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Shimla News: स्नोडन एसटीपी सैंपल फेल होने पर जल निगम को एक लाख रुपये जुर्माना
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प्लांट पर कुल पर्यावरणीय क्षति 26 लाख, बार-बार उल्लंघन के बावजूद नहीं हुआ भुगतान
6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर अब तक लग चुका है 3 करोड़ का जुर्माना
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्नोडन स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के मार्च के सैंपल फेल होने के बाद हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही इस प्लांट पर अब तक कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति 26 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
शिमला शहर में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगातार प्रदूषण मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक शहर के लालपानी, मल्याना, ढली, समरहिल गेलछा और स्नोडन के 6 एसटीपी पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है लेकिन पेयजल कंपनी ने इस राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कार्रवाई पोल्यूटर पेयस सिद्धांत के तहत की है, जिसके अनुसार प्रदूषण फैलाने वाली एजेंसी को पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करनी होती है। केंद्रीय मानकों के मुताबिक एसटीपी से निकलने वाले पानी में बीओडी 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और सस्पेंडेड सॉलिड्स 100 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना अनिवार्य है लेकिन स्नोडन प्लांट बार-बार इन सीमाओं से ऊपर पाया जा रहा है।
नियमित सैंपलिंग और निरीक्षण के बावजूद सुधारात्मक कदम प्रभावी नहीं दिखे जिससे जुर्माने की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। सीवरेज प्रदूषण के मामलों में एनजीटी ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी एसटीपी निर्धारित मानकों पर चलें और उल्लंघन पर सख्ती हो। इसके बावजूद शिमला में स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। करोड़ों रुपये के जुर्माने के बावजूद भुगतान न होना और बार-बार सैंपल फेल होना संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो जलस्रोतों के साथ-साथ शहर की पेयजल आपूर्ति भी गंभीर संकट में आ सकती है।
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6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर अब तक लग चुका है 3 करोड़ का जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्नोडन स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के मार्च के सैंपल फेल होने के बाद हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही इस प्लांट पर अब तक कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति 26 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
शिमला शहर में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगातार प्रदूषण मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक शहर के लालपानी, मल्याना, ढली, समरहिल गेलछा और स्नोडन के 6 एसटीपी पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है लेकिन पेयजल कंपनी ने इस राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कार्रवाई पोल्यूटर पेयस सिद्धांत के तहत की है, जिसके अनुसार प्रदूषण फैलाने वाली एजेंसी को पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करनी होती है। केंद्रीय मानकों के मुताबिक एसटीपी से निकलने वाले पानी में बीओडी 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और सस्पेंडेड सॉलिड्स 100 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना अनिवार्य है लेकिन स्नोडन प्लांट बार-बार इन सीमाओं से ऊपर पाया जा रहा है।
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नियमित सैंपलिंग और निरीक्षण के बावजूद सुधारात्मक कदम प्रभावी नहीं दिखे जिससे जुर्माने की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। सीवरेज प्रदूषण के मामलों में एनजीटी ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी एसटीपी निर्धारित मानकों पर चलें और उल्लंघन पर सख्ती हो। इसके बावजूद शिमला में स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। करोड़ों रुपये के जुर्माने के बावजूद भुगतान न होना और बार-बार सैंपल फेल होना संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो जलस्रोतों के साथ-साथ शहर की पेयजल आपूर्ति भी गंभीर संकट में आ सकती है।

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