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Shimla News: भारी बारिश के बीच मल्टी टास्क वर्कर्स का चौड़ा मैदान में प्रदर्शन
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न्यूनतम वेतन देने और स्थायी नीति बनाने का प्रदेश सरकार से आग्रह
वर्कर्स ने सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्स ने शुक्रवार को बारिश के बीच चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और न्यूनतम वेतन तथा स्थायी नीति की मांग उठाई।
मल्टी टास्क वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि चार सालों में उन्होंने कई बार सीएम सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात की। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है कि आपके लिए सरकार कुछ कर रही है। खाली आश्वासन देकर उन्हें घर लौटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि चार साल में मुख्यमंत्री, विभाग के मंत्री और अन्य मंत्रियों से वह कई बार मिल चुके हैं। मल्टी टास्क वर्कर्स ने कहा कि महंगाई के इस दौर में उन्हें सिर्फ 5500 रुपये वेतन मिल रहा है और वह भी कई बार समय पर नहीं मिलता। इस कारण कई वर्कर्स को खाने के भी लाले पड़ जाते हैं।
यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा है लेकिन जिस तरह बार-बार उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिल रहे हैं, इससे अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की दो मुख्य मांगे हैं जिसमें मल्टी टास्क वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देना और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए स्थायी नीति बनाना है। कई कर्मचारी 45 साल में मल्टी टास्क वर्कर्स लगे हैं, अब 50 साल के हो गए हैं। सरकार यदि इनके लिए जल्द कोई नीति नहीं बनाती है तो रेगुलर होने के बाद भी वह ओपीएस से वंचित हो जाएंगे। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी कर्मचारियों की निगाहें बजट पर टिकी हैं यदि बजट में कोई घोषणा नहीं होती है तो सभी मल्टी टास्क वर्कर्स अन्य विभागों के वर्कर्स के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
अब बीपीएल से भी हो गए बाहर
मल्टी टास्क वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में 4,832 मल्टी टास्क वर्कर्स लोक निर्माण विभाग में काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर वो लोग लगे हैं जो बीपीएल श्रेणी में थे। लेकिन मल्टी टास्क वर्कर्स लगने के बाद सरकार ने उन्हें उससे भी बाहर कर दिया है। इस कारण जो डिपुओं में सस्ता राशन मिलता था उससे भी वंचित हो गए है।
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वर्कर्स ने सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्स ने शुक्रवार को बारिश के बीच चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और न्यूनतम वेतन तथा स्थायी नीति की मांग उठाई।
मल्टी टास्क वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि चार सालों में उन्होंने कई बार सीएम सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात की। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है कि आपके लिए सरकार कुछ कर रही है। खाली आश्वासन देकर उन्हें घर लौटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि चार साल में मुख्यमंत्री, विभाग के मंत्री और अन्य मंत्रियों से वह कई बार मिल चुके हैं। मल्टी टास्क वर्कर्स ने कहा कि महंगाई के इस दौर में उन्हें सिर्फ 5500 रुपये वेतन मिल रहा है और वह भी कई बार समय पर नहीं मिलता। इस कारण कई वर्कर्स को खाने के भी लाले पड़ जाते हैं।
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यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा है लेकिन जिस तरह बार-बार उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिल रहे हैं, इससे अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की दो मुख्य मांगे हैं जिसमें मल्टी टास्क वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देना और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए स्थायी नीति बनाना है। कई कर्मचारी 45 साल में मल्टी टास्क वर्कर्स लगे हैं, अब 50 साल के हो गए हैं। सरकार यदि इनके लिए जल्द कोई नीति नहीं बनाती है तो रेगुलर होने के बाद भी वह ओपीएस से वंचित हो जाएंगे। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी कर्मचारियों की निगाहें बजट पर टिकी हैं यदि बजट में कोई घोषणा नहीं होती है तो सभी मल्टी टास्क वर्कर्स अन्य विभागों के वर्कर्स के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
अब बीपीएल से भी हो गए बाहर
मल्टी टास्क वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में 4,832 मल्टी टास्क वर्कर्स लोक निर्माण विभाग में काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर वो लोग लगे हैं जो बीपीएल श्रेणी में थे। लेकिन मल्टी टास्क वर्कर्स लगने के बाद सरकार ने उन्हें उससे भी बाहर कर दिया है। इस कारण जो डिपुओं में सस्ता राशन मिलता था उससे भी वंचित हो गए है।