Himachal News: नशे के खात्मे के लिए गठित एसटीएफ पर ही दाग, उठे कई सवाल
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच शिमला में पकड़े गए करीब एक करोड़ रुपये के एलएसडी तस्करी मामले ने नशे को खत्म करने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स के कर्मियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। आरोपों के मुताबिक जिन लोगों पर नशा तस्करी को रोकने का जिम्मा था, वही नशा तस्करी से जुड़े मामले में संलिप्त पाए जा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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एक करोड़ रुपये के एलएसडी नशे के मामले में एसटीएफ के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने से स्टेट टास्क फोर्स की छवि भी दागदार हुई है। आरोपों के मुताबिक जिन लोगों पर नशा तस्करी को रोकने का जिम्मा था, वही नशा तस्करी से जुड़े मामले में संलिप्त पाए जा रहे हैं। पुलिस ने जब मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों, उनकी कॉल डिटेल और आईपीडीआर रिपोर्ट खंगाली तो आठ मार्च को इनकी लोकेशन एक ही जगह पर कुल्लू में पाई गई।
वहीं, पुलिस को संदीप और नविएल हैरिसन से पूछताछ में भी कई अहम सबूत मिले। इससे एसटीएफ के चारों पुलिस कर्मियों की संलिप्तता को लेकर पुलिस के हाथ कई अहम सबूत लगे। मामला उस समय सामने आया जब न्यू शिमला में 10 मार्च को पुलिस ने एलएसडी नशे के साथ संदीप और प्रिया को पकड़ा था। जांच आगे बढ़ने पर एलएसडी के सप्लायर केरल के रहने वाले नविएल हैरिसन को हरियाणा से पकड़ा गया और अब इस मामले में एसटीएफ के चार कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं। हालांकि पुलिस विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले चारों कर्मचारियों को निलंबित किया और अब जांच के बाद बर्खास्त करने की बात कही जा रही है। लेकिन सरकार ने जिस एसटीएफ का गठन प्रदेश में बढ़ रहे नशा तस्करी के फैले जाल से निपटने के लिए किया था, आज उसको लेकर ही कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसको देखते हुए सीआईडी ने अब एसटीएफ में तैनाती को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने का फैसला लिया है।
विभागीय स्तर पर सभी कर्मचारियों के प्रोफाइल को जांचा जा रहा है। विभाग ने कहा है कि अगर इस मामले में और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, पुलिस विभाग ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी खोल दी है। वहीं जांच में अगर सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो चारों को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। एडीजी सीआईडी ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि नशा तस्करी के मामलों को लेकर विभाग का कड़ा रुख है। इसमें विभाग के संलिप्त कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में भी विभाग ने जांच के बाद त्वरित कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अब विभागीय स्तर पर एसटीएफ के कार्यरत लोगों के प्रोफाइल को भी जांचा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में इस तरह के मामले सामने न आएं।
एक करोड़ के एलएसडी मामले में आरोपियों से पूछताछ और प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। नशा तस्करी में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि 8 मार्च को कुल्लू में शिमला में पकड़ी गई एलएसडी की खेप से दो गुना से ज्यादा एलएसडी को तस्करी करके लाया था। बाद में शिमला में आरोपियों से पकड़ी नशे की खेम कम निकली है। इसी बीच आरोपों के घेरे में आए एसटीएफ कुल्लू के कर्मचारियों ने नशे को पकड़ा लेकिन मामला दर्ज करने की जगह खुद इस पूरे मामले में संलिप्त हो गए।