हिमाचल: बिजली संशोधन विधेयक के विरोध में गरजे कर्मचारी, निजीकरण का आरोप
बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 के विरोध में मंगलवार को हिमाचल प्रदेश में बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और पेंशनरों ने प्रदर्शन किया।
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केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 के विरोध में मंगलवार को हिमाचल प्रदेश में बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और पेंशनरों ने प्रदर्शन किया। शिमला और धर्मशाला में सैकड़ों कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर विधेयक को वापस लेने की मांग उठाई। बोर्ड के कर्मचारियों, अभियंताओं और पेंशनरों के संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बोर्ड मुख्यालय शिमला में भोजनावकाश के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। यह प्रदर्शन बिजली कर्मचारी एवं अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर किया गया।
उनका आरोप है कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियां कमजोर होंगी और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में बिजली वितरण का निजीकरण जनता के हितों के खिलाफ होगा।
इससे बोर्ड की व्यवस्था, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और पेंशनरों की सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने बिजली (संशोधन) विधेयक वापस नहीं लिया तो देशभर के कर्मचारी संगठन मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा को मुनाफे के लिए निजी कंपनियों को सौंपने का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।