सीवेज के साथ वैज्ञानिक तरीके से उपचारित किया जाएगा। योजना के तहत अब तक 30 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनके लिए लगभग 15 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

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पालमपुर और सुंदरनगर में इस दिशा में कार्य भी शुरू हो चुका है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक सभी स्वीकृत एसटीपी में को-ट्रीटमेंट की सुविधा विकसित कर प्रदेश के सभी 7,000 गांवों को सुरक्षित फीकल स्लज प्रबंधन से जोड़ना है। योजना के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, जल स्रोतों का संरक्षण होगा और सेप्टिक टैंकों की सफाई के बाद निकलने वाले अपशिष्ट का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

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वॉश इंस्टीट्यूट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को फीकल स्लज मैनेजमेंट की योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग दिया है। प्रदेश की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एसटीपी आधारित को-ट्रीटमेंट मॉडल सबसे व्यावहारिक, कम लागत वाला और टिकाऊ विकल्प है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी तथा जल स्रोतों और जनस्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।- डॉ. ओपी भुरेटा, राज्य समन्वयक, वॉश इंस्टीट्यूट

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