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ईवीएम खोलेगी राज, हिमाचल में किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज

Fri, 10 Nov 2017 01:07 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 10 Nov 2017 01:07 PM IST
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himachal assembly election 2017 counting on 18 december

हिमाचल विधानसभा की 68 सीटों पर मतदान के बाद अब सबकी जुबान पर एक ही सवाल है कि राज्य में अब किस दल की सरकार बनेगी। मतदाताओं ने अगले पांच साल के लिए सत्ता की बागडोर किसे सौंपनी है यह तय कर दिया है। 18 दिसंबर को ईवीएम यह राज खोलेगी कि सत्ता का ताज किसके सिर पर सजेगा ?

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जवाब के लिए हर कोई बेताब है। चूंकि इस बार पिछली बार से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने पोलिंग बूथों तक पहुंचे हैं, इसलिए सियासी रणनीतिकार भी इसके सियासी मायने टटोलने में लगे हैं। कांग्रेस और भाजपा की साख नतीजों पर टिकी है कि जीत मोदी मंत्र की होगी या फिर वीरभद्र तंत्र की।
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हिमाचल चुनाव में इस बार के चुनावी समर प्रदेश के 337 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य ईवीएम मशीनों में कैद है। 74 प्रतिशत से अधिक मतदान होने के बाद भी मतदाताओं की चुप्पी से स्थिति साफ नहीं है कि अगली सरकार किसकी बनेगी। जनमत कांग्रेस के पक्ष में रहा तो वीरभद्र सिंह सातवीं बार मुख्यमंत्री होंगे, जबकि भाजपा धूमल को तीसरी बार सत्त्ता सौंपने का एलान पहले ही कर चुकी है।

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मतदान प्रतिशत बढ़ने के निकाले जा रहे सियासी मायने

himachal assembly election 2017 counting on 18 december

अब मतगणना के बाद ये साफ होगा कि भाजपा और कांग्रेस के साथ माकपा, बसपा सहित अन्य दलों और निर्दलीयों की प्रदेश में क्या स्थिति है। भाजपा के विजय रथ को रोकने में अगर कांग्रेस कामयाब हुई तो टीम राहुल के लिए ये वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले संजीवनी साबित होगी।

वहीं भाजपा के लिए जीत साबित करेगी कि मोदी लहर अब भी देश में जारी है। अगले वर्ष दक्षिण भारतीय राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। इसी के साथ कई क्षत्रपों बाली, रविंद्र रवि, गुलाब सिंह, कौल सिंह आदि का भविष्य भी तय होना है।

ये नेता चुनाव जीतने की स्थिति में भविष्य की कैबिनेट के चेहरे होने वाले हैं। शांता कुमार और सुखराम सरीखे नेताओं के लिए ये चुनाव उनके सियासी वजूद का इम्तिहान है। अब सबकी नजर 18 दिसंबर को ईवीएम मशीनों से निकलने वाले मतों की गिनती पर टिकी है।

भांपने में लगे बढ़े मतदान का गणित

himachal assembly election 2017 counting on 18 december

वर्ष 2012 के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत में डेढ़ प्रतिशत बढ़ोतरी के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। वर्ष 2012 में 73.51 प्रतिशत मतदान रहा था जबकि इस बार 74 प्रतिशत से अधिक रहा है।

वर्ष 2003 के 74.51 प्रतिशत के रिकार्ड को पार पाता है या नहीं। कुछ बढ़े मतदान के साथ हिमाचल में सरकार बदलने के ट्रेंड रहे हैं, जिससे कई सियासी गणितज्ञ इस बार भी बदलाव से जोड़ रहे हैं।

उधर, यह भी माना जा रहा है कि दोनों प्रमुख दलों में कांटे की टक्कर की वजह से मतदान के प्रतिशत में इजाफा हुआ है।

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