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HP Forest Fire: देश में सबसे अधिक वनाग्नि घटनाओं वाला राज्य बना हिमाचल, अध्ययन में हुआ खुलासा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

प्रदेश देश में वनाग्नि की सर्वाधिक घटनाओं वाला राज्य बन गया है। नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच राज्य में सर्वाधिक 10,136 वनाग्नि घटनाएं दर्ज की गईं। 

Himachal emerges as the state with the highest number of forest fire incidents in the country; study reveals.
जंगल की आग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश देश में वनाग्नि की सर्वाधिक घटनाओं वाला राज्य बन गया है। नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच राज्य में सर्वाधिक 10,136 वनाग्नि घटनाएं दर्ज की गईं। हर साल वनों की आग की घटनाएं हो रही हैं। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक जियोस्पेशियल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जियोएआई) मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल जंगलों में आग लगने की संभावनाओं का पहले से आकलन कर सकता है। प्रतिष्ठित शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने किया है। इसमें नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शोधकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रही। गलकोटियास यूनिवर्सिटी, एसीआरआई-एसटी, आईएनसीडीएस मारिन ड्रेसी, अदामा साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी और सवीथा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज के वैज्ञानिक भी शामिल रहे।

शोध दल में विशेषज्ञ सुहेब, एमडी नवाज़ुज्जोहा, एमडी शाहिद अली, एमडी ममून राशिद, दरख्शा फात्मा नकवी, हनी कैसर, पियरे सिकार्ड, शंकर करुप्पन्नन और हसन राजा नकवी शामिल हैं। इस अध्ययन से हिमाचल प्रदेश में वनाग्नि जोखिम के आकलन के लिए एक नया ढांचा मिला है। अध्ययन के अनुसार, हिमाचल के वन क्षेत्र अब वनाग्नि जोखिम अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गए हैं। शोध में चंबा जिले सहित ऊपरी रावी उपबेसिन का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इस क्षेत्र का 20.75 फीसदी हिस्सा उच्च से अत्यधिक उच्च वनाग्नि जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। चंबा, डलहौजी, कुथेर, घराऊ, भलाई और लंगेरा क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील पाए गए हैं। वैज्ञानिकों ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), रिमोट सेंसिंग और मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग किया। उन्होंने 16 विभिन्न पर्यावरणीय और मानवीय कारकों का विश्लेषण किया। इनमें तापमान, मिट्टी की नमी, वर्षा, आर्द्रता, वनस्पति घनत्व, सड़क और गांवों की निकटता शामिल हैं। अध्ययन में तापमान, मिट्टी की नमी और मानव गतिविधियों को वनाग्नि के प्रमुख कारणों के रूप में चिह्नित किया गया।

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स्टैकिंग मॉडल सबसे अधिक प्रभावी साबित हुआ

शोधकर्ताओं ने पांच अलग-अलग मशीन लर्निंग मॉडलों का परीक्षण किया। इनमें स्टैकिंग मॉडल सबसे अधिक प्रभावी साबित हुआ। इस मॉडल ने 0.95 का एयूसी स्कोर प्राप्त किया। यह स्कोर मॉडल की उच्च सटीकता को दर्शाता है। यह अत्याधुनिक जियोएआई फ्रेमवर्क वनाग्नि की भविष्यवाणी में सहायक होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नया एक्सप्लेनएबल जियोएआई फ्रेमवर्क वन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मदद करेगा। यह आग की आशंका वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान करने में सहायक है। इससे निगरानी मजबूत करने और रोकथाम की रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और घटती मिट्टी की नमी के कारण हिमालयी क्षेत्रों में वनाग्नि का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में यह तकनीक भविष्य में बड़े नुकसान को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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