हिमाचल प्रदेश: पंचायत चुनाव में बदल रहा ट्रेंड, युवाओं की बढ़ी भागीदारी, एचपीयू के शोध में खुलासा; जानें
पंचायत चुनाव 2020–21 में 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल भागीदारी 72.04 प्रतिशत दर्ज की गई। ये खुलासा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शोध से पता चला है। पढ़ें पूरी खबर...
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पंचायत चुनाव में युवा नेतृत्व का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शोध से पता चला है कि पंचायत चुनाव 2020–21 में 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल भागीदारी 72.04 प्रतिशत दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि स्थानीय संस्थाओं में अब नेतृत्व का केंद्र अनुभवी और वरिष्ठ आयु वर्ग से हटकर युवाओं की ओर स्थानांतरित हो रहा है। युवाओं की भागीदारी केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधित्व में भी उनका स्पष्ट वर्चस्व दर्ज किया गया है।
बीते पंचायत चुनावों के दौरान राज्य में कुल 97,502 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। नामांकन वापसी के बाद 78,072 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहे। इनमें से 26,727 उम्मीदवार विभिन्न पंचायत पदों पर निर्वाचित हुए। 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9,223 प्रतिनिधि पंचायतों में पहुंचे, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 34.51 प्रतिशत है। इसी तरह 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 10,030 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनकी हिस्सेदारी 37.53 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 5,105 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनका प्रतिशत 19.10 रहा। 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग से 1,981 प्रतिनिधि यानी 7.41 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से केवल 388 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनकी हिस्सेदारी 1.45 प्रतिशत रही। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि पंचायतों में नेतृत्व का चेहरा अब तेजी से युवा होता जा रहा है।
पंचायत चुनाव में महिलाओं की जीत ने भी पंचायत व्यवस्था के सामाजिक संतुलन को नया रूप दिया है। चुनाव परिणाम के अनुसार कुल 26,727 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 14,140 महिलाएं पंचायतों में पहुंचीं। यह कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 52.90 प्रतिशत है, जो राज्य में निर्धारित 50 प्रतिशत महिला आरक्षण से अधिक है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सामान्य वर्ग की सीटों पर भी सफलतापूर्वक चुनाव जीतकर पंचायतों में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
निर्वाचित प्रतिनिधियों का शैक्षणिक स्तर भी पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। आंकड़ों के अनुसार 46.40 प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि मैट्रिक पास हैं। 24.80 प्रतिशत मैट्रिक से नीचे, जबकि 15.70 प्रतिशत उच्च माध्यमिक, 7.80 प्रतिशत स्नातक और 3.40 प्रतिशत स्नातकोत्तर हैं। गैर-साक्षर निर्वाचित प्रतिनिधियों का अनुपात केवल 1.90 प्रतिशत रहा। आर्थिक स्थिति के विश्लेषण में सामने आया कि 81.65 प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि एपीएल वर्ग से हैं। बीपीएल वर्ग से 10 प्रतिशत, गैर-करदाता वर्ग से 7.37 प्रतिशत और केवल 0.98 प्रतिशत प्रतिनिधि करदाता वर्ग से निर्वाचित हुए। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायत नेतृत्व मुख्यतः मध्यम और निम्न आय वर्ग के हाथों में केंद्रित है।
इस स्टडी के लेखक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत डॉ. बलदेव सिंह नेगी ने बताया कि यह शोध पूरी तरह सरकारी आंकड़ों पर आधारित है और भारत में ऐसा कोई अन्य राज्य नहीं है, जहां पंचायती राज संस्थाओं में युवाओं की इतनी व्यापक भागीदारी देखने को मिलती हो।