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Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- आपदा प्रभावितों का पुनर्वास सरकारों की जिम्मेदारी, पीछे नहीं हट सकते

Fri, 14 Aug 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 14 Aug 2026 05:15 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपने वैधानिक दायित्वों से नहीं बच सकतीं। अदालत ने कहा कि आपदा के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए संसाधन जुटाना और कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है।

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High Court stated that the rehabilitation of disaster victims is the responsibility of the govts
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के आवंटन में भारी असंतुलन पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपने वैधानिक दायित्वों से नहीं बच सकतीं। अदालत ने कहा कि आपदा के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए संसाधन जुटाना और कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 (5) के तहत कंपनियों के लिए उन स्थानीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है, जहां वे काम करती हैं।

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अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को आदेशों के अनुपालन और गैर अनुपालनकर्ता कंपनियों पर कार्रवाई के लिए उठाए कदमों का ब्योरा देते हुए नया हलफनामा दायर करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट ने एनटीपीसी, एनएचपीसी, एसजेवीएन, पावर ग्रिड, पीएफसी, आरईसी, टीएचडीसी, एनईईपीसीओ, ग्रिड इंडिया और एनएचएआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ओर से हिमाचल प्रदेश को अपेक्षाकृत कम सीएसआर फंड दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। अदालत के समक्ष रखे आंकड़ों के अनुसार एनटीपीसी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में हिमाचल को केवल 1.58 करोड़ और साल 2023-24 में 2.22 करोड़ सीएसआर मद में दिए। इसके विपरीत वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश को 40.16 करोड़, बिहार को 24.10 करोड़, महाराष्ट्र को 29.87 करोड़, ओडिशा को 18.83 करोड़ और छत्तीसगढ़ को 17.07 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों को दी गई राशि नाममात्र की है, जो कानून की भावना और प्रावधानों के अनुरूप नहीं दिखती।

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तीन वर्षों में 17,428 करोड़ की क्षति, 13,001 करोड़ की कमी
राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव के माध्यम से दायर हलफनामे में बताया गया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश को आपदा के कारण लगभग 17,428 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके मुकाबले राहत, मरम्मत और पुनर्वास कार्यों पर अब तक केवल 4,427.68 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। इस प्रकार पुनर्वास के लिए आवश्यक राशि में 13,001 करोड़ की भारी कमी बनी हुई है। यह भी बताया गया कि राज्य सरकार आपदा के बाद सीएसआर भागीदारी को प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखंड और ओडिशा के मॉडल का अध्ययन कर रही है।

केंद्र की दलील खारिज, 81 कंपनियों ने नहीं दी सीएसआर की जानकारी
अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार कई कंपनियों के सीएसआर दायित्व और हिमाचल में वास्तविक व्यय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 81 कंपनियों ने अपनी देय सीएसआर राशि से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। केंद्र सरकार ने दलील दी कि कंपनी अधिनियम की धारा 135(5) का पहला प्रावधान स्थानीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात तो करता है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। इस दलील को खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा कि कानून की स्पष्ट मंशा और भाषा के अनुसार कंपनियों के लिए अपने कार्यक्षेत्र वाले स्थानीय इलाकों को प्राथमिकता देना एक वैधानिक दायित्व है।

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