Himachal: मुकेश बोले- नए वाहनों का डीलर स्तर पर होगा स्थायी पंजीकरण, स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनेंगे
परिवहन विभाग की तीन साल की उपलिब्धयों को गिनाया, वहीं भविष्य की योजनाओं पर भी जानकारी दी।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता की। इस दाैरान उन्होंने जहां परिवहन विभाग की तीन साल की उपलिब्धयों को गिनाया, वहीं भविष्य की योजनाओं पर भी जानकारी दी। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश का परिवहन विभाग डिजिटल गतिविधियों के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। विभाग में परमिट की सेवाएं अब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अर्थात चेहराविहीन व्यवस्था के अंतर्गत संचालित हो रही हैं। कई सेवाओं में ऑटो अप्रूवल सिस्टम लागू किया जा चुका है, जिससे नागरिकों को पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग की ओर से जनवरी 2023 से 23 फरवरी 2026 के दौरान विभिन्न स्रोतों से 2744.02 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया, जबकि पिछली सरकार के तीन वर्षीय कार्यकाल में यह 1564.76 करोड़ था। इस प्रकार 1180 करोड़ अर्थात लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कहा कि 1 जनवरी, 2023 से 23 फरवरी 2026 तक फैंसी नंबरों की ई-नीलामी के माध्यम से सरकार को कुल 80.82 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।
नए वाहनों का डीलर स्तर पर स्थायी पंजीकरण
मुकेश ने कहा कि विभाग का यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि वाहन स्वामियों के हित व सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाए। इसी उद्देश्य से यह विचाराधीन है कि भविष्य में नए वाहनों का स्थायी पंजीकरण डीलर स्तर पर ही किया जाए। इस संबंध में एक नई कार्यप्रणाली तैयार की जा रही है, जिसके अंतर्गत अधिकृत मोटर वाहन डीलरों को ही नए वाहनों का पंजीकरण करने की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे वाहन क्रेताओं को पंजीकरण प्रक्रिया के लिए पृथक रूप से परिवहन कार्यालयों (आरएलए/आरटीओ) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह व्यवस्था लागू होने पर नए वाहन मालिकों को वाहन डिलीवरी के साथ ही स्थायी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी तथा अस्थायी पंजीकरण की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन कार्यालयों में भीड़ में भी कमी आएगी और संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं तकनीक-आधारित बन सकेगी। विभाग इस दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहा है। विभाग इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है और पंजीकरण सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से डीलर प्वाइंट पर स्थानांतरित करने की मंशा रखता है, ताकि जनता को सुगम, तेज और परेशानीमुक्त सेवा उपलब्ध कराई जा सके।
स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग तेजी से डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे सेवाएं अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बन रही हैं। इसी क्रम में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को इस आधुनिक प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि लाइसेंसिंग प्रक्रिया नागरिकों के लिए सरल और निष्पक्ष हो सके। वर्तमान में कई आरटीओ कार्यालयों में ड्राइविंग टेस्ट सीमित दिनों में आयोजित होते हैं और यह प्रक्रिया मानव संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर रहती है, जिससे आवेदकों को प्रतीक्षा और असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी चुनौती को दूर करने के लिए, राज्य सरकार स्वचालित, सेंसर आधारित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित कर रही है, जिससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया तकनीक आधारित और मानकीकृत हो जाएगी। वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए इन ट्रैकों पर सेंसर और कैमरों के माध्यम से वाहन नियंत्रण, ब्रेकिंग, लेन अनुशासन, रिवर्स ड्राइविंग और पार्किंग जैसे कौशलों का रीयल टाइम और निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाएगा। इसी तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर परिणाम स्वतः प्रणाली द्वारा तैयार होंगे। इसमें मानवीय हस्तक्षेप और पक्षपात की संभावना समाप्त होगी और केवल योग्य चालकों को ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
हरोली में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक दो महीनों में शुरू होगा
हरोली में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के अगले दो महीनों में शुरू होने की संभावना है, जबकि इस वर्ष पांच अन्य स्थानों पर जैसे पांवटा साहिब, नालागढ़, घुमारवीं, कांगड़ा और हमीरपुर में ऐसे ट्रैक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य में लाइसेंसिंग प्रणाली का व्यापक और आधुनिक रूपांतरण सुनिश्चित होगा तथा सड़क सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए मेडिकल प्रमाणन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण
ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए वर्तमान नियमों के अनुसार आवेदक को मेडिकल प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य है। यह प्रावधान सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वाहन चालक शारीरिक रूप से वाहन चलाने के लिए सक्षम है। अब परिवहन विभाग इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भविष्य में यह व्यवस्था की जाएगी कि मेडिकल प्रमाणपत्र स्वयं आवेदक की ओर से नहीं, बल्कि प्रमाणित चिकित्सक की ओर से सीधे सारथी पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इस प्रस्तावित प्रणाली के अंतर्गत, केवल पंजीकृत और अधिकृत डॉक्टर ही मेडिकल प्रमाणपत्र ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे। इससे न केवल फर्जी या अप्रमाणिक मेडिकल प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया स्वचालित, ट्रेस योग्य और पारदर्शी बन सकेगी। इस ऑटोमेटेड मैकेनिज्म के लागू होने से आवेदक को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया तेज, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी। साथ ही, इससे सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि केवल चिकित्सकीय रूप से सक्षम चालकों को ही लाइसेंस नवीनीकरण की अनुमति मिल सकेगी।