सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal High Court Rules, Appeals Cannot Be Dismissed Outright Like Administrative Files

हिमाचल: अपीलों को प्रशासनिक फाइल की तरह सीधे खारिज नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 05 Jun 2026 06:00 AM IST
विज्ञापन
सार

हाईकोर्ट ने लोक सेवा और प्रशासनिक मामलों में अपीलों को प्रशासनिक स्तर पर ही खारिज करने या बिना विचार किए वापस लौटाने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। 

Himachal High Court Rules, Appeals Cannot Be Dismissed Outright Like Administrative Files
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक सेवा और प्रशासनिक मामलों में अपीलों को प्रशासनिक स्तर पर ही खारिज करने या बिना विचार किए वापस लौटाने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही कोई अपील तय समयसीमा के बाद दायर की गई हो, लेकिन उसे प्रशासनिक फाइल की तरह सीधे खारिज नहीं किया जा सकता। अपील को स्वीकार करना और उस पर कानूनी आधार पर कारण बताते हुए फैसला देना एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसका पालन अनिवार्य है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं कि वह चार सप्ताह के भीतर राज्य के सभी अर्ध-न्यायिक प्राधिकारियों को इस फैसले के अनुरूप आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना सुनिश्चित करें। निर्देशों के अनुपालन के लिए इस मामले को 6 जुलाई को दोबारा सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह आदेश अनीता कुमारी मामले में पारित किए हैं।

Trending Videos

याचिकाकर्ता ने सोलन जिले के अर्की में आशा फैसिलिटेटर के पदों पर नवंबर 2025 में हुई नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इसके अलावा उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन के 26 फरवरी 2026 के उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी अपील को बिना सुने सिर्फ इसलिए वापस कर दिया गया था क्योंकि वह परिणाम घोषित होने के तय 15 दिनों के भीतर दायर नहीं की गई थी। विभागीय नीति के नियम 12 का हवाला देते हुए सरकार ने दलील दी कि नियम स्पष्ट कहते हैं कि 15 दिन के बाद कोई भी अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर इसे खारिज करना सही था। सरकार की इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि नियमों में तय समयसीमा की भाषा का इस्तेमाल अधिकारी अपनी अर्ध-न्यायिक जिम्मेदारियों से भागने के लिए एक ढाल के रूप में नहीं कर सकते। कोई अपील समयबद्ध है या नहीं, इसका निष्कर्ष भी सक्षम प्राधिकारी को दोनों पक्षों को सुनने के बाद एक अर्ध-न्यायिक आदेश पारित करके देना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

अकसर देखा जा रहा है कि प्राधिकारी ऐसी अपीलों को एक सामान्य सरकारी कार्यालय की फाइल या साधारण प्रतिवेदन की तरह संभालते हैं और एकतरफा पत्र जारी कर मामला रफा-दफा कर देते हैं, जो कानूनन गलत है। हर प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक आदेश में स्पष्ट और ठोस कारण लिखे होने चाहिए। बिना वजह या केवल रबर-स्टैंप की तरह जारी किए गए आदेशों को कानून की नजर में सही नहीं माना जा सकता। यदि आदेश में कारण नहीं लिखे होंगे, तो पीड़ित पक्ष को यह पता ही नहीं चलेगा कि उसकी अपील क्यों खारिज हुई और इससे उच्च अदालतों के लिए भी उस आदेश की कानूनी सत्यता की जांच करना मुश्किल हो जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन ने अपनी अनजाने में हुई गलती को स्वीकार किया और अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ता की अपील पर अब 9 जून को सुबह 11 बजे नए सिरे से अर्ध-न्यायिक सुनवाई तय की गई है, जहां गुण-दोष के आधार पर लिखित आदेश पारित किया जाएगा।इस आश्वासन के बाद हाई कोर्ट ने पुराना विवादित प्रशासनिक आदेश रद्द कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed