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अध्ययन में खुलासा: महिलाओं ने रचा नया इतिहास, शिक्षा और रोजगार दोनों में हिमाचल अव्वल

Mon, 13 Jul 2026 11:20 AM IST
Ankesh Dogra इंद्र सिंह थापा, शिमला।
इंद्र सिंह थापा, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 13 Jul 2026 11:20 AM IST
सार

एक नए शोध के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पिछले सात वर्षों में महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। महिला श्रम भागीदारी दर 53.8 फीसदी से बढ़कर 73.9 फीसदी पहुंच गई है, जबकि महिला साक्षरता भी 80.1 फीसदी से बढ़कर 83.1 फीसदी हो गई। अध्ययन में शिक्षा, कौशल विकास और बेहतर अवसरों को इस बदलाव की प्रमुख वजह बताया गया है।

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में पिछले सात वर्षों में जहां महिलाओं की साक्षरता तीन फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। वहीं, श्रम भागीदारी दर (एफएलपीआर) में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017-18 में जहां महिला श्रम भागीदारी दर 53.8 फीसदी थी, वहीं 2023-24 में बढ़कर 73.9 फीसदी तक पहुंच गई है।

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यह निष्कर्ष विधि जैन और डॉ. अंजू रानी के शोध द एजुकेशन-एम्प्लॉयमेंट नेक्सस: इंटर-स्टेट वेरिएशंस ऑन फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन इन इंडिया (2017-2024) में सामने आया है। शोध हरियाणा के भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां (सोनीपत) के अर्थशास्त्र विभाग में किया गया। इसमें विधि जैन शोधार्थी हैं, जबकि डॉ. अंजू रानी एसोसिएट प्रोफेसर हैं। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल फॉर रिसर्च पब्लिकेशन एंड सेमिनार में प्रकाशित हुआ है।
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शोध में महिला शिक्षा, रोजगार भागीदारी और लैंगिक समानता के संबंध का अध्ययन करते हुए हिमाचल की तुलना हरियाणा और अखिल भारतीय स्तर से की गई है। इसके अनुसार हिमाचल में महिलाओं की शिक्षा की स्थिति में सुधार ने रोजगार भागीदारी को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। महिला साक्षरता में वृद्धि, उच्च शिक्षा में भागीदारी और लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) में सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक अवसर भी बढ़े हैं। शिक्षा को महिलाओं के रोजगार से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आधार माना गया है।
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अध्ययन में महिला उच्च शिक्षा भागीदारी को भी महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा गया है। जहां महिलाओं की शिक्षा, कौशल विकास के अवसर बेहतर होते हैं, वहां महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने की संभावना अधिक है। हालांकि, स्टडी यह भी बताती है कि केवल शिक्षा बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार के अवसर, कार्यस्थल की स्थिति और सामाजिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।

हरियाणा बेहद पीछे
हरियाणा में महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 में 16 फीसदी थी, जो 2023-24 में बढ़कर 27.7 फीसदी हुई। वहीं हिमाचल में यह वृद्धि 53.8 फीसदी से बढ़कर 73.9 फीसदी तक पहुंची। हिमाचल के लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) में भी सुधार आया है। हिमाचल में जीपीआई 2017-18 में 1.28 था, जो 2018-19 के बाद 1.3 से अधिक रहा। इससे पता चलता है कि शिक्षा में महिला-पुरुष भागीदारी में अंतर कम हुआ है। वर्ष 2017-18 में हिमाचल में महिला साक्षरता दर 80.1 फीसदी थी, जो 2023-24 में बढ़कर 83.1 फीसदी तक पहुंच गई। 

राज्य में लड़कियों की स्कूल और उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम दिख रहा है। कौशल विकास कार्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर मिले हैं। मैं भी इस बारे में अध्ययन कर रहा हूं। -विनोद राणा, आर्थिक सलाहकार, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
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