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Himachal Budget 2026-27: प्राकृतिक खेती को बल; हल्दी, गेहूं-मक्की का एमएसपी बढ़ाया, किसान आयोग का होगा गठन

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 22 Mar 2026 10:42 AM IST
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सार

Himachal Budget 2026-27: हिमाचल प्रदेश सरकार ने बजट में किसानों और बागवानों के लिए कई महत्वपूर्ण एलान किए हैं। ऑर्गेनिक फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी कई गई है। हमीरपुर में ₹25 करोड़ का एक्वा पार्क और मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना के लिए ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Budget 2026-27 Boost for Natural Farming MSP Increased for Turmeric Wheat and Maize
हिमाचल बजट 2026-27 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों के हित में कई बड़ी घोषणाएं की हैं। राज्य में 2.23 लाख किसान 38,455 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिन्हें अब बेहतर बाजार और मूल्य मिलेगा। सरकार ने गेहूं का न्यूनतम खरीद मूल्य (एमएसपी) 60 से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो, मक्का 40 से 50 रुपये, पांगी घाटी के जौ 60 से 80 रुपये और प्राकृतिक हल्दी 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो करने की घोषणा की है। पहली बार अदरक को भी एमएसपी के दायरे में लाते हुए 30 रुपये प्रति किलो तय किया गया है।

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प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों को मजबूत करने के लिए राज्य किसान आयोग के गठन का भी एलान किया है। लंबे समय से चली आ रही किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। प्रस्तावित आयोग किसानों की समस्याओं को सुनने, नीतिगत सुझाव देने और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करेगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को अपनी बात रखने का एक सशक्त मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने के प्रयासों को गति मिलेगी। आयोग कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला हमीरपुर में आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। मार्केटिंग सेल बनाकर उत्पादों को प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाएगा। फसल विविधीकरण परियोजना के तहत 203 करोड़ रुपये खर्च कर माइक्रो इरिगेशन, फार्म रोड, फेंसिंग और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। 

बीज गांव योजना शुरू, 100 किसानों के समूह पारंपरिक बीजों का करेंगे उत्पादन
सरकार ने बीज आत्मनिर्भरता के लिए बीज गांव योजना शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें 100 किसानों के समूह पारंपरिक बीजों का उत्पादन करेंगे। बीज उत्पादकों को 5 हजार रुपये प्रति बीघा सब्सिडी और प्रत्येक बीज गांव को 2 लाख रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट मिलेगी।  फसल विविधीकरण परियोजना के तहत 203 करोड़ रुपये खर्च कर माइक्रो इरिगेशन, फार्म रोड, फेंसिंग और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सरकार ने मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। 

बीज उत्पादकों को 5,000 की सब्सिडी
पारंपरिक बीजों का उत्पादन करने वाले किसानों को 5 हजार रुपये प्रति बीघा सब्सिडी और प्रत्येक बीज गांव को 2 लाख रुपये  2 लाख रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट दी जाएगी। 

गाय का दूध 61 व भैंस का 71 रुपये प्रति लीटर
प्रदेश सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को मजबूती देने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। इसके तहत गाय के दूध का क्रय मूल्य 51 से बढ़ाकर 61 रुपये और भैंस के दूध का 61 से 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जिससे पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा।  दूध उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से ढगवार (कांगड़ा) में दूध प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण इसी वर्ष पूरा होगा, जबकि नाहन, नालागढ़, हमीरपुर और ऊना में नए प्लांट व चिलिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने पिछले तीन वर्षों में दूध खरीद दरों में ऐतिहासिक वृद्धि की है, जिसके परिणामस्वरूप दूध का संग्रहण 4 करोड़ लीटर से बढ़कर 8 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो गया है।
 

बागवानों को तकनीक व बाजार उपलब्ध कराने को बनेंगे केंद्र
प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए 1292 करोड़ रुपये की एचपी शिवा परियोजना सात जिलों के 52 विकास खंडों में चरणबद्ध तरीके लागू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जहां शाहपुर (कांगड़ा) और बागथन (सिरमौर) में आधुनिक फाउंडेशन ब्लॉक स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी, वहीं बागवानों को तकनीक और बाजार से जोड़ने के लिए एफएसीडीसी और एफईआईसी केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

परियोजना के अंतर्गत करीब 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 400 क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे लगभग 15 हजार किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को संतरा, अमरूद, अनार, लीची, आम, प्लम, पेकान नट और पर्सिमन जैसे उप-उष्णकटिबंधीय फलों की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 1140 हेक्टेयर में पौधरोपण हो चुका है। 

सिंचाई के लिए 142 लिफ्ट योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 99 पूरी हो चुकी हैं। परियोजना के तहत 300 हेक्टेयर में उच्च मूल्य बागवानी को बढ़ावा देने के लिए एवोकाडो, ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट और कीवी के क्लस्टर भी विकसित होंगे। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन सुविधाएं और कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय के अवसर भी किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। 

किसान आयोग का गठन सही पर बागवानों के लिए घोषणा नहीं 
फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चाैहान ने किसान आयोग के गठन, प्राकृतिक खेती के उत्पादों के एमएसपी में वृद्धि जैसे कृषि सुधारों का स्वागत किया है। हालांकि, सेब बागवानों के लिए किसी बड़ी घोषणा के अभाव पर नाराजगी जताई है। 

आर्थिकी की रीढ़ बागवानी की बजट में पूरी तरह से अनदेखी 
हिमाचल सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ सेब बागवानों को इस बजट में पूरी तरह अनदेखी की गई है।  इसमें लंबित भुगतान का जिक्र भी नहीं। 

नगरोटा, दधोल व नादौन में 5 करोड़ से पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन सुविधाएं होंगी शुरू
बागवानी उत्पादों के बेहतर संरक्षण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने कांगड़ा के नगरोटा बगवां, बिलासपुर के दधोल और हमीरपुर के नादौन में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन सुविधाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों के माध्यम से फलों और सब्जियों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और भंडारण की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे बागवानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और फसल खराब होने से होने वाले नुकसान में कमी आएगी, साथ ही बाजार तक पहुंच भी मजबूत होगी। 

पारंपरिक बीजों को सहेजने की पहल सही कदम
प्रदेश सरकार की ओर से पेश किए गए चौथे बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना सही कदम है। इसमें प्राकृतिक रूप से उगाई गई गेहूं और मक्का के दाम बढ़ने से से किसानों को लाभ होगा। इसमें गेहूं का मूल्य 60 रुपये से 80 रुपये व मक्का का 40 रुपये 60 रुपये करना किसानों के लिए हित में है। इस प्राकृतिक खेती में किसानों की आर्थिकी काफी मजबूत हो रही है। आम तौर पर होने वाली हल्दी का मूल्य 90 रुपये से सीधा 150 रुपये से भी किसानों को लाभ होगा। इसे लेकर सरकार का यह सही कदम है, जबकि बीज गांव योजना के तहत गांव में किसानों को पारंपरिक और स्थानीय वैरायटी के लिए प्रशिक्षण देने से एक बार फिर से हमारे खोए हुए पारंपरिक बीजों को बढ़ावा मिलेगा।

इसके लिए सरकार को 50-100 किसानों का ग्रुप बनाकर उन्हें जमीन के ढांचे को ठीक करने व उसके रखरखाव के लिए दो लाख रुपये का अनुदान देना भी किसान हित में है, जबकि हमीरपुर के बड़ा कृषि विज्ञान केंद्र में हाइड्रोपोनिक विधि का अधिक किसानों को प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। इससे किसान खासकर हाइड्रोपोनिक विधि से सब्जियां आदि तैयार कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। वहीं राज्य किसान आयोग के गठन से किसान हित को मजबूती मिलेगी। इससे किसान अपनी समस्याएं मजबूती उठा सकता है। राज्य किसान आयोग के गठन से किसानों को काफी लाभ होगा। इसके माध्यम से किसान अपनी समस्याएं और मांगें उठा सकते हैं। 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी प्रमुख आधार
सीएम सुक्खू की ओर से पेश किया गया बजट कुल मिलाकर कृषि-बागवानी के हित में है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र एक प्रमुख आधार है। इसमें किसान-बागवानों के लिए किसान आयोग का गठन करना एक सराहनीय निर्णय है। किसान आयोग के जरिये किसान-बागवान अपनी समस्याएं सरकार और विशेषज्ञों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। एचपी शिवा के तहत भी बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। 1292 करोड़ रुपये की एचपी शिवा परियोजना से सैकड़ों किसान और बागवान लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा बजट में प्राकृतिक खेती समेत अन्य स्थानीय शोध के लिए  प्रावधान होना चाहिए। इसके  अलावा ऐसे संस्थान जहां पर किसान-बागवानों को लाभ मिलता हो, वहां पर मैन पावर को भी बढ़ाना चाहिए। दूध के दाम बढ़ाने से किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। इसमें दूध के साथ प्राकृतिक खेती के लिए खाद को भी बेचा जा सकेगा। क्योंकि प्राकृतिक खेती का आधार पशुपालन ही है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था में बागवानी एक प्रमुख आधार स्तंभ है, जो सेब, नाशपाती और अन्य फलों के उत्पादन से ग्रामीण आजीविका, रोजगार और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह कृषि विविधीकरण, महिलाओं के सशक्तिकरण और ऊबड़-खाबड़ भूमि के सर्वोत्तम उपयोग के माध्यम से आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है। हिमाचल में 70% से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि-बागवानी पर निर्भर है।

गोद ले सकेंगे गो सदन-अभयारण्य
गो संरक्षण: गो संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए अब व्यापारिक घरानों को गो सदन और गो अभयारण्यों को गोद लेने की अनुमति भी दी जाएगी।

डिजिटल कार्ड: प्रत्येक चरवाहे का डिजिटल कार्ड बनाया जाएगा और उन्हें जीवन बीमा सुरक्षा भी दी जाएगी। सरकार चरागाह परमिट व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए कर्नाटक मॉडल पर नया कानून लाने की तैयारी में है। पारंपरिक चरवाहों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये की पीईएचईएल योजना शुरू होगी, जिससे 40 हजार परिवारों को डिजिटल कार्ड, बीमा और उन्नत नस्ल के पशु मिलेंगे।चरवाहों को चराई क्षेत्र में छूट दी जाएगी और उनके अधिकारों के लिए कर्नाटक मॉडल पर नया कानून बनेगा। 

2000 तक होंगी डेयरी सहकारी समितियां: पंचायत स्तर पर डेयरी सहकारी समितियों की संख्या को इस वर्ष के अंत तक दोगुना कर 2,000 किया जाएगा, जिसमें महिला समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अमूल पैटर्न पर इंटीग्रेटेड मोबाइल एप और आधुनिक मिल्क एनालाइजर उपलब्ध कराए जाएंगे। निजी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 65 फीसदी सब्सिडी के साथ एडवांस कॉम्प्रिहेंसिव व्हीकल उपलब्ध कराए जाएंगे, जो संग्रह और पशु स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य करेंगे। प्रमाणित ए2 दूध की टेस्टिंग और ब्रांडिंग कर इसे 100 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। पंजीकृत सहकारी संस्थाओं के दूध उत्पादकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 3 रुपये बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर की जाएगी।

सेंसर से होगी पेयजल योजनाओं की निगरानी :  पेयजल योजनाओं की आधुनिक निगरानी के लिए एससीएडीए, सेंसर जैसी तकनीकों का उपयोग शहरी क्षेत्रों की 10 योजनाओं में होगा। प्राकृतिक आपदा के दौरान निर्बाध आपूर्ति के लिए 150 योजनाओं में बैलेंसिंग रिजर्ववायर और 3 लाख लीटर क्षमता के बफर स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे। बिजली खर्च कम करने हेतु 34 योजनाओं को सौर ऊर्जा ग्रिड से जोड़कर हरित योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने हेतु प्रमुख नदी घाटियों की फ्लड प्लेन जोनिंग के माध्यम से वैज्ञानिक पहचान और नियमन किया जाएगा। 
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