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Shimla: आईजीएमसी के डाॅक्टरों ने रचा इतिहास; पेट बाहर निकाला, साढ़े छह घंटे चली सर्जरी, मरीज अब स्वस्थ

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Feb 2026 04:48 PM IST
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सार

आईजीएमसी शिमला के सर्जरी विभाग ने पेट के कैंसर से पीड़ित एक 44 साल की महिला मरीज का लेप्रोस्कोपी से सफल ऑपरेशन किया है। 

IGMC surgery department created history, performing this complex surgery on a cancer patient for the first tim
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव सहित डॉ. वेद शर्मा व डाॅ. विपिन शर्मा - फोटो : संवाद
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विस्तार

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के सर्जरी विभाग ने पेट के कैंसर से पीड़ित एक 44 साल की महिला मरीज का लेप्रोस्कोपी से सफल ऑपरेशन किया है। आईजीएमसी प्रबंधन का दावा है कि उत्तरी भारत के सरकारी अस्पतालों में यह पहला मामला है। सर्जरी में पेट के 90 फीसदी हिस्से को बाहर निकाल कर इसे कैंसर मुक्त बनाकर फिर से जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया थी। दो फरवरी को इस महिला मरीज की साढ़े छह घंटे तक सर्जरी चली। इसके बाद अब मरीज ठीक है, उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। सर्जरी यूनिट दो के डॉ. वेद शर्मा की अगुवाई में डाॅ. विपिन शर्मा, डाॅ. शुभम, डॉ. आशीष और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मनोज की टीम ने इस जटिल सर्जरी को पूरा किया। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव और सर्जरी विभाग के सर्जन डाॅ. वेद शर्मा तथा उनकी टीम ने पत्रकारों से बात करते हुए इस उपलब्धि के बारे में बताया।

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डॉ. वेद शर्मा ने ये कहा
डॉ. वेद शर्मा ने बताया कि कई दशकों से आईजीएमसी में लेप्रोस्कोपिक से पेट की सर्जरी की जाती रही है, लेकिन यह सबसे लंबी और जटिल सर्जरी थी। इसकी सुविधा अभी तक उत्तरी भारत के कुछ निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। साढ़े छह घंटे की इस सर्जरी में आम ऑपरेशन से दो घंटे से अधिक समय लगा। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन से लाभ यह हुआ कि मरीज जल्द रिकवर हो गई और जल्द ही अस्पताल से उसे छुट्टी दी जा रही है। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने कहा कि अस्पताल में अब पुरानी मशीनों को बदलने और नई तकनीकों को अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार कार्य किया जा रहा है।

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गुरुवार को होंगे दो मरीजों को ऑपरेशन
सर्जरी के सफल रहने के बाद अब गुरुवार को भी दो लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन रखे हैं। इसमें भी सर्जरी लंबी चलेगी और जटिल होगी। इस सर्जरी में करीब 1.60 लाख रुपये खर्च आया है निजी अस्पताल में यह खर्च चार लाख तक रहता है। आम सर्जरी में मरीज को दो से तीन सप्ताह तक अस्पताल में रखना पड़ता है, लेकिन इसमें एक सप्ताह में मरीज ठीक हो जाता है। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन में हल्का चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। लेप्रोस्कोपिक दूरबीन की तकनीक से की गई इस सर्जरी में मरीज को गैस्ट्रिक कैंसर था। इस स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग के यूनिट दो के हेड डाॅ. वेद शर्मा और सहायक आचार्य डाॅ. विपिन शर्मा ने बताया कि इस तकनीक में हल्का चीरा लगाकर लेप्रोस्कोपिक और अन्य उपकरणों की मदद से पेट के हिस्से को दूसरे चीरे लगाकर बाहर निकाला गया। इससे कैंसर वाले पार्ट को निकाल कर फिर से बाहर निकाले पेट के हिस्से को अंतर व्यवस्थित कर जोड़ने का कार्य किया गया।

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