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अनिल अंबानी पर मुकदमा, किसानों से की थी धोखाधड़ी

Sat, 25 Jul 2015 11:25 AM IST
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:25 AM IST
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FIR againest anil ambani in himachal.

रिलायंस एनर्जी के मालिक अनिल अंबानी और उनके आठ अधिकारियों पर हिमाचल में मुकदमा दर्ज हो गया है। यहां बिलासपुर जिला कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र रचने और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोप में सदर थाना में केस दर्ज हुआ है।

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आरोप है कि वर्ष 2013-14 में बिलासपुर जिले के जुखाला निवासी एक व्यक्ति की भूमि से जबरन हाई वोल्टेज टावर की ट्रांसमिशन बिछाई गई। पुलिस ने कंपनी के मालिक और अन्य कर्मियों के खिलाफ लगभग 30 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बिलासपुर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्ष 2013-14 में रिलायंस एनर्जी कंपनी ने ट्रांसमिशन लाइन बिछाई।

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अंबानी पर लगी हैं ये 30 धाराएं

FIR againest anil ambani in himachal.

जुखाला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आशा मझारी गांव के जगदीश सहित कई किसानों ने ट्रांसमिशन लाइन बिछाने वाली कंपनी के अधिकारियों पर धोखाधड़ी, वन अधिनियम और पर्यावरण नियमों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद अदालत ने थाना सदर के एचएचओ को कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। शुक्रवार को पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

न्यायालय से मिले आदेशों के बाद पुलिस ने रिलायंस एनर्जी लिमिटेड शांताक्रूज (ई) मुंबई से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों अनिल डी अंबानी, सतीश सेठ, एसएस कोहली, आरआर राय, वीके चतुर्वेदी, के रवि कुमार, वीएल मुलकार, रयाना करानी के खिलाफ 120 बी, 145,156, 409, 351, 464, 467, 468, 471, 405, 410, 415, 416, 417, 422, 420, 452, 283, 271, 341, 379, 392, 395, 399, 506, 147, 148, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 16, वन अधिनियम की धारा 41 और 42 के तहत मामला दर्ज किया है।

ये हैं किसानों के आरोप

FIR againest anil ambani in himachal.

एएसपी रोहित मालपानी ने मामला दर्ज करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जुखाला के किसानों का आरोप है कि वर्ष 2013-14 के दौरान उक्त लोग अपने स्टॉफ के साथ उनके खेतों में दाखिल हुए थे।

उन्हें नोटिस दिए बगैर खेतों में रात के अंधेरे में टावर लाइन बिछाई गई। यहां तक कि उनकी भूमि से बेशकीमती पेड़ भी काटे गए। यहां तक कि राजस्व संबंधित जाली दस्तावेज तक बनाए गए। यहां तक कि कंपनसेशन एक्ट की धज्जियां उड़ाई गईं।
 

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