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Himachal News: हिमालय की चार झीलों से बढ़ा खतरा, फटने से पहले बजेगा अलार्म, जानें पूरा मामला

रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 12 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

पिघलते ग्लेशियरों के कारण बनी कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर की चार झीलें ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) का बड़ा खतरा बन चुकी हैं।

Four Himalayan lakes pose a threat, alarm will be raised before they burst.
वासुकी झील। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के उच्च हिमालय क्षेत्र में पिघलते ग्लेशियर अब संभावित तबाही का संकेत दे रहे हैं। इन पिघलते ग्लेशियरों के कारण बनी कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर की चार झीलें ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) का बड़ा खतरा बन चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इन झीलों की निगरानी के लिए सेटेलाइट आधारित अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि झील फटने की स्थिति में समय रहते अलर्ट जारी कर जानमाल का नुकसान कम किया जा सके।

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अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे
हिमाचल प्रदेश में पहली बार ग्लेशियर से बनीं झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने प्रदेश की चार उच्च जोखिम वाली झीलों को चिह्नित किया है, जहां यह आधुनिक प्रणाली स्थापित होगी। इनमें कुल्लू जिला की पार्वती घाटी स्थित वासुकी झील (खीरगंगा) शामिल है, जो समुद्र तल से 14,770 फीट की ऊंचाई पर है और करीब 12.49 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है। लाहौल-स्पीति की गिपांग (घेपल) झील लगभग 13 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और 92.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ तेजी से विस्तार कर रही है।

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इन जिलों से खतरा
किन्नौर जिला की सांगला घाटी में 15,465 फीट ऊंचाई पर बनी बास्पा झील का क्षेत्रफल 18.88 हेक्टेयर है। सतलुज बेसिन के काशंग गाड़ क्षेत्र में 14,025 फीट की ऊंचाई पर स्थित कलका झील (27.89 हेक्टेयर) भी संभावित इसी खतरे की श्रेणी में है। चारों झीलों के फटने की स्थिति में पानी सीधे चंद्रा, पार्वती और सतलुज नदियों में उतरेगा, जिससे निचले क्षेत्रों में भारी तबाही की आशंका है। लाहौल में लगाए जाने वाले सिस्टम का उपकरण कुल्लू पहुंच चुका है।

सिस्टम सेटेलाइट आधारित होगा
सर्दी कम होते ही स्थापना कार्य शुरू किया जाएगा। यह सिस्टम सेटेलाइट आधारित होगा और झील में जलस्तर, ग्लेशियर टूटने या असामान्य हलचल की स्थिति में पहले ही अलर्ट जारी करेगा। मौसम विभाग और जिला प्रशासन को तत्काल सूचना मिलेगी, जिससे राहत एवं बचाव की तैयारी समय रहते की जा सकेगी। कुल्लू के अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने पुष्टि की है कि पार्वती घाटी की वासुकी झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

विशेषज्ञों ने ये कहा
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे इन झीलों का आकार लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते निगरानी और नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए तो हिमालयी क्षेत्र में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। 

एनडीएमए ने 195 उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलें की चिह्नित
एनडीएमए ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत 195 उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों को चिह्नित किया है। पहले यह संख्या 56 थी, जिसे बढ़ाया गया है। देश में लगभग 7,500 से अधिक हिमनद झीलें हैं, जिनमें से 195 को संभावित खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है। ये झीलें मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में हैं।

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