सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   NITI Aayog Report Students in Himachal Continue Their Education Instead of Dropping Out

नीति आयोग की रिपोर्ट: हिमाचल प्रदेश में स्कूल छोड़ने के बजाय आगे की पढ़ाई जारी रखते हैं विद्यार्थी, जानें

अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 13 May 2026 09:41 AM IST
विज्ञापन
सार

नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया में खुलासा हुआ है कि हिमाचल में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों के स्कूल से जुड़े रहने की दर देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है। पढ़ें पूरी खबर...

NITI Aayog Report Students in Himachal Continue Their Education Instead of Dropping Out
नीति आयोग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बच्चे स्कूल छोड़ने के बजाय लगातार आगे की पढ़ाई जारी रख रहे हैं। माध्यमिक स्तर तक पहुंचने वालों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर बनी हुई है। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों के स्कूल से जुड़े रहने की दर देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है।

Trending Videos


आयोग ने हिमाचल को उन राज्यों में शामिल किया है, जहां शिक्षा तक पहुंच और विद्यार्थियों की निरंतरता मजबूत बनी हुई है। हिमाचल में प्राथमिक से अपर प्राथमिक स्तर तक विद्यार्थियों का ट्रांजिशन रेट 99.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अपर प्राथमिक से सेकेंडरी स्तर तक यह दर 98 प्रतिशत रही। प्रदेश में अधिकांश विद्यार्थी शुरुआती कक्षाओं के बाद स्कूल छोड़ने के बजाय आगे की पढ़ाई जारी रख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


देश के कई राज्यों में जहां आठवीं या दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाते हैं, वहां हिमाचल की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्कूल नेटवर्क पहुंचाना हिमाचल की बड़ी उपलब्धियों में माना जाता है।  रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का सेकेंडरी स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 102.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है।   

इस श्रेणी में हिमाचल, चंडीगढ़, गोवा, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल है। नामांकन अनुपात का 100 प्रतिशत से अधिक होना इस बात का संकेत माना जाता है कि निर्धारित आयु वर्ग से अधिक आयु के विद्यार्थी भी स्कूल शिक्षा से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट का चिंताजनक पहलू सिंगल टीचर स्कूलों की बड़ी संख्या है। प्रदेश के 2,964 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पहली से पांचवीं या उससे अधिक कक्षाओं तक के विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है।

पिछले दशक में लगातार बेहतर हुआ प्रदर्शन
नीति आयोग के अनुसार पिछले दस वर्षों में हिमाचल ने शिक्षा के कई प्रमुख संकेतकों में स्थिर सुधार बनाए रखा है। जहां कई राज्यों में माध्यमिक स्तर पर नामांकन और ट्रांजिशन रेट में गिरावट देखी गई, वहीं हिमाचल लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में बना रहा। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल ने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। हालांकि रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि अब सिर्फ स्कूलों तक पहुंच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed