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Himachal: बाहरी अफसरों के मामले पर सुक्खू सरकार के मंत्री अनिरुद्ध और विक्रमादित्य आमने-सामने, जानें मामला

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 15 Jan 2026 12:19 PM IST
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सार

बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अफसरों पर विवादित बयान के बाद सुक्खू सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। 

Himachal sukhu govt Ministers Aniruddha singh and Vikramaditya singh face to face
मंत्री अनिरुद्ध सिंह और मंत्री अनिरुद्ध सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अफसरों पर विवादित बयान के बाद सुक्खू सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता जैसा कि एनएचएआई के अफसरों का किया। बता दें कि विक्रमादित्य के बयान के बाद सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की प्रतिक्रिया आई थी। अब अनिरुद्ध सिंह ने टिप्पणी तो विक्रमादित्य ने उन्हें उनके पुराने विवाद पर घेरने का प्रयास किया। अब पूरे मामले में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य चारों तरफ घिर गए हैं। आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी विरोध में उतर आए हैं।

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मंत्रियों को अफसरों से काम करवाना आना चाहिए: अनिरुद्ध
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध ने बुधवार को विक्रमादित्य के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयानों से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों से हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मंत्रियों को अफसरों से काम करवाना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी गलतियां छिपाने के लिए अधिकारियों पर गाज गिराना सही नहीं है। काम करवाने का भी तरीका होना चाहिए। अपनी गलती किसी और पर डालना उचित नहीं है।  उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ के तौर पर काम करते हैं। वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। साल 2016 के बाद तो प्रदेश में नए आईएएस अधिकारी भी नहीं आए हैं। यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनते हैं। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी बाहरी राज्यों में काम कर रहे हैं। 

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मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा कि एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ: विक्रमादित्य
मंत्री अनिरुद्ध सिंह की टिप्पणी के बाद देर शाम लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य ने कहा कि जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह तजुर्बे, रुतबे और उम्र में उनसे बड़े हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं और साथ ही अधिकारियों का भी। उन्होंने नाम लिए बगैर कहा कि, मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा कि एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ था। विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर कहा- मैं जो भी कहता हूं, वह साफ शब्दों में कहता हूं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए अगर मुझे किसी के सामने बुरा भी बनना पड़े तो मैं तैयार हूं। उप मुख्यमंत्री ने जो बात कही, उन्होंने तो उसे सेकंड किया है। विक्रमादित्य सिंह ने गुरुवार को एक और पोस्ट की। इसमें उन्होंने लिखा, हमारे के लिए हिमाचल के हित सर्वश्रेष्ठ थे, है और सदैव रहेंगे। कोई भी समझाैता प्रदेश के हितों के साथ होने नहीं देंगे।' 

नीरज भारती ने विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में डाली पोस्ट
वहीं कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने भी विक्रमादित्य सिंह के बयान के समर्थन में पोस्ट की है। उन्होंने लिखा, 'बाहरी प्रदेश के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी ऐसे हैं, हिमाचल प्रदेश में जो मंत्रियों और विधायकों के फोन तक नहीं उठाते, फोन की स्क्रीन देख कर नाम पढ़कर फोन उल्टा रख देते हैं।' इससे पहले बुधवार को एक और पोस्ट में नीरज भारती ने लिखा था, 'सभी तो नहीं लेकिन 60-70 प्रतिशत बाहर के अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें हिमाचल प्रदेश या हिमाचलियों के हितों से कोई सरोकार नहीं है, कांग्रेसियों को याद होगा जब विपक्ष में थे तो एक उच्च आईपीएस अधिकारी पर पुलिस भर्ती घोटाले का आरोप लगाया था, जब कभी भी कांग्रेस या कांग्रेस के फ्रंटल संगठन विधानसभा घेराव करते थे तो वही उच्च आईपीएस अधिकारी लाठीचार्ज भी करवाता था कांग्रेसियों पर, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मजे से पूरा समय काट कर ठाठ से रिटायर हो कर गया..... पता नहीं सरकार बनने के बाद उस अधिकारी के खिलाफ किया गया कांग्रेसियों का विरोध प्रदर्शन कहां गया।'



 

भेदभाव को बढ़ावा देती है इस तरह की टिप्पणी: आईएएस अधिकारी एसोसिएशन
 हिमाचल प्रदेश आईएएस अधिकारी एसोसिएशन ने मंत्री विक्रमादित्य की टिप्पणी पर गहरी चिंता जताते हुए इसे न केवल अनुचित बताया, बल्कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुंचने की आशंका भी जाहिर की है। एसोसिएशन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अधिकारियों के मूल राज्य के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती हैं, जो सांविधानिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल में कार्यरत सभी आईएएस अधिकारी, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से, संविधान की ओर से गठित ऑल इंडिया सर्विसेज के सदस्य हैं। उनका प्रथम कर्तव्य जनता की निष्पक्ष सेवा करना, सरकार की नीतियों को ईमानदारी से लागू करना और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अधिकारियों की गरिमा, मनोबल और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाया जाए। साथ ही उच्च स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक विमर्श नीतियों और परिणामों तक सीमित रहे न कि अधिकारियों की व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर केंद्रित हो। 

हिमाचली और गैर हिमाचलियों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश: आईपीएस अधिकारी संघ
हिमाचल प्रदेश आईपीएस अधिकारी एसोसिएशन ने विक्रमादित्य सिंह के बयान को हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अवांछित विभाजन पैदा करने वाला करार दिया। एसोसिएशन ने कहा कि इस बयान से पुलिस अफसरों के मनोबल को नुकसान पहुंचा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने और भविष्य में ऐसे बयान दोहराए न जाने की मांग की है। एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि मंत्री के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाए। आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान की देन हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में निष्पक्ष, पेशेवर व एकीकृत प्रशासन उपलब्ध कराना है। आईपीएस अधिकारी, चाहे वे किसी भी कैडर या राज्य से हों, हिमाचल की जनता की सेवा समान निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी अधिकारी की मंशा पर उसके मूल या जन्मस्थान के आधार पर सवाल उठाना गलत है। 

सुक्खू सरकार में सत्ता संघर्ष चरम पर, सचिवालय बना युद्धभूमि: डॉ. राजीव बिंदल
उधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल आज अभूतपूर्व और अत्यंत विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पूरी तरह विफल, दिशाहीन और आपसी कलह में उलझी हुई है। मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्री एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त हैं और सरकार का हर घटक अपनी भड़ास निकालने में लगा है। डॉ. बिंदल ने कहा कि स्थिति यह हो गई है कि प्रदेश का सचिवालय, जहां से जनता के हित में निर्णय होने चाहिए, आज युद्धभूमि में तब्दील हो चुका है। एक मंत्री दूसरे मंत्री को कोस रहा है, मंत्री प्रशासनिक अधिकारियों पर दोष मढ़ रहे हैं और अधिकारी इस असमंजस में फंसे हैं कि वे कर्तव्य निभाएं या राजनीतिक दबाव सहें। सरकार प्रशासन से लड़ रही है और प्रशासन स्वयं को असहाय महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई का सबसे बड़ा खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है। कहा कि भाजपा प्रदेश की जनता की आवाज बनकर इस अव्यवस्था, अराजकता और विफलता के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

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