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Himachal News: हिमाचल सरकार बाजार से लेगी 700 करोड़ रुपये का नया ऋण, आरबीआई कराएगा ई-नीलामी
Sat, 01 Aug 2026 12:46 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:46 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण के लिए बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण लेने का फैसला किया है। वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार 13 वर्ष अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां जारी की जाएंगी, जिनकी बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से ई-नीलामी द्वारा की जाएगी। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल सरकार फिर लेगी कर्ज।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं के वित्तपोषण के लिए खुले बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने का निर्णय लिया है। राज्य के वित्त विभाग ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर दी है। यह राशि प्रदेश में सड़क, पुल, भवन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के साथ-साथ स्वीकृत विकास योजनाओं पर खर्च की जाएगी।
ऋण जुटाने की प्रक्रिया और उद्देश्य
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सरकार 13 वर्ष की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) जारी करेगी। इन प्रतिभूतियों की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए संपन्न होगी। इस नीलामी में बैंक, बीमा कंपनियां, वित्तीय संस्थान और अन्य अधिकृत निवेशक भाग ले सकेंगे। नीलामी से प्राप्त धनराशि सीधे राज्य सरकार के खाते में आएगी, जिसका उपयोग बजट में स्वीकृत योजनाओं और पूंजीगत विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान चरणबद्ध तरीके से बाजार से ऋण जुटाती है। यह प्रक्रिया राज्यों को केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा निर्धारित उधार सीमा के भीतर वित्तीय संसाधन प्राप्त करने की अनुमति देती है। राज्य सरकार का मानना है कि विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और पूंजीगत निवेश को बढ़ाने के लिए समय-समय पर बाजार से ऋण लेना आवश्यक है।
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ऋण जुटाने की प्रक्रिया और उद्देश्य
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सरकार 13 वर्ष की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) जारी करेगी। इन प्रतिभूतियों की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए संपन्न होगी। इस नीलामी में बैंक, बीमा कंपनियां, वित्तीय संस्थान और अन्य अधिकृत निवेशक भाग ले सकेंगे। नीलामी से प्राप्त धनराशि सीधे राज्य सरकार के खाते में आएगी, जिसका उपयोग बजट में स्वीकृत योजनाओं और पूंजीगत विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
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प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान चरणबद्ध तरीके से बाजार से ऋण जुटाती है। यह प्रक्रिया राज्यों को केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा निर्धारित उधार सीमा के भीतर वित्तीय संसाधन प्राप्त करने की अनुमति देती है। राज्य सरकार का मानना है कि विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और पूंजीगत निवेश को बढ़ाने के लिए समय-समय पर बाजार से ऋण लेना आवश्यक है।
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बढ़ता कर्ज और वित्तीय चुनौतियां
हालांकि, इस नई उधारी के साथ हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ भी बढ़ने की आशंका है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक हिमाचल प्रदेश की कुल देनदारियां और बकाया ऋण 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं। इस आंकड़े में बाजार से लिए गए ऋण, केंद्र सरकार से प्राप्त कर्ज, सार्वजनिक खाते की देनदारियां और अन्य वित्तीय दायित्व शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में सीमित संसाधनों और अधिक विकास लागत के कारण उधारी पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक रहती है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि ऋण की राशि का उपयोग सड़क, पुल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाए, तो यह भविष्य में राज्य की आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार बढ़ता कर्ज सरकार के ब्याज भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव भी डालता है। ऐसे में, सरकार के सामने विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 700 करोड़ रुपये की इस उधारी की पूरी प्रक्रिया आरबीआई के माध्यम से निर्धारित नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी। इसके बाद जुटाई गई राशि का उपयोग विभिन्न विभागों की स्वीकृत विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण कार्यों में किया जाएगा।
हालांकि, इस नई उधारी के साथ हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ भी बढ़ने की आशंका है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक हिमाचल प्रदेश की कुल देनदारियां और बकाया ऋण 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं। इस आंकड़े में बाजार से लिए गए ऋण, केंद्र सरकार से प्राप्त कर्ज, सार्वजनिक खाते की देनदारियां और अन्य वित्तीय दायित्व शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में सीमित संसाधनों और अधिक विकास लागत के कारण उधारी पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक रहती है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि ऋण की राशि का उपयोग सड़क, पुल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाए, तो यह भविष्य में राज्य की आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार बढ़ता कर्ज सरकार के ब्याज भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव भी डालता है। ऐसे में, सरकार के सामने विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 700 करोड़ रुपये की इस उधारी की पूरी प्रक्रिया आरबीआई के माध्यम से निर्धारित नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी। इसके बाद जुटाई गई राशि का उपयोग विभिन्न विभागों की स्वीकृत विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण कार्यों में किया जाएगा।