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Himachal News: खुले बाजार में बिजली बेचकर हिमाचल प्रदेश सरकार को फायदा, प्रति यूनिट 2.31 रुपये अतिरिक्त आय
अनिमेष कौशल, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 08 Jun 2026 12:44 PM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन की जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली अपनी हिस्सेदारी की बिजली को खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत पहली बिक्री में सरकार ने 3.88 रुपये प्रति यूनिट की दर से प्राप्त बिजली को 6.19 रुपये प्रति यूनिट के भाव पर बेचकर 2.31 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त लाभ अर्जित किया है।
बिजली।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन की परियोजनाओं से मिलने वाली अपनी हिस्सेदारी की बिजली को खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था से सरकार को प्रति यूनिट 2.31 रुपये का लाभ मिल रहा है। पहली बिक्री में सरकार ने 3.88 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई बिजली को 6.19 रुपये प्रति यूनिट के भाव पर बेचकर लाभ अर्जित किया है।
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प्रदेश सरकार को 1500 मेगावाट की नाथपा झाकड़ी तथा 412 मेगावाट की रामपुर जलविद्युत परियोजना में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी के बदले हर वर्ष लगभग 180 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होती है। अब तक राज्य सरकार यह बिजली उसी दर पर हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को उपलब्ध कराती थी, जिस दर पर उसे यह बिजली मिलती थी। इससे सरकार को किसी प्रकार का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त नहीं होता था। ऊर्जा विभाग ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक जून 2026 से मई 2029 तक की अवधि के लिए बिजली बिक्री संबंधी टेंडर आमंत्रित किए थे।
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टेंडर प्रक्रिया के बाद सरकार ने अपनी हिस्सेदारी की बिजली को प्रतिस्पर्धी दरों पर खुले बाजार में बेचने का निर्णय लिया। इसके तहत पहली बिक्री में बिजली की दर 6.19 रुपये प्रति यूनिट तय हुई, जबकि सरकार को यह बिजली 3.88 रुपये प्रति यूनिट की दर से प्राप्त हुई थी। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था से राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिससे बिजली क्षेत्र में निवेश और आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलेगी। यदि बाजार में बिजली की मांग और दरें इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले वर्षों में सरकार को अपनी इक्विटी बिजली से उल्लेखनीय आय हासिल हो सकती है।
सर्दियों के लिए बिजली का इंतजाम करने में जुटा बोर्ड
सरकार से सस्ती बिजली मिलना बंद होने से बोर्ड ने सर्दियों के लिए खरीद प्रक्रिया को अभी से शुरू कर दिया है। पूर्व के वर्षों में बिजली बोर्ड की ओर से सरकार से प्राप्त होने वाली सप्लाई को बैंकिंग आधार पर गर्मियों के मौसम में पड़ोसी राज्यों को दिया जाता था। सर्दियों में जब प्रदेश में बिजली उत्पादन घटता था तो इन्हीं पड़ोसी राज्यों से सप्लाई को वापस लिया जाता था। अब राज्य सरकार से बिजली नहीं मिलने की स्थिति में बोर्ड ने सर्दियों के लिए बिजली खरीद को टेंडर आमंत्रित किए हैं।
सरकार से सस्ती बिजली मिलना बंद होने से बोर्ड ने सर्दियों के लिए खरीद प्रक्रिया को अभी से शुरू कर दिया है। पूर्व के वर्षों में बिजली बोर्ड की ओर से सरकार से प्राप्त होने वाली सप्लाई को बैंकिंग आधार पर गर्मियों के मौसम में पड़ोसी राज्यों को दिया जाता था। सर्दियों में जब प्रदेश में बिजली उत्पादन घटता था तो इन्हीं पड़ोसी राज्यों से सप्लाई को वापस लिया जाता था। अब राज्य सरकार से बिजली नहीं मिलने की स्थिति में बोर्ड ने सर्दियों के लिए बिजली खरीद को टेंडर आमंत्रित किए हैं।
1214 किसानों ने बेचा 4548 मीट्रिक टन गेहूं, 11.42 करोड़ का जारी हुआ भुगतान
हिमाचल प्रदेश में खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से किसानों से गेहूं की खरीद सुचारू रूप से जारी है। प्रदेश के 1214 किसानों ने अब तक 4548.20 मीट्रिक टन गेहूं की फसल बेची है। इनमें से 1168 किसानों को निगम की ओर से कुल 11.42 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई है, जबकि 46 किसानों का भुगतान अभी लंबित है। खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा प्रदेश में आठ अप्रैल से गेहूं की खरीद की जा रही है, जो 15 जून तक चलेगी। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा फसल सिरमौर जिले के एपीएमसी पांवटा साहिब खरीद केंद्र में खरीदी गई है। यहां 405 किसानों ने 1545.05 मीट्रिक टन गेहूं बेची है। सबसे कम खरीद कांगड़ा जिले की फतेहपुर अनाज मंडी में दर्ज की गई है, जहां 12 किसानों ने केवल 52.10 मीट्रिक टन गेहूं की उपज बेची है। एपीएमसी रामपुर में 51, बद्दी के मलपुर में 33, धौलाकुआं में 138 किसानों ने फसल बेची है।
हिमाचल प्रदेश में खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से किसानों से गेहूं की खरीद सुचारू रूप से जारी है। प्रदेश के 1214 किसानों ने अब तक 4548.20 मीट्रिक टन गेहूं की फसल बेची है। इनमें से 1168 किसानों को निगम की ओर से कुल 11.42 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई है, जबकि 46 किसानों का भुगतान अभी लंबित है। खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा प्रदेश में आठ अप्रैल से गेहूं की खरीद की जा रही है, जो 15 जून तक चलेगी। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा फसल सिरमौर जिले के एपीएमसी पांवटा साहिब खरीद केंद्र में खरीदी गई है। यहां 405 किसानों ने 1545.05 मीट्रिक टन गेहूं बेची है। सबसे कम खरीद कांगड़ा जिले की फतेहपुर अनाज मंडी में दर्ज की गई है, जहां 12 किसानों ने केवल 52.10 मीट्रिक टन गेहूं की उपज बेची है। एपीएमसी रामपुर में 51, बद्दी के मलपुर में 33, धौलाकुआं में 138 किसानों ने फसल बेची है।