Himachal: शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में देरी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, याचिका दायर
प्रदेश हाईकोर्ट में शिमला के जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव समय पर नहीं करवाने को लेकर याचिका दायर कर दी है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शिमला के जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव समय पर न करवाने को लेकर याचिका दायर की गई है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत इस मामले की सुनवाई करेगी। इसको लेकर निर्वाचित सदस्य ममता समेत 13 अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए वैधानिक बैठक तत्काल बुलाने की मांग की गई है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 90 और निर्वाचन नियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह किया गया है। बताया गया है कि अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव रोकना लोकतंत्र के साथ खुला खिलवाड़ है। आरोप लगाए गए हैं कि 6 जून को सभी 25 निर्वाचित सदस्य मौजूद थे, शपथ भी हुई।कानून के मुताबिक उसी के तुरंत बाद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव होना था लेकिन प्रशासन इसे करवाने में नाकामयाब रहा। इस मामले में प्रदेश सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और उपायुक्त शिमला को प्रतिवादी बनाया गया है।
जयराम जिप सदस्यों को पंचकूला क्यों ले गए, आखिर इतनी घबराहट क्यों : सुक्खू
वहीं शिमला जिला परिषद चुनाव में देरी को लेकर भाजपा के आरोपों पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पलटवार किया है। शिमला के ओकओवर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा धरने पर बैठ रही है तो बैठना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जयराम ठाकुर जिला परिषद सदस्यों को पंचकूला क्यों ले गए और आखिर इतनी घबराहट क्यों है? मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव की तारीख तय की गई थी और उस दिन उपायुक्त वहां इंतजार करते रहे, लेकिन उसी दिन जिला परिषद सदस्यों को उठाकर पंचकूला ले जाया गया। उन्होंने कहा कि उस दिन चुनाव करवाने चाहिए थे। जयराम ठाकुर को इसका जवाब देना चाहिए कि वह जिला परिषद सदस्यों को पंचकूला क्यों ले गए। सुक्खू ने तंज कसते हुए कहा कि पहले जिला परिषद सदस्यों को मंदिरों के दर्शन करवाएं और उसके बाद उन्हें चुनाव में लाएं। उनका स्वागत किया जाएगा। पंचकूला के होटल में ले जाने के बजाय अगर उन्हें धरने पर बैठाएंगे तो यह ज्यादा अच्छा है। ऐसी क्या घबराहट है? अगर भाजपा चुनाव की तारीख मांग रही है तो तारीख दे दी जाएगी। चुनाव तो होने ही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य जगह भी भाजपा के पार्षद थे। जब तक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोट नहीं पड़ जाते, तब तक उनकी अहमियत रहती है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को राजस्थान भी ले गए हैं। भाजपा पर कटाक्ष करते हुए सुक्खू ने कहा, अभी इन्हें घुमाएं, थोड़ा और समय घुमाएं और दर्शन करवाएं, उसके बाद ही चुनाव में शामिल करवाएं।
जनादेश हार चुकी कांग्रेस अब प्रशासन के सहारे चाहती है जिप पर कब्जा : जयराम
उधर, नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव रोकना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। निर्वाचित सदस्यों को अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यह स्थिति बताती है कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और जनता के जनादेश के प्रति सरकार का रवैया क्या है। जनादेश हार चुकी कांग्रेस अब प्रशासन के सहारे जिला परिषद पर कब्जा चाहती है। ठाकुर ने कहा कि ममता एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य के नाम से हाईकोर्ट में दायर याचिका में 13 निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने राज्य निर्वाचन आयोग, प्रदेश सरकार और उपायुक्त शिमला को प्रतिवादी बनाते हुए बैठक तत्काल बुलाने की मांग की है। याचिका में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 90 और निर्वाचन नियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह किया गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की तारीखें अपने आप सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। शिमला जिला परिषद में 25 निर्वाचित सीटें हैं। पंचायत चुनाव तीन चरणों 26 मई, 28 मई और 30 मई 2026 में हुए और मतगणना के बाद 31 मई, एक जून को परिणाम घोषित किए गए।
इसके बाद निर्वाचित सदस्यों की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होनी थी। 3 जून को उपायुक्त शिमला ने सभी निर्वाचित सदस्यों को 6 जून की बैठक में बुलाने का नोटिस जारी किया था। छह जून को सभी निर्वाचित सदस्य उपस्थित हुए, आवश्यक कोरम पूरा था और सभी को शपथ भी दिलाई गई। बावजूद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया तथा बैठक को बिना कोई कारण बताए स्थगित कर दिया गया। पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 90 के अनुसार परिणाम घोषित होने के बाद उपायुक्त को यथाशीघ्र और अधिकतम एक सप्ताह के भीतर निर्वाचित सदस्यों की बैठक बुलानी होती है। इसके बाद धारा 127 के तहत शपथ, प्रतिज्ञान होते ही निर्वाचित सदस्यों को अपने में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनना है। जयराम ठाकुर ने कहा कि 20 जून को एक और नोटिस जारी कर 27 जून को बैठक रखी गई। याचिका के अनुसार उस बैठक के नोटिस में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव का स्पष्ट एजेंडा तक नहीं बताया गया और 27 जून की बैठक में केवल 11 निर्वाचित सदस्य उपस्थित हुए। उपायुक्त स्वयं बैठक में मौजूद नहीं थे और बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त ने की। इसके बाद 20 जुलाई को एक और नोटिस जारी कर 3 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे बचत भवन उपायुक्त कार्यालय शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई। इस नोटिस में धारा 90 और नियम 86 के तहत चुनाव का स्पष्ट उल्लेख था। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि एक निर्वाचित संस्था को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने के लिए आखिर कितनी बैठकों की आवश्यकता है।