यहां 601 मतदाताओं ने किया चुनाव का बहिष्कार, तो इस बूथ पर नहीं पड़ा एक भी वोट
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हिमाचल विधानसभा चुनाव में जहां हर उम्र के लोगों में मतदान के लिए भारी उत्साह दिखा, वहीं कई क्षेत्रों में नेताओं के झूठे वादों से उखड़े मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया।
ग्राम पंचायत मंगला के तहत टपूण पोलिंग बूथ के ज्यादातर मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। पोलिंग बूथ में 671 वोटों में से मात्र 70 मतदाताओं ने ही मतदान दिया। जबकि 601 मतदाताओं ने वोट डालने से इंकार कर दिया।
लोगों में आज भी मूलभूत मांगे पूरी न होने पर गुस्सा भरा पड़ा है। लोगों का कहना है कि हर बार उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मगर अब तक क्षेत्र के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं सड़क, बिजली और पानी की है।
मतदाताओं का कहना है कि 2012 और अब के विस चुनावों में उतरे प्रत्याशी यहां लोगों से वोट की अपील करने तक नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंगला से टपूण के लिए दस किलोमीटर सड़क बननी थी। मगर पिछले दस सालों में महज दो किलोमीटर कच्ची सड़क बनी है।
इसके अलावा धार से बाड़ी वाया बरोंटा के लिए भी सड़क का निर्माण होना था। मगर सर्वे के सिवा आज दिन तक कुछ नहीं हो पाया है। इसी बात को लेकर मतदाताओं ने विस चुनावों का बहिष्कार किया है।
पोलिंग ऑफिसर संजय कुमार ने बताया कि टपूण पोलिंग बूथ में 70 मतदाताओं ने ही मतदान किया है। जबकि 601 मतदाताओं ने चुनावों का बहिष्कार किया है। इसमें 671 मतदाता मतदान करने वाले थे।
मूलभूत सुविधाएं न मिलने पर चुनावों का बहिष्कार
मूलभूत सुविधाएं न मिलने के कारण नेताओं से उखड़े संधोल के चतरौण और घनाला बूथ के वोटरों ने चुनावों का बहिष्कार किया है। वीरवार को लोकतंत्र के सबसे बड़े मतदान रूपी पर्व में वोट डालने की बजाय मतदाता दिहाड़ी लगाने और खेतों में व्यस्त दिखे।
चतरौण में 539 मतदाताओं में से एक ने भी वोट नहीं डाला। जबकि घनाला में 391 में से 23 मत पड़े हैं। बेहतर सड़क, यातायात के लिए पिछले करीब 20 सालों से इन क्षेत्रों के लोग संघर्ष कर रहे हैं।
लेकिन न तो नेताओं और न ही प्रशासन ने इनकी सुनी और अब लोगों ने मतदान के अधिकार से ही किनारा कर लिया। लोगों का कहना है कि प्रशासन के माध्यम से कई बार सरकार को समस्याओं को लेकर अवगत करवाया,
लेकिन जब कोई कार्य नहीं हुआ तो लोगों ने बहिष्कार करने का निर्णय लिया। जिन गांव के लोगों ने वोट नहीं डाले हैं उनमें चतरौण, मसोत, कन्द्रोह, बांह और सेड के लोग शामिल हैं।
आज तक कच्ची सड़क
बहिष्कार समिति के अध्यक्ष अध्यक्ष मान सिंह समेत लोगों में कलीराम, वीर सिंह, शंभू राम, संत राम, टेक चंद, कौल सिंह ने कहा कि कोठवां नेरी वाया चतरौण सड़क 20 वर्ष पहले बनाई गई है जो आज दिन तक पक्की नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि हल्की सी भी बरसात होने पर यह सड़क बंद हो जाती है जिससे बच्चों, बुजुर्गों और खासकर गर्भवती महिलाओं को बड़ी मुश्किल से मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए पालकी का सहारा लेना पड़ता है।
यह समस्याएं भी गिनाईं
पिछले 3 दशकों से डेढ़ दर्जन पंचायतों के केंद्र संधोल विकास के क्षेत्र में उपेक्षित रहा है। अस्पताल में स्टाफ नहीं है। क्षेत्र की सभी सड़कें कच्ची हैं, सबसे पुरानी तहसील के पटवार सर्किल को काटकर इसे महज पटवारखाना बना दिया है। नये बस रूट तो दूर पुराने बस रूटों जिसमें करीब एक दर्जन बस रूटों पर चलने वाली बसों को बंद कर दिया है।
प्रशासन की कोशिश रही नाकाम
बहिष्कार का नोटिस पहले ही ग्रामीणों ने प्रशासन को दे दिया था। एसडीएम धर्मपुर मुकेश रेस्पवाल एवं एडीसी अश्वनी चौधरी ने लोगों से संपर्क करके मतदान की अपील की लेकिन, वह नहीं मानें। वीरवार को मतदान के दिन लोग अपने अपने निजी कार्यों तथा दिहाड़ी में व्यस्त रहे। उधर, उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने कहा कि ग्रामीणों से अपील की गई थी, लेकिन मत का प्रयोग नहीं किया।
चतरौण बूथ का विवाद पुलिस तक पहुंचा, बीएलओ बेहोश
चतरौण बूथ में मतदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बीएलओ का आरोप है कि कोई भी वोटर न आने पर उससे जबरन मतदान करवाया गया। जिससे वह बेहोश हो गईं। सूचना के बाद 108 के माध्यम से उसे अस्पताल लाया गया।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। उधर कुछ देर के लिए मतदान केंद्र में ग्रामीण भी एकत्र हो गए। उधर, जांच अधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि शिकायत मिली है। आब्जर्वर पर जबरन वोट करवाने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले में जांच कर रही है।
चुराह में सौ वोटरों का नाम सूची से गायब
विधानसभा क्षेत्र चुराह में सौ के करीब मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से महरूम रह गए। इसकी वजह यह रही कि इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब थे।
यह मतदाता ग्राम पंचायत करेरी, कल्हेल, चरोड़ी, बैरागढ़, देवीकोठी, झज्जाकोठी सनवाल, खुशनगरी, चांजू और देहरा से संबंध रखते हैं। मतदाता सूची में नाम न होने पर निराशा मतदाताओं ने बताया कि वे सुबह मतदान के लिए निकले थे।
मगर वहां विभिन्न दलों के लगे के कार्यकर्त्ताओं ने जब मतदाता सूची में नाम तलाशा। लेकिन उनका नाम नहीं मिल पाया। मतदाताओं में राजकुमार, उत्तम दास, परमेश कुमार, रमेश कुमार, धर्मुुुराम, गिंदो सिंह, प्यार सिंह, भगत राम, जयराम, योगराज ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले हुए पंचायत चुनावों में मतदान किया था।
पंचायत चुनावों के दौरान उनका नाम सूची में था। मगर वे इस बात से हैरान है कि दो सालों में ही उनका नाम मतदाता सूची से कैसे गायब हो गया। कुल मिलाकर विधानसभा चुनावों में मतदान न करने से वे निराश है।
आधा दर्जन नवविवाहिता भी नहीं कर पाई मतदान
इक्का-दुक्का शिकायतें मिली है : एसडीएम तीसा
एसडीएम तीसा हेमचंद वर्मा ने बताया कि इस बारे कुछ सूचनाएं मिली हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कई बार लोगों से मत बनाने का आग्रह किया गया। मगर लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि आगामी समय में बेहतर प्रयास किए जाएंगे।
मतदान करके लौट रहे बुजुर्ग की गिरकर मौत
होली क्षेत्र के तहत ग्राम पंचायत गरोला के रहने वाले बुजुर्ग की मतदान करने के बाद घर वापस आते समय गिरने से मौत हो गई। मृतक की पहचान गजो राम उम्र 64 निवासी गांव बासंदा के रूप में हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भरमौर अस्पताल ले जाया गया है। जानकारी के अनुसार गजो राम वोट डालने के लिए स्वाई पोलिंग बूथ में गया था। यहां गजो राम ने मताधिकार का प्रयोग किया और वापस घर की राह पकड़ी। घर के समीप पहुंचते ही गजो राम का पांव फिसल गया।
इसके चलते वह खाई में जा गिरा। इसके बाद लोगों ने गजो राम को उठाया। मगर तब तक गजो राम की मौत हो चुकी थी। लोगों ने गजो राम के परिजनों को सूचित किया। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को भरमौर अस्पताल ले जाया गया। एएसपी चंबा वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि पैर फिसलने से एक व्यक्ति की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है।