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HP Politics: जयराम ठाकुर बोले- दावा था प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का अब सुविधाएं बंद करने की नौबत

अमर उजाला नेटवर्क, कुल्लू/शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Feb 2026 06:43 PM IST
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सार

 जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उस फाॅर्मूले को सार्वजनिक करना चाहिए जिसके दम पर उन्होंने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया था। प्रदेश के वित्तीय हालत जिस तरह से बने हुए हैं, ऐसी स्थिति में उस फाॅर्मूले की जरूरत है।

JaiRam Thakur said there was a claim of making the state self-reliant, now the time has come to stop the facil
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने और 2032 तक सबसे समृद्धि राज्य बनाने का दावा किया था, लेकिन यहां तो इसके उल्ट हो देखने को मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उस फाॅर्मूले को सार्वजनिक करना चाहिए जिसके दम पर उन्होंने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया था। प्रदेश के वित्तीय हालत जिस तरह से बने हुए हैं, ऐसी स्थिति में उस फाॅर्मूले की जरूरत है। कुल्लू के भुंतर में आयोजित समर्पण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सीएम सुक्खू आरडीजी बंद होने को लेकर भी रोना रो रहे हैं। तीन साल से प्रदेश को ग्रांट मिल रही थी, बावजूद इसके भी विकास कार्य बंद रखे गए।

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केंद्र सरकार ने 12वें वित्तायोग के दौरान से ही आरडीजी बंद करने की बात करती रही है और जब मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में 15वां वित्तायोग आया तो उस दौरान भी इसे बंद करने की बात कही थी लेकिन हमने कोविड का तर्क देकर कमीशन को मना लिया था। कमीशन ने इसे हर साल कम करने की शर्त के साथ कुछ समय के लिए जारी रखा। ऐसे में इसे कोई अचानक बंद नहीं किया है लेकिन राज्य सरकार को इसका विकल्प तलाशना था जिसे तलाशने में वह नाकाम रही है। जयराम ने कहा कि प्रदेश में अब ऐसी स्थिति बनती जा रही है कि आम जनता की तमाम सुविधाओं को बंद किया जाएगा। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि सब्सिडी बंद करनी पड़ेगी और कर्मचारियों के देनदारी रोक दी जाएगी। हिमकेयर योजना और मुफ्त बिजली बंद की जा रही है। आने वाले समय में जिन महिलाओं को 1500 रुपये मिल रहे हैं उन पर भी संकट मंडरा रहा है।

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जयराम सरकार में कर्मचारियों की देनदारियां थीं बकाया : विनय
शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भाजपा से पूछा है कि उन्होंने जयराम ठाकुर के शासनकाल में कर्मचारियों की 12 हजार करोड़ से अधिक की देनदारियां क्यों अदा नहीं की थीं। कर्मचारियों के साथ यह कुठाराघात क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में बिलासपुर में आयोजित अतंरराष्ट्रीय इन्वेस्टर्स समिट में देश के प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि थे। प्रदेश में बड़ी औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने की जो घोषणाएं की थीं, वे आज कहां हैं। इसमें देश-विदेश के बड़े-बड़े उद्योगपति आए थे और जिसके आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। प्रदेश के सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ डाला गया, जिसका डॉम ही 50 लाख से अधिक का बनाया गया था, उससे प्रदेश के आद्योगिक विकास को कितनी गति मिली थी। उन्होंने कहा कि जितनी फिजूलखर्ची भाजपा के समय में प्रदेश में हुई,उसके सारे रिकॉर्ड टूटे हैं। विनय कुमार ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल के बयान पर उन्हें आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश को कर्ज में डूबोने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी।

अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार : टंडन
 भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि राज्य सरकार अपनी वित्तीय अव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, राजकोषीय घाटे और गलत प्राथमिकताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति नाच न जाने आंगन टेढ़ा वाली है। अपनी प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ा जा रहा है। उन्होंने शिमला में प्रेसवार्ता में कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरजीडी) का चरणबद्ध समाप्त होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि यह कई वित्त आयोगों से तय प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। राज्य सरकार को पहले से इसकी जानकारी थी, फिर भी वैकल्पिक राजस्व स्रोत बढ़ाने और खर्च नियंत्रण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने बड़ी संख्या में ओएसडी, सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों का विस्तार किया, जिससे राजस्व व्यय पर अनावश्यक बोझ बढ़ा। कई विभागों में सलाहकारों को लाखों रुपये मासिक वेतन, वाहन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले अपने घर का बजट नहीं संभाला और अब वित्तीय संकट का हवाला देकर केंद्र को दोष दे रही है। टंडन ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड जैसे समान पर्वतीय, सीमित संसाधन और पर्यटन आधारित राज्यों की तुलना करें तो उत्तराखंड ने राजस्व संग्रह, निवेश आकर्षण और वित्तीय अनुशासन में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि हिमाचल में राजस्व घाटा और कर्ज अनुपात तेजी से बढ़ा है। यह अंतर नीति और प्रबंधन का अंतर दर्शाता है। कहा कि उपलब्ध सार्वजनिक वित्तीय आकलनों के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कर्ज अनुपात 40 फीसदी से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो गंभीर चेतावनी का संकेत है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा नियंत्रित करते हुए इसे करीब 4.3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है, वह भी पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाते हुए। टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिकांश योजनाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विकास, जल, कृषि 90:10 फंडिंग मॉडल पर चलती हैं। पूर्व भाजपा सरकार के समय इन योजनाओं का अधिकतम उपयोग कर परियोजनाएं लाई गईं, जबकि वर्तमान सरकार पहल और प्रोजेक्ट तैयारी में पिछड़ गई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाकर भय और भ्रम का वातावरण बनाना गलत है। यदि सरकार के पास तथ्य हैं तो मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर जवाब दें। केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए कभी मदद से पीछे हटने का काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है, वहीं हिमाचल की कांग्रेस सरकार कुप्रबंधन और दोषारोपण की राजनीति कर रही है। जनता तथ्यों को समझती है और समय आने पर जवाब देगी।

झूठी गारंटी देने से टोका, नहीं माने तो छोड़ दी कांग्रेस : सुधीर
चुनाव में झूठी गारंटी के लिए मैंने कांग्रेस में रहते हुए सबको टाेका, लेकिन सत्ता पाने का नशा इतना चढ़ चुका था कि पार्टी जनता के साथ एक से एक झूठा वादा करती रही। यही वजह रही कि कांग्रेस सरकार का साथ छोड़ना जरूरी समझा।’ यह बात धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने चंबा में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जो गारंटियां कांग्रेस ने चुनाव में दी थीं, आज वही उनके गले की फांस बन चुकी हैं। इस सरकार में उनके अपने विधायक संतुष्ट नहीं हैं। मंत्री कैबिनेट से रोते हुए निकल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपनी दूरदर्शी दृष्टि से पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि जिस दिन सुखविंद्र सिंह सुक्खू को प्रदेश का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा, उस दिन प्रदेश का बेड़ा गर्क हो जाएगा। वैसी ही परिस्थिति आज के समय में प्रदेश में देखने को मिल रही है। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आर्थिक संकट का हवाला देकर सरकार प्रदेश की संपदा को बेचने की तैयारी कर रही है। वित्त सचिव पेंशन व वेतन सहित अन्य भत्ते बंद होने की बात कर रहे हैं, तो अगले ही दिन मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि पुरानी पेंशन व वेतन नहीं रुकेगा। इससे पता चलता है कि सरकार जानबूझ कर यह सारी साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र के दम पर प्रदेश सरकार अपनी राजनीति चमकाने में लगी है। जब उनके कहे अनुसार केंद्र पैसा नहीं दे रहा तो प्रदेश सरकार कोसना शुरू कर देती है, जबकि तेलंगाना और कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां पर केंद्र सरकार भेदभाव क्यों नहीं कर रही। मुख्यमंत्री जब केंद्र सरकार से मिलने जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को साथ लेने के बजाय पूर्व अधिकारियों को साथ लेकर जाते हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि उन्हें केंद्र सरकार से खाली हाथ लौटना पड़ता है। प्रदेश में इससे पहले भी कई मुख्यमंत्री रहे, लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री ऐसे हैं कि जिन्हें जनता दोबारा इस कुर्सी पर नहीं देखना चाहती। इस मौके पर भरमौर विधायक डॉ. जनकराज, डीएस ठाकुर, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह और भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।

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