हिमाचल: अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा विस्तार पर सरकार से जवाब तलब, सीएस को हलफनामा पेश करने के लिए कहा
प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों-अधिकारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को आदेश दिए हैं कि वह वर्ष 2017 से अब तक दिए गए ऐसे सभी सेवा विस्तार मामलों का पूरा ब्योरा हलफनामे के माध्यम से अदालत में पेश करें। यह मामला 19 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट की ओर से जनहित में दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के उल्लंघन से जुड़ा है। उस समय अदालत ने आदेश दिया था कि किसी कर्मचारी को उसकी सेवानिवृत्ति की आयु के बाद तब तक सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा, जब तक कि वह हैंडबुक ऑन पर्सनल मैटर्स के अध्याय-22 और फंडामेंटल रूल्स 56 (डी) के विशेष प्रावधानों के तहत न आता हो।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार की ओर से कई सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध जाकर सेवा विस्तार दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष कई ऐसे अदालती आदेश पेश किए, जो कोर्ट के पुराने निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार को 19 दिसंबर 2017 से लेकर अब तक दिए गए सभी सेवा विस्तारों की सूची कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को होगी।
सेवा विस्तार के लिए होनी चाहिए अतिरिक्त क्षमता, बौद्धिक और वैज्ञानिक योग्यता
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सेवा विस्तार केवल उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए, जिनके पास अपने क्षेत्र का उत्कृष्ट ज्ञान हो। व्यक्ति में अतिरिक्त क्षमता, बौद्धिक और वैज्ञानिक योग्यता होनी चाहिए। दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में ही सरकार कर्मचारियों को सेवा विस्तार दे सकती है। लेकिन, प्रदेश में सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, उन सभी कर्मचारियों को सेवा विस्तार दे रही है, जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह कार्मिक विभाग की नियमावली और समय-समय पर माननीय न्यायालयों की ओर से पारित आदेशों का उल्लंघन है।
सरकार ने पदोन्नति वेतन वृद्धि मामले में दायर की अपील
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले प्रमोशन इंक्रीमेंट के लाभों को देने वाले एकल जज के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर एलपीए पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले पर कोई अंतिम रोक नहीं लगाई है। अदालत ने राज्य सरकार बनाम सूर्या प्रभा मामले में सरकार की ओर से अपील दायर करने में हुई 176 दिनों की देरी को माफ कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। यह मामला उन जूनियर बेसिक टीचर्स को पदोन्नति इन्क्रीमेंट से जुड़ा है, जिन्हें 1 अक्तूबर 2012 से पहले हेड टीचर के पद पर पदोन्नत किया गया था।
एकल जज ने 28 मई 2025 को एक फैसले के तहत उन जूनियर बेसिक टीचर्स को पदोन्नति इन्क्रीमेंट देने का निर्देश दिया था, जिन्हें 1 अक्तूबर 2012 से पहले हेड टीचर के पद पर पदोन्नत किया गया था। लेकिन विभाग की ओर से कोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने इसके खिलाफ अदालत में क्रियान्वयन याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद विभाग इंक्रीमेंट जारी नहीं कर रहा है। 3 सितंबर 2025 को उपनिदेशक स्कूल शिक्षा प्रारंभिक शिमला ने कोर्ट के आदेशों की अनुपालन करते हुए एक कार्यालय आदेश जारी किया है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को हाईकोर्ट के निर्णय को याचिकाकर्ताओं के संबंध में लागू करने का निर्देश दिया गया है। अदालत के निर्देशों के बाद विभाग ने कुछ कर्मचारियों को यह लाभ जारी भी कर दिया है। अपील दायर होने से मामले में नया मोड़ आ गया है।