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Himachal: सीएम सुक्खू बोले- विश्राम गृहों में खाने-पीने और सफाई की व्यवस्था को आउटसोर्स किया जाएगा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 23 Mar 2026 06:18 PM IST
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सार

लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति और वन विभाग के विश्राम गृह में दी जाने वाली खाने-पीने और सफाई की व्यवस्था को आउटसोर्स किया जाएगा। 

CM sukhvinder Sukhu stated: Arrangements for food, beverages, and cleanliness in rest houses will be outsource
सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का संबोधन। - फोटो : आईपीआर विभाग
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति और वन विभाग के विश्राम गृह में दी जाने वाली खाने-पीने और सफाई की व्यवस्था को आउटसोर्स किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में यह घोषणा करते हुए कहा कि अभी कई विश्राम गृह में खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं होने से अतिथियों को दूर जाकर इसका इंतजाम करना पड़ता है। खाने-पीने के अलावा साफ-सफाई और विश्राम गृहों की सौंदर्यीकरण का काम आउटसोर्स किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही नीति बनेगी। प्रश्नकाल के दौरान विधायक केवल सिंह पठानिया ने यह मामला उठाते हुए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था करने के लिए सरकार का आभार जताया। विधायक ने इस बात पर चिंता जताई कि प्रदेश में कई विश्राम गृह ऐसे हैं जो सफेद हाथी बन चुके हैं, जहां खर्च अधिक और आय कम है।

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इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि खाने-पीने की एक रेट लिस्ट सरकार की ओर से निर्धारित की जाएगी, ताकि ठहरने वाले लोगों को इससे अधिक दर पर सेवाएं न मिल सकें। इससे पहले, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मूल प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जल शक्ति विभाग के 81 विश्राम गृह आनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध हैं। पिछले एक वर्ष में इन विश्राम गृहों से 88.71 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। ये विश्राम गृह किसान भवन और निरीक्षण कुटीर के नाम से भी जाने जाते हैं। इन भवनों की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा 21 जनवरी 2026 से शुरू की गई है, जिससे आम जनता कहीं से भी आसानी से कमरे आरक्षित कर सकती है। यदि कमरे उपलब्ध हों तो ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा भी जारी रहेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय में कई विश्राम गृहों का निर्माण जल जीवन मिशन के बजट से किया गया था। इस कारण केंद्र सरकार ने 27 करोड़ रुपये का बजट काट दिया है।
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नाबार्ड से 2,513 करोड़ की 331 योजनाएं स्वीकृत : सुक्खू
 हिमाचल प्रदेश में 1 जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2026 के बीच कुल 629 विधायक प्राथमिकता की योजनाओं की डीपीआर वित्त पोषण के लिए नाबार्ड को भेजी गईं, जिनकी अनुमानित लागत 5,314.17 करोड़ रुपये रही। इनमें से 331 योजनाओं को नाबार्ड ने स्वीकृति प्रदान की है, जिन पर 2,513.64 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। यह जानकारी झंडूता के भाजपा विधायक जीतराम कटवाल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन के पटल पर रखे गए लिखित सवाल के जवाब में दी।

2023-24 के दौरान 370 योजनाएं 2,846.89 करोड़ रुपये की भेजी गईं, जिनमें से 180 योजनाएं स्वीकृत हुईं। इन पर करीब 1,120.21 करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई। 2024-25 में 110 योजनाएं 1033.88 करोड़ रुपये की नाबार्ड को भेजी गईं। इनमें से 685.94 करोड़ रुपये की 80 योजनाओं को मंजूरी मिली। 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक 1433.40 करोड़ रुपये की 149 योजनाएं नाबार्ड को भेजी गईं। इनमें से 707.49 करोड़ की 71 योजनाओं को मंजूरी दी गई। इस अवधि में जिला बिलासपुर को कुल 10 परियोजनाओं की स्वीकृति मिली है। इनमें से झंडूता विधानसभा क्षेत्र की 2 योजनाएं शामिल हैं। 

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