Himachal Politics: पेपर लीक और भर्ती मामलों पर जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, जांच रोकने के लगाए आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस भर्ती, प्री-नर्सरी शिक्षक भर्ती और आउटसोर्स नियुक्तियों से जुड़े मामलों में जवाब दे। साथ ही दावा किया कि उनकी सरकार ने 2022 के पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में त्वरित कार्रवाई की थी, जबकि वर्तमान सरकार जांच आगे नहीं बढ़ा रही।
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर भर्ती प्रक्रियाओं और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर तीखा हमला बोला है। शिमला से जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पेपर लीक मामलों में दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय जांच को आगे नहीं बढ़ा रही है और युवाओं को गुमराह कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री यह दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार में पेपर लीक नहीं हुए, जबकि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने कितनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित की हैं। उन्होंने प्री-नर्सरी शिक्षक भर्ती और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके कारण कई प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हुई पुलिस भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों ने सामूहिक नकल (मास चीटिंग) और पेपर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए। उनके अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी भी बरामद हुई, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने मामले की जांच को आगे नहीं बढ़ाया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 2022 की पुलिस भर्ती में पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर एसआईटी का गठन किया गया, परीक्षा रद्द की गई और मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। उन्होंने दावा किया कि बाद में सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की, लेकिन वर्तमान सरकार ने उस रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की।
जयराम ठाकुर ने राज्य में सरकारी नौकरियों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में स्थायी कर्मचारियों की संख्या अधिक थी, जबकि वर्तमान सरकार के दौरान इसमें कमी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी नौकरियां देने में विफल रही है।